सीरियाई सरकार ने बिजली, तेजाब से यातनाएँ दीं: ह्यूमन राइट्स वॉच

  • 3 जुलाई 2012
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Image caption सीरियाई सेना पर व्यापक तौर पर यातनाएँ देने का आरोप है

मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने सीरियाई सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने सरकारी नीति के तहत विरोधियों को यातनाएँ दीं जो मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आता है.

एक रिपोर्ट में इस संस्था ने कहा है कि दोषियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत में मामला चलाया जाना चाहिए.

उधर सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद ने तुर्की के एक अखबार को दिए इंटरव्यू में हाल में तुर्की के जेट लड़ाकू विमान को सीरिया की ओर से गिराए जाने पर 100 प्रतिशत अफसोस जाहिर किया है.

बीबीसी के रक्षा और कूटनीतिक मामलों के संवाददाता जोनाथन मार्कस का कहना है कि ये असद की तुर्की और सीरिया के बीच तनाव को घटाने की कोशिश है लेकिन तुर्की की उम्मीद से बहुत कम है.

सीरिया में पिछले लगभग डेढ़ साल से लोकतंत्र के समर्थन में सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं. अनेक जगहों पर प्रदर्शनों ने सशस्त्र विद्रोह का रुप ले लिया है और विद्रोही राष्ट्रपति बशर अल असद के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.

असद परिवार पिछले 40 साल से सीरिया में सत्ता में है. सीरियाई सरकार के खिलाफ कम से कम दो बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पश्चिमी देश प्रस्ताव ला चुके हैं लेकिन रूस और चीन ने इन प्रस्तावों को वीटो कर दिया था.

'बीस अलग-अलग तरीके से यातनाएँ'

ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि सीरियाई सरकार ने व्यापक तरीके से यातनाएं देने की नीति अपनाई है.

इस संस्था ने 200 से अधिक पूर्व कैदियों को इंटरव्यू किया है जिन्हे सीरिया में प्रताड़ित किया गया था.

संस्था ने पाया है कि यातनाएँ देने के भयावक तरीकों को इस्तेमाल किया गया और इसमें लोगों की अकारण गिरफ्तारी और कैदियों का 'गायब हो जाना' शामिल हैं.

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Image caption सीरिया में महिलाओं ने भी सड़कों पर उतर कर प्रदर्शनों में हिस्सा लिया है

जहाँ ब्रितानी विदेश मंत्री विलियम हेग ने कहा है कि इस रिपोर्ट को स्पष्ट चेतावनी के तौर पर देखा जाना चाहिए वहीं पर्यवेक्षकों का कहना है कि यदि सीरियाई सरकार पर मानवता के खिलाफ अपराध जैसा कोई मामला आता है तो रूस उसे वीटो कर देगा.

रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2011 से यातनाओं की खबरें आ रही हैं. रिपोर्ट में प्रत्यक्षदर्शियों ने यातनाओं के कारण हिरासत में लोगों की मृत्यु की बात कही है.

एक 13 वर्षीय लड़के को तीन दिन तक ताल कलख नामक जगह पर यातनाएँ दी गईं. उसने ह्यूमन राइट्स वॉच को बताया, "उन्होंने मुझसे कहा तुम सूअर हो, तुम्हें आजादी चाहिए? उन्होंने मुझे पेट पर बिजली के झटके दिए, मैं बेहोश हो गया...जब दूसरी बार पूछताछ हुई तो मुझे फिर बिजली के झटके दिए गए और तीसरी बार मेरे पैर के अंगूठे का नाखून जंबूर से खींचकर निकाल दिया गया."

सीरिया ने उस संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए है जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत का गठन हुआ था और यदि आईसीसी को कोई कार्रवाई करनी है तो ये सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के बिना संभव नहीं है.

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