सीरियाई जनरल ने देश छोड़ा

  • 6 जुलाई 2012
Image caption राष्ट्रपति असद के पीछे जनरल मनाफ़ त्लास

सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल असद का करीबी माने जानेवाले एक शक्तिशाली परिवार के एक सैनिक अफसर ने देश छोड़ दिया है.

बताया जा रहा है कि ब्रिगेडियर मनाफ त्लास सीरिया से भागकर फ्रांस जा रहे हैं जहाँ सीरिया के बारे में एक अंतरराष्ट्रीय बैठक हुई है जिसमें 100 से अधिक देशों ने हिस्सा लिया.

सीरियाई सैन्य अधिकारी – ब्रिगेडियर मनाफ़ त्लास के परिवार ने कहा है कि वे तुर्की के रास्ते सीरिया से भाग गए हैं. और फ़्रांस के विदेश मंत्री लॉरां फ़ेबियस ने भी बताया है कि सीरिया से बग़ावत करनेवाले एक सैन्य अधिकारी पेरिस पहुँच रहे हैं.

जेनरल त्लास के पिता सीरिया के रक्षा मंत्री रह चुके हैं और वे कई वर्षों तक राष्ट्रपति असद के नज़दीकी रहे थे. बताया जा रहा है कि वे अब पेरिस में रहते हैं.

मगर त्लास सुन्नी मुसलमान हैं जबकि राष्ट्रपति असद और उनके अधिकतर करीबी सहयोगी अलावी मुसलमान हैं.

बताया जा रहा है कि सीरिया में जारी प्रदर्शनों के हिंसक दमन को लेकर जेनरल त्लास की सीरियाई नेतृत्व सेनहीं बन रही थी.

अगर उनके सीरिया से भागने और फ्रांस पहुँचने की ख़बर सच साबित होती है तो सीरिया में 16 महीने पहले अशांति शुरू होने के बाद राष्ट्रपति असद का साथ छोड़नेवाले वे सबसे बड़े अधिकारी होंगे.

वे रिपब्लिकन गार्ड की एक टुकड़ी के बड़े अधिकारी हैं जो कि असद सरकार की सुरक्षा करनेवाली मुख्य सेना है और उसका नेतृत्व राष्ट्रपति भवन से चलता है.

ऐसे में समझा जाता है कि उन्हें इस बात की अच्छी समझ है कि सीरिया सरकार शीर्ष स्तर पर कैसे काम करती है और विद्रोह भड़कने के बाद से वहाँ कैसे निर्णय लिए जाते रहे हैं.

इससे पूर्व मार्च में भी जेनरल त्लास के पाला बदलने की ख़बर आई थी मगर वो ग़लत साबित हुई.

उनके पाला बदलने की घटना सीरिया सरकार के लिए नुकसानदेह और शर्मनाक हो सकती है क्योंकि इससे ये संकेत मिलेगा कि सीरिया में सत्ता के उच्च शिखरों पर दरारें बन गई हैं.

मगर सीरिया में सरकार समर्थक वेबसाइट ने कहा है कि है कि जेनरल त्लास भाग गए हैं और इससे कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.

बैठक

जेनरल त्लास के सीरिया छोड़ने की ख़बर ऐसे दिन आई जब पेरिस में फ़्रेंड्स ऑफ़ सीरिया सम्मेलन चल रहा था जिसमें भाग ले रहे 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि सीरिया में हिंसा रोकने के बारे में चर्चा कर रहे थे.

इस बैठक में रूस और चीन ने हिस्सा नहीं लिया.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने सम्मेलन में आए देशों से आह्वान किया है कि वो रूस और चीन से ये स्पष्ट कर दें कि उन्हें राष्ट्रपति असद का समर्थन करने की कीमत अदा करनी होगी.

उन्होंने कहा कि ये दोनों देश सीरिया में हिंसा रोकने के प्रयासों को बाधित कर रहे हैं जिसे अब सहन नहीं किया जा सकता.

उन्होंने कहा,"मैं आपसे आह्वान करती हूँ कि आप रूस और चीन के पास जाएँ, और ना केवल आग्रह बल्कि माँग करें कि वे सीरिया के लोगों की जायज़ आकांक्षाओं का समर्थन देना शुरू करें."

सम्मेलन के अंतिम बयान में एक बार फिर राष्ट्रपति असद से अपनी कुर्सी से हटने, उनकी सरकार के विरूद्ध और कड़े प्रतिबंध लगाने और उनके विरोधियों की सहायता और बढ़ाने का आह्वान किया गया.

पेरिस सम्मेलन से पहले ट्यूनिस और इस्तांबुल में ऐसे आयोजन हो चुके हैं जिनमें असद सरकार के विरूद्ध ठोस कार्रवाई की माँग की गई थी.

फ़िलहाल संयुक्त राष्ट्र के राजदूत एक ऐसे दस्तावेज़ के बारे में काम कर रहे हैं जिसमें संयुक्त राष्ट्र और अरब लीग के दूत कोफ़ी अन्नान की युद्धविराम योजना और सीरिया में राजनीतिक बदलाव के बारे में उनकी योजना को ना मानने की सूरत में सीरिया के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगाने की बात कही जाएगी.

कोफ़ी अन्नान ने पिछले सप्ताह जेनेवा में अंतरराष्ट्रीय नेताओं से मुलाक़ात के बाद इस योजना की घोषणा की थी जिसमें एक अंतरिम सरकार का भी उल्लेख है ताकि सीरियावासी स्वतंत्र और लोकतांत्रिक तरीके से रह सकें.

पश्चिमी देश चाहते हैं कि असद सीरिया के भविष्य में कोई भूमिका नहीं निभाएँ मगर इस योजना के प्रावधानों में ऐसी व्यवस्था है जिससे कि असद ऐसे किसी भी व्यक्ति की उम्मीदवारी पर वीटो लगा सकते हैं जिसे वो पसंद नहीं करते.

कार्यकर्ताओं के अनुसार सीरिया में एक साल से अधिक समय के वक्त में 15,800 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं.

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