इस्लामी चरमपंथियों का 15वीं सदी की मस्जिद पर हमला

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Image caption टिम्बकटू को 15वीं-16वीं सदी के इस्लामी ज्ञान और सांस्कृतिक धरोहर के लिए जाना जाता है

माली के टिम्बकटू में इस्लामी चरमपंथियों ने 15वीं सदी की चर्चित सिद्दी याहिया मस्जिद और कई अन्य दरगाहों पर हमले किए हैं.

चरमपंथी संगठन अल कायदा से संबंध रखने वाले संगठन अंसार दीन संगठन के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया है कि उसने अपना लक्ष्य लगभग पूरा कर लिया है और बंदूकों और कई औजारों के इस्तेमाल से शहर की कई दरगाहों को नष्ट कर दिया है.

दुनिया की कला, शिक्षा और संस्कृति की रक्षा में जुटी संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनेस्को और माली की सरकार ने अंसार दीन से इस अभियान को तत्काल रोकने का अनुरोध किया है.

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Image caption टिम्बकटू में अप्रैल से इस्लामी कट्टरपंथियों का कब्जा है

दुनिया की 55 देशों की संस्था ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कॉन्फ्रेंस ने एक बयान में कहा है - "अंसार दीन ने जिन स्थलों को निशाना बनाया है वो माली की बहुमूल्य सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा हैं. उन्हें कट्टरपंथी तत्वों के हाथों नष्ट नहीं होने देना चाहिए."

टिम्बकटू - 333 फकीरों का शहर

टिम्बकटू को 15वीं और 16वीं सदी की तीन बड़ी मस्जिदों के लिए जाना जाता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस शहर की भूमिका इस्लामी ज्ञान और संस्कृति के केंद्र की रही है.

टिम्बकटू को 'सिटी ऑफ 333 सेंट्स' यानी 333 फकीरों के शहर और सूफी परंपरा के लिए भी जाना जाता है.

लेकिन इस्लामी संगठन अंसार दीन फकीरों के प्रति श्रद्धा की निंदा करता है. उसका कहना है कि जो इस्लामी इमारतें इस्लामी कानून शरिया के मुताबिक नहीं बनी हैं या फिर उसका उल्लंघन करती हैं, वो उन्हें नष्ट कर रहा है और उसे 90 फीसदी कामयाबी मिली है.

माली की सेना में तख्तापलट के बाद अप्रैल में अंसार दीन ने टिम्बकटू पर कब्जा कर लिया था. अब उत्तरी माली के तीन मुख्य केंद्र - टिम्बकटू, गाओ और किदाल इस संगठन के कब्जे में हैं.

सिद्दी याहिया टिम्बकटू की तीन प्रसिद्ध मस्जिदों में से एक है.

शहर के एक निवासी ने बीबीसी को बताया है कि सशस्त्र लोगों ने 15वीं सदी की याहिया मस्जिद का मुख्य दरवाजा तोड़ दिया है.

इस दरवाजे से फकीरों की दरगाह की ओर जाने का रास्ता था और माना जाता है कि इसे पहले कभी खोला नहीं गया था.

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