मुर्सी की जीत पर प्रतिक्रियाएं

  • 25 जून 2012
मोहम्मद मुर्सी इमेज कॉपीरइट AFP

मिस्र के इतिहास में दशकों बाद हुए स्वतंत्र चुनावों में मुस्लिम ब्रदरहु़ड के मोहम्मद मुर्सी को जीत हासिल हुई है. उन्हें 51.73 प्रतिशत वोट हासिल हुए हैं जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी पूर्व प्रधानमंत्री अहमद शफीक को 48.2 प्रतिशत वोट मिले हैं. चुनावी नतीजे यूँ तो अपेक्षा के अनुरूप हैं, बावजूद इसके यह क्षण दुनिया के इतिहास में अहम् स्थान रखता है.

मुर्सी की इस जीत पर दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.

प्रमुख प्रतिक्रियाएं

इस जीत के नायक मोहम्मद मुर्सी ने चुनाव जीतने के बाद ट्वीटर पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मिस्र की इमानदार न्यायपालिका के साथ पुलिस और फ़ौज के उन जवानों को सलाम किया है जिन्होंने लोकतान्त्रिक प्रक्रिया का सम्मान बचाया.

मिस्र की फ़ौज के मुखिया और होस्नी मुबारक के हटने के बाद से देश पर शासन कर रही अंतरिम सैन्य परिषद् के अध्यक्ष फील्डमार्शल मोहम्मद हुसैन तंतावी ने भी मुर्सी को राष्ट्रपति का चुनाव जीतने पर मुबारकबाद दी है.

ब्रितानी विदेशमंत्री विलियम हेग ने मुर्सी के निर्वाचन की घोषणा होने के बाद कहा " मिस्र के लोगों ने अपने लिए एक नए राष्ट्रपति का चुनाव किया है. मैं मुर्सी और मिस्र के लोगों को मुबारकबाद देता हूँ. मैं आशा करता हूँ की मिस्र के नए राष्ट्रपति देश में प्रजातांत्रिक, आर्थिक सुधारों और मिस्र के आम पुरुषों और महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करेगें."

मुस्लिम ब्रदरहुड के स्वर्गीय संस्थापक हसन अल बन्ना की बेटी इस्तिशाद अल-बन्ना ने बीबीसी से खास बातचीत में चुनावी नतीजों पर खुशी के साथ साथ भय भी ज़ाहिर किया है. इस्तिशाद ने कहा " मुझे याद है मेरे पिता अपने समर्थकों से कहा करते थे कि जब तुम लोग ख़ुश होते हो तो मैं चिंतित हो जाता हूँ." उन्होंने अपने पिता की बात को समझाते हुए कहा कि जीत के साथ बहुत बड़ी जिम्मेदारियां भी आती है. उनके अनुसार मुस्लिम ब्रदरहुड के कन्धों पर पर बहुत ही कठिन समय में बहुत ही बड़ी जिम्मेदारियां आन पड़ी हैं.

मिस्र में प्रजातांत्रिक क्रांती का बीज बोने वाला सोशल मीडिया मोहम्मद मुर्सी की जीत पर उल्लास और आशंकाओं से भरा हुआ है.

होस्नी मुबारक के दौर में उनके खिलाफ़ फेसबुक पर क्रांती की सबसे पहले ललकार देने वाले वाईल गोनीम ने चुनावी नतीजों पर कहा "आधुनिक मिस्र के इतिहास में पहला नागरिक राष्ट्रपति. क्रांती जारी है."

वहीं सुलेमान नाम के एक आदमी ने लिखा "किसी ज़माने में मुर्सी कैदी थे और मुबारक राष्ट्रपति आज एकदम उलटा है. "

मिस्र की एक अन्य नागरिक दीमा खतीब ने आशंका जताते हुए कहा कि ना जाने कब तक मुर्सी अपने पद पर बने रह सकेगें.

मिस्र में कई लोगों को मुस्लिम ब्रदरहुड के सत्ता में आने के बाद देश में धर्मनिरपेक्षता के ऊपर ख़तरा मंडराता दिख रहा है. महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाले एक समूह का दावा है कि बुर्का न पहनने वाली महिलाओं को धमकी भरे फ़ोन आना शुरू हो गए हैं.

पिछले कुछ समय से, खास तौर पर जब से यह लगने लगा था कि मुस्लिम ब्रदरहुड समर्थित मुर्सी की जीत तय है, अमरीका ने उनकी तरफ़ धीरे धीरे दोस्ती का हाथ बढ़ाना आरंभ कर दिया था.

मुर्सी की जीत पर व्हाईट हाउस के प्रवक्ता जे कार्नी ने दोनों देशों के साझा हितों को बढ़ाने की बात की है.

इस मौके पर एक बयान में कार्नी ने ने देश पर शासन कर रही सैन्य नियंत्रण वाली अंतरिम सरकार से आग्रह किया है कि को सत्ता को लोकतांत्रिक ताकतों की तरफ़ हस्तांतरित करने का काम करें.

इस बयान में मिस्र की नई सरकार से यह भी आग्रह किया गया है कि वो अल्पसंख्यकों सहित महिलाओं और देश के सभी नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करें.

अमरीका ने मिस्र इसरायल शांति समझौते की तरफ़ संकेत करते हुए कहा है कि यह ज़रूरी है कि मिस्र क्षेत्र में शांति का मज़बूत स्तंभ बना रहे.

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