फुकुशिमा मानव निर्मित त्रासदी थी: जांच समिति

  • 5 जुलाई 2012
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Image caption फुकुशिमा हादसे के बाद जापान के सभी परमाणु संयंत्रों को बंद कर दिया गया था.

जापान में पिछले साल फुकुशिमा परमाणु संयंत्र में हुए हादसे की जांच करने वाली संसदीय समिति ने तत्कालीन प्रधानमंत्री नाओतो कान की सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि ये “पूरी तरह मानव निर्मित त्रासदी” थी.

समिति की रिपोर्ट कहती है, “इस संकट का पहले से अनुमान लगाकर इसे रोका जा सकता था और रोका जाना चाहिए था और प्रभावी तरीके से निपट कर इसके दुष्प्रभावों को कम किया जाना चाहिए था.”

रिपोर्ट में सरकार और फुकुशिमा परमाणु संयंत्र को चलाने वाली टेप्को कंपनी के स्तर पर गंभीर लापरवाहियों का जिक्र किया गया है.

पिछले साल 11 मार्च को जापान में आए विनाशकारी भूकंप और सूनामी के बाद छह रिएक्टरों वाले फुकुशिमा दायची परमाणु संयंत्र को भारी नुकसान हुआ.

'कई स्तरों पर लापरवाही'

उसके बाद परमाणु संयंत्र से होने वाले रेडियोधर्मी रिसाव के कारण इलाके में अफरा तफरी मच गई और हजारों लोगों को वहां से विस्थापित करना पड़ा था.

जापानी संसद ने पिछले साल मई में एक समिति का गठन किया था जिसे फुकुशिमा हादसे से निपटने के लिए अपनाए गए तौर तरीकों की छानबीन करने और अपनी सिफारिशें देने का काम सौंपा गया था.

समिति के अध्यक्ष ने कहा कि संयंत्र को भूकंप और सूनामी से हुए नुकसान के अलावा भी कई स्तरों पर लापरवाही का खमियाजा उठाना पड़ा.

रिपोर्ट कहती है, “हालांकि संकट प्राकृतिक कारणों से शुरू हुआ, लेकिन उसके बाद जो कुछ फुकुशिमा दायची परमाणु बिजली संयंत्र में हुआ, उसे प्राकृतिक आपदा नहीं कहा जा सकता. ये पूरी तरह मानव निर्मित संकट था- जिसका अनुमान लगाकर उसे उसे रोका सकता था और रोका जाना चाहिए था.”

बदली गई नीतियां

जापान में मार्च 2011 में आए नौ तीव्रता वाले भूकंप और सुनामी में तकरीबन 20,000 लोगों की मौत हो गई थी, या वो लापता हैं.

फुकुशिमा परमाणु संयंत्र विकिरण लीक होने की समस्या पैदा हो गई थी और जापान को अपनी परमाणु नीतियों पर भी दोबारा सोचने के लिए मजबूर होना पड़ा. देश के सभी 50 परमाणु संयंत्र फुकुशिमा दुर्घटना के बाद बंद कर दिए गए थे.

भारी विरोध के बावजूद जापान सरकार ने पिछले महीने अपने दो परमाणु संयंत्र दोबारा खोलने की घोषणा की थी. प्रधानमंत्री योशिहिको नोडा ने सरकार के इस कदम के समर्थन में गर्मियों में होने वाली बिजली की किल्लत की दलील दी.

रिएक्टरों की सुरक्षा के बारे में आम लोगों की चितांओं के बीच प्रधानमंत्री ने कहा है कि वे इस बात की समीक्षा करते रहेंगे कि अन्य रिएक्टरों को शुरू करना सुरक्षित होगा या नहीं.

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