हमने नहीं दिया अबू जंदल को पासपोर्ट: मलिक

Image caption 26/11 मुंबई हमलों को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच फिर से वाकयुद्ध शुरू हो गया है

पाकिस्तान के गृह मंत्रालय के सलाहकार रहमान मलिक ने भारत के उन आरोपों का खंडन किया है जिसमें उसने कहा था कि 26/11 हमलों का कथित हैंडलर ज़बीयुद्दीन उर्फ अबू हमजा उर्फ अबू जंदल को पाकिस्तान ने पासपोर्ट दिया था जिसका इस्तेमाल कर वो सउदी अरब गया था.

शुक्रवार को गृह मंत्री पी चिदंबरम और गृह सचिव आरके सिंह की एक संयुक्त प्रेस वार्ता में गृह सचिव ने कहा था कि पाकिस्तान को स्वीकार करना चाहिए कि उसने जंदल को पासपोर्ट दिया, दो पहचानपत्र दिए और सऊदी अरब जाने के लिए वीज़ा भी दिया.

इस पर सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर प्रतिक्रिया देते हुए रहमान मलिक ने कहा, “नकली पासपोर्ट रखने वाले ऐसे मुजरिम पाकिस्तानी हो ही नही सकते. ज़बीयुद्दीन को कभी पाकिस्तानी पासपोर्ट नहीं दिया गया. हम मुबई हमलों की जांच में भारत का साथ देते रहेंगें. पाकिस्तान ज़बीयुद्दीन के बयान की लिखित कॉपी के साथ उसका वो पासपोर्ट भी देखना चाहेगा, जो कथित रूप से हमने जारी किया था.”

हालांकि भारतीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने शुक्रवार को ये माना कि ज़बीयुद्दीन भारतीय नागरिक हो सकता है, लेकिन उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को ये स्वीकार करना चाहिए कि उसे चरमपंथी ट्रेनिंग पाकिस्तान में ही दी गई थी.

रहमान मलिक ने ट्विटर पर ये भी लिखा कि भारत को अपने असली दुश्मनों को पहचानना होगा.

उन्होंने लिखा, “पाकिस्तान और भारत को अपने असली दुश्मनों की पहचान करनी होगी. डेविड हेडली कौन है? उसे मुंबई में फिल्म बनाने के लिए आखिर पैसा किसने दिया?”

वाकयुद्ध

ज़बीयुद्दीन की गिरफ्तारी के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर मुंबई हमलों को लेकर वाकयुद्ध शुरू हो गया है.

शुक्रवार को गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि कि उस चरमपंथी हमले के लिए सरकार की मदद के बिना कंट्रोल रूम स्थापित नहीं हो सकता था.

उन्होंने बताया कि जंदल हमले के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के मुखिया हाफिज सईद के साथ पाकिस्तान में उस कंट्रोल रूम में मौजूद था.

गृहमंत्री ने कहा कि जंदल के मुज्जमिल के साथ काफी अच्छे रिश्ते थे. जकी-उर रहमान लखवी की गिरफ्तारी के बाद मुज्जमिल ही लश्कर की संचालन गतिविधियों को चला रहा था.

चिदंबरम ने बताया, “26/11 को हुए चरमपंथी हमले के बाद जंदल ने पाकिस्तान में ऑटो मैकेनिक का काम शुरू कर दिया. लश्कर उसे हर महीने 12 हजार का वेतन देता था. ”

उन्होंने बताया कि जंदल ने ही मुंबई पर हमला करने वाले सभी 10 चरमपंथियों को जानकारी दी थी.

चिदंबरम ने कहा कि 26/11 की साजिश की कई गुत्थियां जंदल के माध्यम से ही सुलझी हैं.

बुधवार को रहमान मलिक ने कहा था कि भारत इससे पहले भी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई पर भारत में हमले कराने के आरोप लगा चुका है जो जांच के बाद गलत साबित हुए.

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