क्या हैं यूरोजन की चुनौतियाँ?

यूरो मुद्रा
Image caption आशंकाओं में घिरी यूरो मुद्रा.

यूरोजोन में गहराते आर्थिक संकट ने न सिर्फ यूरोप बल्कि पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में यूरोपीय संघ की शिखर बैठक से बड़ी उम्मीदें लगाई जा रही हैं.

यूरोप में संकट से निपटने के लिए कड़े आर्थिक अनुशासन की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है. राजनीतिक एकीकरण की बातें हो रही हैं जिसका मतलब होगा कि देशों के राष्ट्रीय बजट से जुड़ी बहुत सी शक्तियां यूरोपीय संघ के पास चली जाएंगी.

लेकिन तात्कालिक जरूरत वृद्धि को बढ़ाने, नौकरियों के अवसर पैदा करने और बाजार का आत्मविश्वास बहाल करना है.

एजेंडे में क्या है?

शिखर बैठक में 130 अरब यूरो यानी 162 अरब डॉलर के प्रोत्साहन पैकेज पर चर्चा होने की संभावना है. बैठक के एजेंडे में यूरोपीय निवेश बैंक के लिए 10 अरब यूरो की राशि, यूरोपीय संघ के इस्तेमाल न होने वाले कुछ कोष का फिर से आबंटन और बुनियादी विकास ढांचे की बेहतरी के लिए रकम जुटाने के वास्ते प्रोजेक्ट बॉन्ड शामिल हैं.

शिखर बैठक में अगले सात साल के लिए (2014-2020) यूरोपीय संघ के बजट पर भी चर्चा होगी जो एक बहुत ही जटिल प्रक्रिया है. यूरोपीय आयोग ने 1025 अरब यूरो की सीमा निर्धारित की है. हालांकि ये यूरोपीय संघ के सकल घरेलू उत्पाद का सिर्फ एक प्रतिशत है, फिर भी इस मुद्दे पर अत्यधिक सौदेबाजी होगी.

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Image caption ग्रीस का संकट अब भी यूरोपीय संघ की सबसे बड़ी चिता बना हुआ है.

यूरोबॉन्ड पर भी बहुत जोर दिया जा रहा है. ये ऋण निवेश कोष है जिनके जरिए यूरोजोन के कमजोर देशों की मदद की जा सकेगी. हालांकि इस मुद्दे पर बहुत विवाद है, लेकिन ये भी उन महत्वकांक्षी प्रस्तावों में से एक है जिन पर इस शिखर बैठक में बातचीत होनी है.

यूरोपीय संघ की एकजुटता और जिम्मेदारियों को लेकर भी मतभेद हैं. जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल का कहना है कि वित्तीय जिम्मेदारियों को पहले रखा जाना चाहिए जबकि फ्रांस के राष्ट्रपतित फ्रांस्वा ओलांड समेत यूरोप कई नेताओं की मानना है कि मुश्किलों में घिरे देशों के साथ एकजुटता भी उतनी ही जरूरी है.

पिछले साल राष्ट्रपति पद संभालने के बाद से ओलांड को अपने आर्थिक वृद्धि के एजेंडे पर यूरोपीय संघ का समर्थन मिला है.

ग्रीस का क्या होगा?

ग्रीस में इस महीने हुए चुनाव के बाद राहत पैकेज समर्थक गठबंधन के सत्ता में आने पर तनाव थोड़ा कम हुआ है. ग्रीस को दिए गए राहत पैकेज की शर्तों पर कुछ हद तक नए सिरे से बात हो सकती है, लेकिन इस शिखर बैठक में नहीं. प्रधानमंत्री एंतोनिस सामारास अपनी आंख के ऑपरेशन की वजह से शिखर बैठक में हिस्सा नहीं ले रहे हैं.

बहुत से विश्लेषकों का मानना है कि ग्रीस पर लागू की गईं कड़ी बचत शर्तें वास्तविक नहीं हैं और ग्रीस को दिवालिया होने या यूरोजोन से उसके निकलने को सिर्फ टाला गया है.

जल्द ही यूरोपीय संघ और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के निरीक्षक एथेंस जाएंगे और इस बात का जायजा लेंगे कि वहां सत्ता संभालने वाली सरकार राहत पैकेज और उससे जुड़ी शर्तों को लेकर कितनी प्रतिबद्ध है.

तो क्या यूरोजोन के लिए कोई बड़ी योजना है?

पहली बार यूरोपीय संघ के नेता एक वित्तीय संघ बनाने की रूपरेखा पर बात करेंगे जिसका प्रस्ताव यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष हरमन फोन रोम्पुए ने रखा है.

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Image caption यूरोजोन संकट को टालने का सबसे ज्यादा दारोमदार फ्रांस और जर्मनी पर है

यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष जोसे मानुएल बारोसो का कहना है कि ये शिखर बैठक यूरोपीय एकीकरण के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है और “हमें तय करना होगा कि यूरोप कहां जाएगा.”

दीर्घकालीन महत्वकांक्षाओं में यूरोबॉन्ड के साथ साथ एक यूरोपीय संघ कोष बनाना शामिल है जिसके पास राष्ट्रीय बजटों में परिवर्तन और करों में समन्वय कायम करने का अधिकार होगा.

बारोसो ने कहा कि पहला कदम एक बैंकिंग संघ बनाना होगा जो यूरोपीय संधियों में बदलाव किए बिना संभव है, और इस बारे में इस साल के अंत तक कानून तैयार कर लिया जाएगा. इसका अर्थ होगा कि यूरोपीय केंद्रीय बैंक को निगरानी करने के व्यापक अधिकार मिल जाएंगे.

कुछ विश्लेषकों की दलील है कि यूरो मुद्रा वित्तीय संघ के बिना कायम नहीं रह सकती. इस संघ के पास राष्ट्रीय बजटों पर नियंत्रण और लगातार कर्ज बढ़ते रहने जैसी स्थिति को रोकने के अधिकार होंगे.

यूरोपीय संघ में बैंकिंग के मुख्य केंद्र ब्रिटेन इन योजनाओं को लेकर चिंतित है. अभी ये साफ नहीं है कि ब्रिटेन पर इसका किस तरह से प्रभाव होगा. ब्रिटेन यूरोजोन में शामिल नहीं है और फिर भी यूरोपीय संघ की एक बड़ी अर्थव्यवस्था है. ब्रिटेन यूरोपीय संघ में बजट अनुशासन को कड़ा करने के नियमों का हिस्सा नहीं था.

बेशक शिखर बैठक में इस बात पर भी चर्चा हो सकती है कि किस तरह कोई देश यूरोजोन से बाहर जा सकता है. अभी तक इसके लिए कोई व्यवस्था नहीं है. कुछ लोग कहते हैं कि ग्रीस के मुश्किल हालात को देखते हुए इस पर भी चर्चा करने की जरूरत है.

मर्केल ने कहा कि यूरोपीय संघ के नेताओं के लिए उनका एक संदेश ये होगा कि वक्त बीतता जा रहा है और "दुनिया हमारे फैसलों का इंतजार कर रही है۔"

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Image caption यूरो को संकट से निकालने की चुनौती.

बाजारों के पास 10 साल का समय नहीं है कि वे नई संस्थागत संरचनाओं के बनने का इंतजार करें. वित्तीय संघ के कुछ तत्व इतने बुनियादी हैं कि उनके लिए संधि में बदलावों की जरूरत होगी और कुछ देशों में तो जनमत संग्रह भी कराने होंगे जिसमें 10 साल का समय आसानी से लग सकता है.

राहत पैकेज से जुड़ा यूरोपीय संघ की अगली चुनौती क्या है?

कर्ज में दबे स्पेन से वादा किया गया है कि ठन ठन गोपाल हो चुके उसके बैंकों को 100 अरब यूरो की राशि दी जाएगी. अब ये संकट स्पेन तक जा पहुंचा है जो यूरोपीय संघ की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है.

स्पेन पर अभी ग्रीस जैसी कड़ी बचत शर्तें नहीं लगाई गई हैं, लेकिन उसकी कर्ज लेने की लागत बहुत ज्यादा बढ़ गई है. स्पेन के कर्ज पर ब्याज दर 6 प्रतिशत से ऊपर बना हुई है जबकि इटली में ये बढ़कर 5 प्रतिशत तक जा पहुंची है जो चिंताजनक है.

यूरोपीय संघ के नेताओं में दुविधा है. मर्केल स्पेन की बैंकों को सीधे यूरोपीय संघ के राहत कोष से कर्ज देने का विरोध कर रही हैं.

उनका कहना है कि ये यूरोपीय संघ के कर दाताओं के लिए बहुत जोखिम भरा साबित हो सकता है जिनके पैसे से ये कोष बना है. इतना ही नहीं, नकद राहत राशि देने से भी देशों का कर्ज बढ़ेगा.

यूरोपीय संघ से आर्थिक मदद मांगने वालों में ग्रीस, आयरलैंड, पुर्तगाल और स्पेन के बाद नया नाम साइप्रस का है. हर किसी के संकट की वजहें अलग अलग हैं, इसलिए समाधान भी अलग है. लेकिन सभी को खासकर युवा लोगों के लिए नई नौकरियों और आर्थिक वृद्धि की दरकार है.

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