पूर्व कांग्रेसी नेता के बेटों की भूख से मौत?

  • 24 जून 2012
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Image caption शिवकुमार सिंह रामगढ़ कोलियरी में कार्यरत थे जहां 10 साल पहले उनपर पैसों के गबन का आरोप लगा था.

झारखंड सरकार नें रामगढ जिले में हुई दो सगे भाइयों की तथाकथित तौर पर भूख के कारण हुई मौत की जांच के आदेश दे दिए हैं.

यह दोनों ही भाई रामगढ में वयोवृद्ध कांग्रेसी नेता के जवान बेटे थे और कहा जा रहा है की इनकी मौत आर्थिक तंगी की वजह से हुई.

कुछ सामाजिक हलकों में मौत का कारण भूख भी बताया जा रहा है लेकिन इस बात की स्वतंत्र रूप से कोई पुष्टि नहीं हो पाई है.

रामगढ के जिला अधिकारी नें इस मामले की जांच के अलग से आदेश दिए हैं. सरकारी सूत्रों के अनुसार यह जांच दंडाधिकारी के द्वारा करवाई जा रही है.

सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार दोनों भाइयों, 28 साल के मनीष और 25 वर्षीय रजनीश की अंत्येष्टि, शव के परीक्षण कराए बिना ही कर दी गई थी, जिससे मामले की जांच में दिक्कतें आ रही हैं.

मौत पर राजनीति

मामला एक वयोवृद्ध नेता से जुड़े हेने की वजह से राज्य में प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस नें अपने तेवर कड़े कर लिए हैं. संगठन ने मामले की जांच के लिए राना संग्राम सिंह के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमिटी का गठन भी किया है.

मृतकों के पिता 70 वर्षीय शिवकुमार सिंह क्षेत्र के पुराने कांग्रेस कार्यकर्ता रहे हैं और खुद भी जबड़े के कैंसर से पीड़ित हैं, उनकी पत्नी भी ह्रदय रोग की मरीज़ हैं.

प्रशासन का कहना है कि मनीष और रजनीश भी लंबे अरसे से बीमार चल रहे थे. शिवकुमार सिंह का परिवार आर्थिक तंगी के दौर से गुज़र रहा था क्योंकि शिव कुमार सिंह की करीब 10 साल पहले नौकरी चली गई थी.

शिवकुमार सिंह सिरका कोलियरी में कार्यरत थे और करीब 10 साल पहले उनपर 50 लाख रुपये गबन का आरोप लगा था. हालांकि बाद में उन्हें इन आरोपों से बरी कर दिया गया था लेकिन उन्हें दोबारा नौकरी पर नहीं रखा गया.

गरीबी रेखा से नीचे

आस-पास के लोगों के अनुसार मनीष और रजनीश मानसिक और शारीरिक रूप से बीमार चल रहे थे. सरकार का दावा है की उनकी आर्थिक तंगी को देख कर ही सिंह परिवार को गरीबी की रेखा के नीचे वाला राशन कार्ड दिया गया था.

रामगढ के जिला-प्रशासन का कहना है कि अभी ना तो यह माना जा सकता है कि मौतें भूख से हुईं और ना ही इस बात से इनकार ही किया जा सकता है.

रामगढ़ के जिलाधिकारी अमिताभ कौशल के अनुसार, ''प्रथम दृष्टया ये मामला बीमारी और पारिवारिक परिस्थितियों से जुड़ा लगता है लेकिन शिवकुमार सिंह का परिवार अभी-भी सीसीएल के आवास में रहते हैं, इसलिए पुलिस की एक टीम को मामले की छानबीन के लिए उनके आरा स्थित पैतृक आवास भी भेजा गया है.''

अब प्रशासन को इस मामले में दंडाधिकारी द्वारा की जा रही जांच की रिपोर्ट का इंतज़ार है.

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