अफ्रीका तक सिमट जाएगी गरीबी: रिपोर्ट

  • 10 जुलाई 2012
अफ्रीका में गरीबी इमेज कॉपीरइट PA
Image caption रिपोर्ट कहती है कि गरीबों की मदद के लिए 2025 के बाद मदद जुटाना खासा मुश्किल काम होगा.

एक ब्रितानी थिंक टैंक का कहना है कि 1990 के बाद से दुनिया में गरीबी आधी हो गई है और 2025 तक ये समस्या सिर्फ अफ्रीका और कुछ संकटग्रस्त देशों तक ही सीमित रह जाएगी.

ओवरसीज डिवेलपमेंट इंस्टीट्यूट (ओडीआई) का अनुमान है कि 2025 तक दुनिया भर में गरीबी रेखा से नीचे जीने वाले लोगों की संख्या घट कर 60 करोड़ हो जाएगी.

इनमें से ज्यादर लोग नाइजीरिया, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और अफगानिस्तान जैसे संकटग्रस्त देशों में रहेंगे. रिपोर्ट कहती है कि 1990 से इन देशों में गरीबी के आंकड़े लगभग स्थिर हैं.

ओडीआई की रिपोर्ट के अनुसार 2025 तक गरीबी एक एशियाई समस्या न होकर, सिर्फ अफ्रीकी समस्या हो जाएगी. उस वक्त दो तिहाई गरीब कम आमदनी वाले खासकर अफ्रीकी देशों में रहेंगे.

बढ़ेंगी गरीब देशों की मुश्किलें

'द होराइजन 2025' नाम की इस रिपोर्ट का आधार ये पूर्वानुमान है कि अगले दशक के मध्य तक वैश्विक व्यापार और व्यय का 50 प्रतिशत हिस्सा यूरोप और अमरीकी अर्थव्यवस्था से इतर दूसरे देशों अर्थव्यवस्थाओं के पास होगा और 78 प्रतिशत मध्यवर्गीय लोग उन देशों के होंगे जिन्हें अभी ‘विकासशील देश’ कहा जाता है.

रिपोर्ट के सह-लेखक एंड्रयू रोजरसन कहते हैं कि बदली हुई परिस्थतियां सहायता एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती होंगी.

उनके अनुसार, “ऐसी दुनिया में जहां गरीबों की संख्या काफी कम होगी, वहां उन्हें करदाताओं के पैसे से मदद मुहैया कराते रहना एक चुनौती होगी. ये विरोधाभास है कि जैसे जैसे गरीबी को खत्म करने का लक्ष्य करीब आता जाएगा, निर्धन देशों के लिए गरीबी से निपटना और उसके लिए रकम जुटाना मुश्किल होता जाएगा.”

रिपोर्ट कहती है कि जलवायु परिवर्तन और व्यापार तंत्र के जुड़े मुद्दों पर प्रगति जरूरी है, वरना इनकी वजह से बेघर होने वाले लोगों और उनकी समस्याओं पर अधिक से अधिक रकम खर्च करनी होगी जिसे जुटाना एक मुश्किल चुनौती है.

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