ट्विटर पर जिहादियों की बढ़ती मौजूदगी

  • 22 जून 2012
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Image caption अल-क़ायदा नेता अयमन अल-जवाहिरी के नाम से एक अनाधिकारिक ट्विटर अकाउंट बनाया गया है.

जिहादियों और उनके हमदर्दों की सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर मौजूदगी सीमित है, लेकिन ये बढ़ रही है.

डेढ़ महीने से ज़्यादा जिहादियों के ट्वीट फॉलो करने के बाद मुझे इस बात का पता चला.

माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर इस बात की सुविधा है कि ट्विटर पर जिन लोगों का आप अनुसरण करते हैं, आप उनकी सूची बना सकते हैं.

मैंने भी ऐसे 35 ट्विटर अकाउंट की सूची बनाई जो ख़ासतौर पर जिहादी आंदोलन या मूवमेंट से जुड़े हैं. इनमें से कुछ अकाउंट के फॉलोअर या अनुयायियों की संख्या हज़ारों में हैं.

इस साल मई महीने के अंत तक शबकत अंसार अल-मुजाहिदीन ने ट्विटर पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी थी. साथ ही यमन-स्थित अंसार अल-शरिया गुट के अल-मिदाद नेटवर्क भी हाल ही में ट्विटर से जुड़ा.

लेकिन इन गुटों के अलावा भी अफ़ग़ानिस्तान के तालिबान और सोमालिया के अल-शबाब गुट भी ट्विटर पर काफी सक्रिय हैं.

इसके अलावा द जिहाद मीडिया इलीट जैसे अल-क़ायदा से संबंधित कुछ और मीडिया समूहों का भी ट्विटर पर अकाउंट है.

अनाधिकारिक अकाउंट भी

ये आधिकारिक अकाउंट ज़्यादातर ट्विटर का इस्तेमाल जिहादी सामग्री से जुड़े लिंक का प्रचार करने के लिए करते हैं. एक और ट्विटर अकाउंट जिहादी कविता और प्रार्थना का प्रचार करती है.

ट्विटर इस्तेमाल करने वाले कुछ लोगों ने अल-क़ायदा नेता अयमन अल-ज़वाहिरी, अमरीकी-यमनी धार्मिक नेता अनवर अल-अवलाकी और अन्य मशहूर जिहादी नामों के लिए अकाउंट बनाए हैं.

इन अकाउंटों पर ये लोग इन जिहादी नेताओं के भाषण, उनके संदेश और लेख आदि ट्वीट तो करते हैं लेकिन साथ ही ये भी स्पष्ट कर देते हैं कि ये अनाधिकारिक अकाउंट हैं.

ट्विटर का इस्तेमाल करने वाला एक दूसरा वर्ग उन लोगों का है जो जिहाद का समर्थन तो करते हैं लेकिन किसी आधिकारिक जिहादी संगठन का हिस्सा नहीं हैं. ये लोग ट्विटर का इस्तेमाल न सिर्फ जिहादी संगठनों की आधिकारिक सामग्री का प्रचार करने के लिए बल्कि जिहाद को बढ़ावा देने और जिहादी सिद्धांतों का बचाव करने के लिए भी करते हैं.

अल-इमाम मोहम्मद इब्न साउद इस्लामिक विश्वविद्यालय में इस्लामी कानून के प्रोफेसर और एक सउदी धार्मिक नेता, साद-अल-खथलन ने हाल ही में अल-कायदा की आलोचना करता हुआ एक ट्वीट किया.

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Image caption जिहादी सोच को फैलाने के लिए जिहाद के समर्थकों में ट्विटर का इस्तेमाल बढ़ रहा है.

अल-खथलन ने लिखा कि अल-क़ायदा 'असली इस्लामिक जिहाद' का प्रतिनिधित्व नहीं करता क्योंकि संगठन ने 'इसराइल के जायनिस्टों' और 'सीरिया की नसीरी हुकूमत' पर एक गोली भी नहीं चलाई है.

अल-खथलन के इन ट्वीटों का जिहादी समर्थकों ने काफी आलोचना की. इन लोगों ने अल-क़ायदा का बचाव करते हुए अल-खथलन पर सउदी अरब की हुकुमत का प्रवक्ता होने का आरोप लगाया. इन जिहादी समर्थकों ने दावा किया कि अल-क़ायदा और उससे जुड़े संगठनों ने इसराइल पर हमला किया है और उनकी सीरिया में भी मौजूदगी है.

प्रचार का हथियार

जिहादी समर्थकों के ट्विटर अकाउंटों पर सीरिया का मुद्दा छाया हुआ है. ये ट्विटर के ज़रिए लोगों को अल-असद हुकुमत के खिलाफ़ संघर्ष के लिए रकम दान देने के लिए बढ़ावा दे रहे हैं. ध्यान रहे कि जून में सउदी अरब ने सीरिया के लिए रकम जुटाने पर प्रतिबंध लगा दिया था.

जिहाद के हमदर्द ट्विटर का इस्तेमाल सउदी जेलों में बंद धार्मिक नेताओं की रिहाई के लिए भी कर रहे हैं. इन बंदियों में जिहादी समर्थक भी शामिल हैं. इन ट्वीटों में बंदियों की जीवनियां, सउदी अधिकारियों द्वारा उन्हें यातना दिए जाने के आरोप और उनके परिवारों की गतिविधियों की कहानियां भरी पड़ी हैं.

मैंने ये जानने की कोशिश की कि ट्विटर की इन मामलों में क्या नीति है और वो ऐसी ट्वीटों को मॉनीटर करने के लिए क्या करता है.

इस बारे में ट्विटर को भेजी गई मेरी ईमेलों का अब तक कोई जवाब नहीं आया है. ट्विटर से संपर्क करने का एकमात्र तरीका ईमेल ही है क्योंकि अगर आप फोन भी करते हैं, तो दूसरी ओर से रिकॉर्ड किया हुआ संदेश आपको ईमेल भेजने के लिए कहता है.

ट्विटर एक खुला सार्वजनिक मंच है. यानी इस साइट पर जिहादियों की मौजूदगी बढ़ने की उम्मीद है.

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