ओबामा ने खत्म किया अप्रवासियों का निर्वासन

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Image caption ह्वाईट हाउस में अप्रवासी कानून की घोषणा करते हुए बराब ओबामा

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने विदेशों से आए बच्चों को अमरीका में काम करने के कारण निर्वासित नहीं करने का फैसला किया है. ओबामा ने कहा है कि यह ‘फैसला करना बहुत ही जरूरी’ था.

अमरीका में 16 से 30 साल की उम्र के बीच आकर पांच साल तक रहने के बाद अब वे वहां काम कर सकते हैं.

माना जा रहा है कि सरकार ने यह फैसला आगामी चुनाव को ध्यान में रखकर लिया गया है.

हालांकि ओबामा के प्रतिद्वन्दी रिपब्लिकन पार्टी के मिट रोमनी ने इसकी आचोलना की है. उन्होंने कहा है कि यह ऐसी समस्या है जिसका समाधान अलग ढंग से निकाले जाने की जरूरत है.

कानून जरूरी

रोमनी ने कहा कि इसके लिए कानून बनाने की जरूरत थी न कि एक कार्यकारी आदेश देकर इसे लागू किया जाना था. उन्होंने कहा कि ‘इस आदेश को कोई भी अगला राष्ट्रपति बदल’ सकता है.

सरकार के इस फैसले का असर वहां रह रहे लगभग आठ लाख लोगों पर पड़ेगा.ओबामा और उनके प्रतिद्वंद्वी रोमनी की नजर नवबंर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में स्पेनिश भाषी वोटरों पर है.

व्हाइट हाउस में बातचीत करते हुए राष्ट्रपति ओबामा ने कहा ‘यह निर्णय लेना बहुत ही सही काम है’. ओबामा का कहना था ‘इसका कोई मतलब नहीं है कि इतने प्रतिभाशाली युवाओं को अमरीका से निर्वासित कर दिया जाए.

’कानून बनाने में मदद’

राष्ट्रपति ने कहा सरकार ने यह फैसला इसलिए किया ताकि किसी को जबरन अमरीका से बाहर न भेजा जा सके.

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के इस फैसले से प्रत्यावर्तन कानून बनाने में मदद मिलेगी, जिससे कि कम उम्र में आने वाले युवाओं को अमरीका की नागरिकता दी जा सकेगी.

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Image caption शायद, अब इस तरह के प्रदर्शन की जरूरत नहीं पड़ेगी

ओबामा ने कहा, “वो युवा दिल से, दिमाग से और हर तरह से अमरीकी हैं, बस वो कागज पर अमरीकी नहीं हैं.” उन्होंने आगे कहा कि इससे देश की अर्थव्यवस्था में साकारात्मक बदलाव होगा, राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह जरूरी काम है जो हो जाना चाहिए था.

जब राष्ट्रपति बराक ओबामा यह घोषणा कर रहे थे तो आश्चर्यजनक ढ़ंग से किसी ने उनसे एक प्रश्न पूछ दिया. समान्यतया ऐसी घटनाएं होती नहीं है इसलिए ओबामा भौंचक्के रह गए.

आंख बंद नहीं

इससे पहले शुक्रवार को अमरीका की गृह मंत्री ने कहा था कि निर्वासन का कानून इसलिए नहीं बनाया गया है कि ‘व्यक्ति विशेष की परिस्थिति को ध्यान में न रखा जाए और आंख मूंदकर इसे लागू कर दिया जाए.’

उन्होंने कहा था, “जिस विवेक का इस्तेमाल कई जगहों पर होता है, यहां भी लागू होगा. लेकिन कानून में परिवर्तन का मतलब यह नहीं है कि उन्हें पूरी तरह वैधानिक मान्यता मिल गई है या फिर उन्हें नागरिकता मिल गई है. यह न तो अधिकार है और न ही माफी है.”

अगर वो उपर्युक्त मानदंडों को पूरा करते हैं तो सफल उम्मीदवारों को काम करने का दो साल का वीजा दिया जाएगा और उसे अनगिनत बार बढ़ाया जा सकता है.

रोमनी का कहना है कि ओबामा ने एक कानूनी मामले को कार्यकारी कानून बनाकर उलझा दिया है क्योंकि इसके लिए सिर्फ कानून ही कारगर हो सकता था.

रोमनी के अनुसार, “मेरा विश्वास है कि जो युवा यहां आए हैं उसमें उनका कोई दोष नहीं है. इसलिए इसका समाधान काफी पुख्ता और अच्छी तरह से किया जाना चाहिए था,जिससे कि वो जान सके कि उनका इस देश में क्या भविष्य है.”

रोमनी का कहना है कि सरकार के उठाए गए इस कदम से इस समस्या का समाधान नहीं हो पाया है बल्कि इसे ज्यादा जटिल बना दिया गया है.

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