क्या स्मार्टफोन बन गया है नया स्टेटस सिम्बल?

सैमसंग इमेज कॉपीरइट AP
Image caption पिछली तिमाही में सैमसंग को 79% के करीब मुनाफा हुआ है.

सात से आठ वर्ष पहले तक सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के लिए जाने जानी वाली सैमसंग ने इन दिनों दुनिया के मोबाईल बाज़ार में कोहराम मचा रखा है.

वजह है इस कोरियाई कंपनी के तेज़ी से बढ़ते मुनाफे और अब तब दुनिए की सबसे चहेती मोबाईल निर्माता कंपनी नोकिया को पायदान में लुढ़का देना.

जानकारों की मानें तो सैमसंग मोबाईल फोन आगे आने वाले दिनों में दुनिया में अपना वर्चस्व सा कायम करके ही दम लेंगे.

मोबाईल फोन बाज़ार के विशेषज्ञ राजीव मखनी बताते हैं, "हालांकि भारत में अभी भी नोकिया फोन ज्यादा बिकते हैं, लेकिन मुनाफों में नोकिया अब सैमसंग के आसपास भी नहीं है. यही हाल लगभग पूरी दुनिया में है. वजह है समाज के हर तबके के लिए एक स्मार्टफोन को उपलब्ध कराना. यही सैमसंग का मूल मंत्र रहा है."

ऊंची उड़ान

बात ज़्यादा पुरानी नहीं है. कुछ साल पहले तक सैमसंग को दुनिया की एक ऐसी इलेक्ट्रोनिक कंपनी के नाम से जाना जाता था जिसके उत्पाद वह लोग खरीद सकते थे जो सोनी, नोकिया, हिताची या तोशीबा नहीं खरीद पाते थे.

ज़ाहिर है, सैमसंग की चीज़े इन बड़ी कंपनियों से सस्ती थीं. एक तरह से सैमसंग हार्डवेयर के ही नाम से जानी जाने वाली कंपनी थी.

लेकिन पिछले कुछ सालों में सैमसंग कंपनी ने जैसे अपने को एक नया जामा पहना दिया है.

कैसे मुमकिन हुआ यह सब?

राजीव मखनी कहते हैं, "सैमसंग की मार्केटिंग सबसे बेहतरीन रही है. हर तबके के लिए एक ऐसा फोन ज़रूर है जो उस तबके के लोगों के लिए एक मोबाईल से ज्यादा एक विजिटिंग कार्ड बन चुका है. मतलब जब व्यक्ति अपनी जेब से मोबाईल निकाले तो उसका स्टेटस झलके. वह भी उस व्यक्ति के बजट के भीतर."

नोकिया का दौर

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि भारत में जब मोबाईल फोन का आगमन हुआ तो उसे एकाएक लोकप्रिय करने का श्रेय नोकिया कंपनी को ही जाता है.

नोकिया ही वह कंपनी है जिसने भारतीय बाज़ारों में 1,500 रूपये से लेकर 25,000 रूपये तक के फोन शहरों से लेकर गांवों तक प्रचलित कर दिए.

इस कंपनी के प्रति ग्राहकों की निष्ठां तो होनी ही थी.

लेकिन जब से भारतीय बाज़ारों में स्मार्टफोन आने शुरू हुए और वह भी सस्ते स्मार्टफोन, तब से सैमसंग ने जैसे नोकिया की नींद उड़ा कर रख दी.

लेकिन भारतीय बाजारों की बात हो तो सवाल यह भी उठते रहे हैं कि क्या नोकिया जैसी कंपनी को लंबे समय तक दूसरे स्थान पर धकेल पाने में कामयाब रहेगी सैमसंग?

राजीव मखनी कहते हैं कि आगे आने वाले दिनों में टक्कर कांटे की होगी.

इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption भारतीय बाज़ारों में सैमसंग के स्मार्टफोन 4,000 रूपये में उपलब्ध हैं.

उन्होंने कहा, "अभी नोकिया का दौर ख़त्म नहीं हुआ है. दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी मोबाईल कंपनी का श्रेय अपने आप में एक उपलब्धि है. हर कंपनी का एक ऐसा दौर आता है जब उसकी बाज़ार में परीक्षा होती है. नोकिया ब्रैंड अभी भी कम्फर्ट यानी आराम का ब्रैंड है. अगर नोकिया आने वाले एक-दो सालों में भारी गलती नहीं करती तो मेरे हिसाब से उसकी रिकवरी शुरू हो चुकी है." फिलहाल तो आंकड़े यही बताते हैं कि सैमसंग को शीर्ष पर बने रहने में सबसे अधिक टक्कर दो ही कंपनियों से मिल सकती है.

पहली नोकिया और दूसरी ऐपल, जिसका आई फोन अमरीका में सबसे ज़्यादा बिकने वाला फोन है.

लेकिन गौर करने वाली बात यह भी है कि आई फोन समाज के उन धनी व्यक्तियों को ही ध्यान में रखता है जो अपनी जेब थोड़ी ज़्यादा ढीली करने में तनिक भी नहीं हिचकते.

रही बात नोकिया या दूसरी मोबाईल कंपनियों की, तो उन्हें कम से कम स्मार्टफोन बाज़ार में तो सैमसंग के आस-पास फटकने में थोडा वक़्त लग सकता है.

संबंधित समाचार