जल्दी चलेगा अल्ज़ाइमर्स का पता

  • 13 जुलाई 2012
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Image caption नई खोज के अनुसार शोधकर्ताओं को अल्जाइमर बीमारी की शुरुआती लक्षणों के बारे में सालों पहले पता चल सकता है.

वैज्ञानिकों ने पता लगा लिया है कि अल्जाइमर्स की बीमारी इंसानी शरीर में कैसे अदृश्य रूप में विकसित होती है. इसका मतलब है कि अल्जाइमर्स के लक्षण पहली बार दिखने से बरसों पहले ही उसके बारे में पता लगाया जा सकता है और बेहतर तरीके से उसका इलाज हो सकता है.

'वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसन' की एक टीम ने ऐसे परिवारों पर शोध किया जिनमें अनुवांशिक रूप से अल्जाइमर्स का जोखिम पाया जाता है.

'न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन' में इन वैज्ञानिकों ने लिखा है कि इस बीमारी के संभावित आक्रमण से 25 साल पहले उसके संकेत मिलने शुरू हो जाते हैं.

ब्रितानी विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआत में ही अल्जाइमर्स के बारे में पता लगने से उसके सफल इलाज की संभावना बहुत बढ़ सकती हैं.

अहम शोध

इस अध्ययन में ब्रिटेन, अमरीका और ऑस्ट्रेलिया के ऐसे 128 लोगों को शामिल किया गया जिनमें अनुवांशिक रूप से उन तीन में से किसी एक उत्परिवर्तन को ग्रहण करने की 50 प्रतिशत तक संभावना थी जिससे अल्जाइमर्स हो सकता है.

शरीर में इस तरह के बदलाव 30 से 50 साल की उम्र के बीच होते हैं जबकि आम तौर पर 60 साल की उम्र पार करने के बाद लोग अल्जाइमर्स से पीड़ित होते हैं.

वैज्ञानिकों ने इस बात को भी परखा कि शोध में हिस्सा लेने वाले लोगों के माता पिताओं को किस उम्र में ये बीमारी होने लगी थी और उसके कितने साल बाद उनमें इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई दिए थे.

ये शोध बताता है कि अल्जाइमर्स के सिलसिले में सबसे पहला बदलाव रीढ़ के द्रव के स्तर में कमी के तौर पर देखने को मिलता है. इसके बारे में अल्जाइमर्स के स्पष्ट लक्षण दिखने से 25 वर्ष पहले ही पता लगाया जा सकता है.

इसके अलावा बीमारी के स्पष्ट लक्षण दिखने से 10 वर्ष पहले तक शुगर ग्लूकोज को इस्तेमाल करने के मस्तिष्क के तरीके में बदलाव आने शुरू हो जाते हैं और यादाश्त से जुड़ी छोटी मोटी समस्याएं भी शुरू होने लगती हैं.

अल्जाइमर्स सोसायटी में शोध निदेशक प्रोफेसर क्लाइव बालार्ड का कहना है कि ये महत्वपूर्ण शोध मस्तिष्क में होने वाले उन मुख्य बदलावों के बारे में बताता है जो अनुवांशिक रूप से अल्जाइमर्स का शिकार होने वाले लोगों में दिखते हैं, वो भी स्पष्ट तौर पर बीमारी के पता चलने के दशकों पहले ही.

उनके मुताबिक इससे इस बीमारी का जल्द पता लगाने और उसके बेहतर इलाज में मदद करेगी.

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