लंदन ओलंपिक के दौरान तेज होगी न्याय प्रक्रिया

ओलंपिक इमेज कॉपीरइट AP
Image caption अधिकारियों का मानना है कि अपराध में लिप्त होने वाले ज्यादातर लोग लंदन के बाहर के हो सकते है, इसलिए कानूनी प्रक्रिया में तेजी जरूरी है.

लंदन में ओलंपिक से संबंधित अपराध करने वाले लोगों के खिलाफ न्याय प्रक्रिया तेज की जाएगी. क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस के अनुसार ऐसे अपराध में लिप्त पाए गए लोगों को 24 घंटों के भीतर अदालत में पेश करेगा.

क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस या सीपीएस ने कहा कि लंदन की अदालतें अब ज्यादा देर तक काम करेंगे और अदालत आने-जाने का समय बचाने के लिए ‘लाइव लिंक’ तकनीक का भी प्रयोग करेंगे.

सीपीएस का कहना है कि उन्होंने लंदन में 2011 के ग्रीष्मकालीन दंगों के सबक लेने के बाद ये फैसला लिया है, जब अदालतों ने हफ्तों की बजाय कुछ दिनों में ही फैसला सुना दिया था.

माना जा रहा है कि त्वरित न्याय के लिए झगड़े-फसाद और गाली-गलौच जैसे अपराधों को चिन्हित किया गया है.

‘ओलंपिक अपराध’

लंदन में ओलंपिक के दौरान अपराध में लिप्त पाए गए लोगों के विरुद्ध विशेष तौर पर बनाई गई ‘ओलंपिक अपराध’ श्रेणी के तहत कार्रवाई की जाएगी. टिकटों की कालाबाजारी और जेबकतरी जैसे अपराधों को भी इस श्रेणी में रखे जाने की योजना है.

इमेज कॉपीरइट PA
Image caption लंदन ओलंपिक के दौरान होने वाले विभिन्न आयोजनों के टिकटों की कालाबाजारी को भी 'ओलंपिक अपराध' की श्रेणी में रखा गया है.

जुर्म का संबंध ओलंपिक खेलों के साथ है या नहीं इसका निर्धारण जुर्म के समय, स्थान और जुर्म करने वाला दर्शक है या प्रतिभागी इसके तहत की जाएगी.

हालांकि इसके लिए कोई नया कानून नहीं बनाया गया है.

मौजूदा वर्ष के 30 सितंबर तक किए गए ओलंपिक से संबंधित अपराधों को ‘ओलंपिक अपराध’ की श्रेणी में रखा जाएगा.

सीपीएस का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य अपराधियों को जल्द से जल्द सजा दिलाना है.

जरूरत पड़ने पर लंदन की अदालतें अल सुबह या देर शाम तक खुली रहेंगी. हालांकि इन्हें रात में भी खोले जाने की कोई योजना नहीं है.

लंदन के मुख्य क्राउन अभियोजक एलिसन सौंडर्स ने ब्रितानी अखबार टाइम्स को बताया कि ये करना जरूरी है क्योंकि यहां अपराध करने वाले बहुत से लोग लंदन के निवासी नहीं होंगे.

संबंधित समाचार