जेलों से राजनीतिक विरोधियों के बच्चे चुरा लेते थे

  • 6 जुलाई 2012
जॉर्ज विडेला, रेनॉल्डो बिगनॉन इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption जॉर्ज विडेला और रेनॉल्डो बिगनॉन कई गंभीर अपराधों के लिए आजीवन कारावास की सज़ा काट रहे हैं

अर्जेंटीना के सैन्य शासन के दो पूर्व अधिकारियों को जेलों से षडयंत्रपूर्वक राजनीतिक क़ैदियों के बच्चे चुराने का दोषी पाया गया है.

ब्यूनस आयर्स की एक अदालत ने जॉर्ज विडेला को 50 वर्ष और रेनॉल्डो बिगनॉन को 15 वर्ष की सज़ा सुनाई है.

वैसे ये दोनों अधिकारी 1976 से 1983 के बीच सैन्य शासन के दौरान किए गए दूसरे अपराधों के लिए पहले से ही जेल में हैं.

माना जाता है कि जब माता पिता को बंदी गृहों में रखा गया था, उस दौरान कोई 400 बच्चे चुराए गए थे.

कुल 11 लोगों पर इसके लिए आरोप लगाए गए हैं. इनमें से ज़्यादातर पूर्व सैन्य अधिकारी या पुलिस अधिकारी हैं.

विडेला और बिगनॉन सहित नौ लोगों को 34 बच्चे चुराने के लिए दोषी ठहराया गया है जबकि दो लोगों को दोषी नहीं पाया गया है.

विडेला को अधिकतम सज़ा सुनाई गई है क्योंकि उनके ख़िलाफ़ 20 बच्चों को चुराने का आपराधिक षडयंत्र साबित हुआ.

अदालत ने कहा कि वह 86 वर्षीय विडेला को '10 वर्ष के कम उम्र के बच्चों का षडयंत्रपूर्वक अपहरण करने, हिरासत में रखने और छिपाकर रखने' का दोषी ठहराती है.

जब ये फ़ैसला सुनाया गया तो विडेला के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे.

लंबी सज़ाएँ काट रहे हैं

विडेला और बिगनॉन दोनों पहले से ही जेल में हैं.

विडेला को 2010 में 31 विरोधियों को प्रताड़ित करके मारने के आरोप में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी.

इसी तरह बिगनॉन को अप्रैल 2011 में राजनीतिक विरोधियों को प्रताड़ित करके उन्हें मारने के आरोप में उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई गई थी.

पीड़ित पक्ष ने अदालत के फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि ये सैन्य शासन का सबसे घृणित अपराध था.

अपहरण का शिकार हुए बच्चों के रिश्तेदार और ख़ुद अपहरण का शिकार हुए दो लोगों ने सज़ा सुनाए के बाद ख़ुशी का इज़हार किया.

एक न्यूज़ एजेंसी से अपहरण का शिकार हुईं मैकारेना जेलमैन ने कहा, "इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों का चेहरा देखना ही साबित करता है कि न्याय मिल रहा है. ये ऐतिहासिक है."

मैकारेना जेलमैन के माता पिता का 1976 में सैन्य शासन ने अपहरण कर लिया था, इसके बाद उरुग्वे के एक पुलिस अधिकारी ने मैकारेना जेलमैन का लालन पालन किया.

कई बच्चे तो अपने परिवार से जा मिले लेकिन दूसरों के घर गोद दिए जाने के बाद बडे़ हुए कई बच्चों का कहना है कि वे अपना माता पिता के विषय में कुछ नहीं जानते.

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सैन्य शासन के दौरान 30 हज़ार से ज़्यादा लोग या तो मार दिए गए या फिर उन्हें ग़ायब हो जाने के लिए बाध्य किया गया.

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