अमरीकी प्रतिबंध: क्या कहते हैं ईरान के लोग

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Image caption अमरीका कहता रहा है कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है

ईरान से तेल आयात करने वाले देशों के खिलाफ अमरीका के नये प्रतिबंध गुरूवार से प्रभावी हो गए हैं.

ईरान का परमाणु कार्यक्रम रोकने के प्रयासों के तहत अमरीका और यूरोपीय यूनियन दोनों ने ही कई कदम उठाए हैं जिनमें ईरान से तेल निर्यात रोकना भी शामिल है.

बीबीसी फारसी सेवा ने ईरान और अन्य देशों में रहने वाले ईरानी लोगों से उनकी अपनी आर्थिक दशा और विचारों के बारे में पूछा कि ये प्रतिबंध कितने सही हैं.

तबरिज़ में रहने वाले इसफंदियार एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी हैं. वे कहते हैं, ''गुजारे के लिए मैं अपनी कार को बिना लाइसेंस वाली मिनीकैब की तरह चलाता हूं. प्रतिबंधों का बड़ा असर सरकार पर नहीं बल्कि यहां के लोगों पर पड़ेगा.''

'प्रतिबंधों को नहीं मानेगा ईरान'

इसफंदियार कहते हैं, ''प्रतिबंधों से सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता है. अमरीका दावा करता है कि वो मानवाधिकारों का समर्थन करता है. ऐसे में ईरान के लोगों पर दबाव बढ़ाने का क्य मतलब है. अमरीका ने ईरान पर जो दबाव पहले से बना रखा है, उसे ईरान कभी स्वीकार नहीं करेगा.''

वहीं लंदन में रहने वाले शापूर का कहना है कि ईरान के लिए बड़ी कीमत चुका रहे हैं, अब उन पर और वजन नहीं डाला जाना चाहिए.

वे कहते हैं, ''ईरान के संवर्धन कार्यक्रम जारी रखने से मैं सहमत नहीं हूं. मेरा मानना है कि इसे वर्षों पहले बंद कर दिया जाना चाहिए था. ईरान के खिलाफ जितने ज्यादा प्रतिबंध लगाए जाएंगे, वहां के लोगों को और ज्यादा दबाव बर्दाश्त करना होगा.''

वे कहते हैं, ''मुझे लगता है कि यूरोपीय यूनियन और अमरीका सही कर रहे हैं जो प्रतिबंधों को बढ़ा रहे हैं. इससे हो सकता है कि वे ईरान को बातचीत के लिए राजी कर सकें. लेकिन दुर्भाग्य की बात ये कि ये बातचीत बीते दस वर्षों से चल रही है जिसका कोई नतीजा नहीं निकला है.''

लोगों की बढ़ी दिक्कतें

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Image caption ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है

कारज में रहने वाले नस्तारन का कहना है कि इन प्रतिबंधों की वजह से ईरान के लोगों को बड़ी दिक्कतें हो रही हैं.

वे कहते हैं, ''मेरे रहन-सहन का तरीका देखिए. मैं खरीदारी नहीं कर सकता, फल-सब्जी, कपड़े नहीं खरीद सकता. मेरे बच्चों को चेरी खाना है लेकिन मैं खरीद नहीं सकता क्योंकि ये तीन पौंड प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिक रहा है.''

वे कहते हैं, ''यहां एक दिन किसी को नौकरी मिलती है तो अगले ही दिन नौकरी चली भी जाती है. अभी कुछ दिन पहले ही हमने एक बावर्ची रखा था लेकिन अब हम उसे नहीं रख सकते. हम अपने बिलों का भुगतान नहीं कर सकते. बीमार पड़ जाएं तो दवा नहीं खरीद सकते क्योंकि दवाएं बड़ी महंगी हैं.''

स्विटजरलैंड में रहने वाले आमिर का कहना है कि बढ़ते प्रतिबंधों के वजह से उन्हें ईरान का भविष्य उजला नजर नहीं आता है.

वे कहते हैं, ''प्रतिबंधों की वजह से ईरान की सरकार तो रुकने वाली नहीं, पर इसका सीधा असर लोगों के दैनिक जीवन पर पड़ेगा. मुझे बड़ी चिंता है क्योंकि ये सब इसी तरह जारी रहा तो ईरान अगला दक्षिण कोरिया होगा. यानी यहां बड़ी गरीबी होगी और अकाल के हालात होंगे.''

'भुगत रहे हैं आम लोग'

आमिर कहते हैं, ''ईरान इस स्थिति में है जब उसे तय करना होगा. मैं चाहता हूं कि पश्चिम ये समझे कि उसके ये तरीके ईरान की सरकार को रोकने के लिए काफी नहीं हैं. यहां के लोग गरीब हैं जिन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है.''

तेहरान में रहने वाली 60 वर्षी महिला परी कहती हैं कि उनका परिवार बड़ा है और अब हालात ऐसे हैं कि जरूरी खर्चें पूरे नहीं हो रहे हैं क्योंकि कीमतें बहुत ऊंची हैं, ऊपर से प्रतिबंध लगे हैं.

वे कहती हैं, ''मेरी किस्मत अच्छी है कि मेरे पास अपना घर है. जरा सोचिए क्या होता जो मुझे घर का किराया देना होता. किराया भी बड़ा महंगा है. यहां जो कीमतें हैं वो पागल करने वाली हैं.''

इसी तरह माशहर में रहने वाले 44 वर्षीय अब्दुल मोहम्मद कहते हैं कि प्रतिबंधों की वजह से मुश्किलें बढ़ी हैं. उनका कहना है कि सरकार को मिलने वाली किसी भी सजा का सीधा असर देश के लोगों पर पड़ता है, लोगों को उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि ये गतिरोध रातोंरात खत्म हो जाएगा.

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