हथियारों की बिक्री को नियंत्रित करने की तैयारी

हथियारों की बड़े पैमाने पर गैर कानूनी बिक्री होती है इमेज कॉपीरइट AP
Image caption हथियारों की गैर कानूनी बिक्री से दुनिया के कई हिस्सों में सशस्त्र संघर्ष को बढ़ावा मिल रहा है.

संयुक्त राष्ट्र में एक ऐसी मजबूत और कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि तैयार करने की कोशिश हो रही है जिसका उद्देश्य दुनिया भर में हथियारों की बिक्री को नियंत्रित करना है.

सोमवार को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय में इस मुद्दे पर चर्चा शुरू होगी, जो कई हफ्तों तक चल सकती है. इसमें संधि की संभावनाओं को तलाशा जाएगा और इस मुद्दे पर ज्यादा से ज्यादा आम सहमति कायम करने की कोशिश होगी.

लेकिन बीबीसी के कूटनीतिक संवाददाता जोनाथन मारकस का कहना है कि ऐसी संधि तैयार करना आसान नहीं होगा क्योंकि दुनिया के कुछ सबसे बड़े हथियार निर्यातक देशों को इस बारे में गंभीर आपत्तियां हैं.

एक अनुमान के मुताबिक दुनिया भर में हर साल ढाई लाख लोग गैरकानूनी हथियारों की वजह से मारे जाते हैं. हथियारों की ये गैरकानूनी या पूरी तरह नियमों के मुताबिक न होने वाली बिक्री न सिर्फ सशस्त्र संघर्षों को हवा देती है बल्कि इससे भ्रष्टाचार में भी इजाफा होता है. इस वजह से दुनिया के गरीब हिस्सों में विकास की राह भी मुश्किल हो जाती है.

रूस और चीन की आपत्तियां

प्रस्तावित संधि में हथियारों के वैश्विक कारोबार के लिए साझा मानक तय किए जाएंगे. एमनेस्टी इंटरनेशनल और ऑक्सफैम जैसे गैर सरकारी संगठन इसके लिए छह वर्षों से मुहिम चला रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र के बहुत से सदस्य देश इस मुहिम को भरपूर समर्थन दे रहे हैं.

इस मुहिम में अहम योगदान देने वाले ब्रितानी राजनयिकों का कहना है कि उद्देश्य एक ऐसी संधि है जो सभी पर लागू हो. वे ऐसी संधि नहीं चाहते कि जो अपने मकसद को हासिल ही न कर पाए.

शुरू में इस प्रयास पर संदेह जताने वाला अमरीका अब इस संधि को समर्थन दे रहा है, लेकिन वो इसमें गोलाबारूद को शामिल नहीं करना चाहता है.

लेकिन दो बड़े हथियार निर्यातक रूस और चीन को इस प्रस्तावित समझौते के कई पहलुओं पर आपत्तियां है.

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