अराफात को 'जहर', विधवा जाएंगी अदालत

यासिर अराफात (फाइल)
Image caption यासिर अराफात की मौत पर सालों बाद भी विवाद जारी है.

पूर्व फलस्तीनी नेता यासिर अराफात की विधवा सुहा अराफात ने कहा है कि वो दिवंगत नेता की मौत की जांच की मांग को लेकर फ्रांस में मुकदमा दायर करेंगी.

हाल में प्रसारित हुई एक डोक्यूमेंट्री में ये दावा किया गया है कि यासिर अराफात की मौत जहर देने की वजह से हुई थी.

फलस्तीन के अधिकारियों ने सोमवार को इस मांग पर अपनी मुहर लगा दी है कि यासिर अराफात के शव को कब्र से निकाला जा सकता है. उन्होंने दिवंगत नेता की फ्रांस के एक सैनिक अस्पताल में हुई मौत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच की मांग भी की है.

सुहा अराफात के वकीलों के हवाले से कहा गया है कि फलस्तीनी नेता की विधवा चाहती हैं कि लाश को निकालकर उसकी गहन जांच-पड़ताल की जाए.

बीबीसी संवाददाता शायमा खलील के अनुसार वकीलों का कहना है कि सुहा को उम्मीद है जांच से अराफात के मौत की परिस्थतियों और कारणों को स्थापित किया जा सकेगा.

रेडियोधर्मी तत्व

पिछले हफ्ते टीवी चैनल अल जजीरा के एक प्रोग्राम में कहा गया था कि फलस्तीनी नेता और पूर्व राष्ट्रपति यासिर अराफात को काफी अधिक मात्रा में रेडियोधर्मी पदार्थ दिए गए जिससे उनकी मौत हो गई.

ये जांच स्विट्जरलैंड की एक संस्था में किया गया था.

अल जजीरा टीवी चैनल ने अराफात पर बनी फिल्म में दिखाया था कि अराफात के कपड़ों और दांत साफ करने वाले ब्रश पर पर पोलिनियम-210 की मात्रा बहुत ज्यादा पाई गई थी.

पोलोनियम-210 वह पदार्थ से जिसके चलते पेशाब, खून और पसीने के प्रवाह में परिवर्तन आ जाता है.

स्विटजरलैंड के एक वैज्ञानिक शोध संस्थान ने अराफात के सामानों की जांच करने के बाद दावा किया है कि उनके खाने में पोलोनियम-210 की मात्रा जरूरत से ज्यादा थी.

अराफात के निधन के समय भी कुछ फलस्तीनियों का मानना था कि अराफात की मौत स्वभाविक नहीं थी बल्कि उन्हें इसराइल ने जहर देकर मार दिया था.

पेरिस में निधन

यासिर अराफात की बीमारी के बाद वर्ष 2004 में फ्रांस के आर्मी अस्पताल पेरिस में निधन हो गया था.

हालांकि सुहा अराफात ने उस वक्त पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया था. लेकिन अभी चल रहे अराफात के मौत पर विवाद के बाद सुहा अराफात के वकीलों ने कहा है कि अराफात की विधवा चाहती हैं कि अगर उनके मौत की जांच होती है तो सच सामने आ सकता है.

दूसरी तरफ फिलीस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने उनकी जांच के लिए हरी झंडी दे दी है.

स्विटरलैंड के इंस्टीट्यूट ऑफ रेडिएशन फिजिक्स के डायरेक्टर डॉक्टर फ्रैंकोस बौचड ने अल जजीरा को कहा था, “मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि हमारी टीम को अराफात के शरीर में अतिरिक्त पोलोनियम-210 की मात्रा की मिली है. जिससे उनके शरीर के जैविक प्रवाह प्रभावित हुए थे.”

जिस समय अराफात की मौत हुई थी उस समय फ्रांस के अस्पताल में उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों ने उनके बारे में कोई भी सूचना देने से इंकार कर दिया था क्योंकि वे वहां से नियमों से बंधे थे.

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