अमरीका प्रत्यर्पण न करने की अबू हमजा की अपील

  • 10 जुलाई 2012
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Image caption अबू हमजा ने यूरोपियन कोर्ट से अमरीका प्रत्यर्पण न करने की अपील की है

अतिवादी इस्लामिक धार्मिक नेता अबू हमजा ने यूरोपीय कोर्ट से अमरीका को अपने प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील की है.

प्रत्यर्पण की समय सीमा समाप्त होने के ठीक एक दिन पहले की गई ये अपील इस मामले को और लटका सकती है.

इसका मतलब ये हुआ कि लंदन में रहने वाले 54 वर्षीय इस्लामिक धर्मगुरु अबू हमजा तब तक रिहा नहीं हो सकते जब तक कि एक समूह ये नहीं तय करता कि बड़ी अदालत को उनकी अपील पर विचार करना चाहिए.

अबू हमजा के ऊपर जो अभियोग लगाए गए हैं उनमें साल 1998 में यमन में कुछ लोगों को बंधक बनाना भी शामिल है.

प्रत्यर्पण के अन्य मामले

बीबीसी के गृह मामलों के संवाददाता डेनी शॉ का कहना है कि प्रत्यर्पण के चार और मामले ऐसे हैं जिन्हें चुनौती दी जानी है. इनमें संदिग्ध चरमपंथी बाबर अहमद का मामला भी शामिल है.

ऐसा समझा जा रहा है कि ये सभी मामले छह से आठ महीनों तक लंबित रखे जा सकते हैं.

37 वर्षीय बाबर अहमद पर अमरीका को संदेह है कि वो चरमपंथ का समर्थक है और उसके लिए धन इकट्ठा करता है.

बाबर अहमद अगस्त 2004 से ब्रिटेन में बिना किसी सुनवाई के बंद है.

अन्य मामलों में बाबर अहमद की सह-अभियुक्त सैयद तहला अहसान और लंदन में ओसामा बिन लादेन के दो कथित सहयोगी भी शामिल हैं.

यूरोपियन कोर्ट

गत अप्रैल महीने में यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स ने इन लोगों के ब्रिटेन से अमरीका में प्रत्यर्पण का समर्थन किया था.

स्ट्रासबर्ग कोर्ट ने कहा था कि इन अमरीकी जेल में एकांतवास या फिर आजीवन कारावास के तौर पर इन लोगों के मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए.

अदालत का ये फैसला 9/11 के बाद का सबसे महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा था.

सोमवार को अबू हमजा की अपील के बाद गृह विभाग ने कहा कि उसने अदालत के मूल फैसले का स्वागत किया था, लेकिन उसने ये भी स्वीकार किया कि ये अंतिम नहीं होना चाहिए.

एक प्रवक्ता के मुताबिक इन पांचों लोगों को अभी हिरासत में रहना होगा.

अमरीका ने अबू हमजा पर ओरेगॉन में एक प्रशिक्षण शिविर की स्थापना की योजना बनाने का भी आरोप लगाया है.

हमजा को पहली बार मई 2004 में अमरीका के आग्रह पर गिरफ्तार किया गया था.

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