पाकिस्तान में 'परेशान' अमरीकी राजनयिक

पाकिस्तान में अमरीका का विरोध इमेज कॉपीरइट AP
Image caption पिछले साल से पाकिस्तान में अमरीका का विरोध बढ़ा है

अमरीकी विदेश मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान अमरीकी राजनयिकों को परेशान करने की घटनाएँ नाटकीय रूप से बढ़ी हैं.

रिपोर्ट में ये भी कहा है कि इस कारण उनके कामकाज पर काफी असर पड़ रहा है.

विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट ये भी कहती है कि ये दखल जान-बूझकर किया जा रहा है, साथ ही ये दुराग्रह से परिपूर्ण और सुनियोजित भी है.

विदेश मंत्रालय के महानिरीक्षक की रिपोर्ट में कहा गया है, "ऐसी घटनाएँ पिछले साल ऐबटाबाद में ओसामा बिन लादेन के खिलाफ कार्रवाई और फिर नेटो के हवाई हमले में 24 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने के बाद बढ़ी हैं."

रुकावट

राजनयिकों के कामकाज में रुकावट कई मोर्चे पर है, इनमें वीजा देना, सहायता और निर्माण परियोजनाओं को रोकना और साथ ही कर्मचारियों और ठेकेदारों की निगरानी शामिल है.

विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमरीका को ये समस्या पाकिस्तान में उच्च स्तर पर उठानी चाहिए.

ये रिपोर्ट इस्लामाबाद स्थित अमरीकी दूतावास और कराची, पेशावर के साथ-साथ लाहौर के अमरीकी वाणिज्य दूतावासों के दौरे के बाद तैयार की गई है.

रिपोर्ट में कहा गया है- अमरीकी राजयनयिक और अन्य सरकारी कर्मचारी पहले भी परेशान किए जाते रहे हैं, लेकिन अब ये स्थिति बदतर हो गई है. पाकिस्तान में अन्य देशों के राजनयिकों को भी परेशान किया जाता है, लेकिन उनका मुख्य निशाना अमरीकी राजनयिक हैं.

ओसामा बिन लादेन के मारे जाने और फिर नेटो के हवाई हमले में पाकिस्तानी सैनिकों की मौत का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल की घटनाओं के कारण अमरीका और पाकिस्तान के रिश्ते प्रभावित हुए हैं.

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