मिस्र के नए राष्ट्रपति पर युवाओं की नजर

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Image caption मिस्र के युवाओं के मन में नए राष्ट्रपति के बारे में कुछ संदेह हैं

मिस्र का युवा देश के नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी की ओर उम्मीदभरी निगाहों से मगर सावधानीपूर्वक देख रहा है.

युवा कम्युनिकेशन इंजीनियर शेरीन शोभी कहती हैं कि बहुत ज्यादा आशावादी होने की जरूरत नहीं है,

वे कहती हैं, ''जल्द नजर आएगा नए राष्ट्रपति क्या करते हैं.''

वे कहती हैं कि मुस्लिम ब्रदरहुड के उम्मीदवार मोहम्मद मुर्सी राष्ट्रपति पद के लिए उनकी पसंद नहीं थे.

शेरीन ईसाई हैं और नहीं चाहती हैं कि उनका देश इस्लामी देश बन जाए.

शेरीन कहती हैं, ''वे अभी शासन नहीं कर रहे हैं, मैंने अफवाहें सुनी हैं कि ईसाइयों को जजिया कर देना होगा जो इस्लामी शासक गैर पहले गैर मुस्लिमों से लेते थे.''

क्रांति जारी रहेगी

शेरीन की तरह कई ईसाई युवाओं का संदेह है कि मुर्सी के राष्ट्रपति बनने से केवल मुस्लिम समुदाय की ही शिकायतें सुनी जाएंगी.

होस्नी मुबारक का तीस साल का शासन खत्म करने वाली क्रांति में शामिल अन्य युवाओं के मन में भी कई तरह के संदेह हैं.

उनके ये संदेह और चिंताएं सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स पर भी देखी जा सकती हैं.

अहमद सालेह ने अपने ट्विटर एकाउंट पर मोहम्मद मुर्सी का जिक्र करते हुए लिखा है, ''....तो कौन बन रहा है राष्ट्रपति, मोहम्मद बडी या मुर्सी?''

इसी तरह तारिक अली ने फेसबुक पर लिखा है, ''ईरान के सुन्नी संस्करण के लिए बधाईयां.''

लेकिन ऐसे भी लोग हैं जिनका कहना है कि ईसाईयों और महिलाओं के बारे में मुर्सी के विचारों पर बढ़ा-चढ़ाकर चिंता जताई जा रही है.

हिजाब पहनने वाली और ब्लॉग लिखने की शौकीन सारा ओथमेन कहती हैं, ''उनके भाषण अभी तक तो राहत भरे रहे हैं.''

वे लिखती हैं, ''हमें अभी तक ये नहीं पता कि उन्हें किस तरह का जनादेश मिलने वाला है.''

मुस्लिम ब्रदरहुड की आलोचक रहीं ओथमेन को उम्मीद है कि मोहम्मद मुर्सी किसी ईसाई को, किसी महिला को उप-राष्ट्रपति नियुक्त करेंगे.

जिम्मी हुड नाम से ब्लॉग लिखने वाले मोहम्मद गमाल कहते हैं कि मोहम्मद मुर्सी बुनियादी तौर पर ब्रदरहुड के ही नेता बने रहेंगे.

वे लिखते हैं, ''मुस्लिम ब्रदरहुड स्वाभाव से क्रांतिकारी नहीं है. वे क्रांतिकारी फैसले नहीं कर सकते.''

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