खतना पर लामबंद हुए मुसलमान और यहूदी

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Image caption अदालत का कहना है कि खतना बच्चे को कष्टकारी नुकसान पहुंचाने के बराबर है.

जर्मनी में एक अदालती फैसले ने मुसलमानों और यहूदियों को एक साथ ला खड़ा किया है. वो एकजुट होकर खतना के खिलाफ इस अदालती फैसले का विरोध कर रहे हैं.

कोलोन शहर की जिला अदालत ने बुधवार को सुनाए गए एक फैसले में कहा कि धार्मिक आधार पर शिशुओं का खतना करना उनके शरीर को कष्टकारी नुकसान पहुंचाने के बराबर है.

जर्मनी में मुस्लिम और ईसाई समुदाय इस फैसले का कड़ा विरोध कर रहे हैं और वे इस बारे में कानूनविदों से मशविरा कर रहे हैं.

कई यूरोपीय मुस्लिम और यहूदी संगठनों ने साझा बयान जारी कर कहा है कि खतना उनकी धार्मिक श्रद्धाओं का आधार है और इसे कानूनी रूप से संरक्षण दिया जाना चाहिए.

इसराइल की संसद ने भी इस फैसले का विरोध किया है. हालांकि कोलोन की अदालत का ये फैसला पूरे जर्मनी पर लागू नहीं होता है.

सांसदों से हस्तक्षेप की गुहार

समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार यहूदी और मुस्लिम नेताओं ने जर्मन सांसदों से भी इस फैसले का विरोध करने को कहा है.

दोनों समुदायों की साझा अपील में कहा गया है, “खतना एक प्राचीन अनुष्ठान है जो हमारी व्यक्तिगत श्रद्धाओं का आधार है और हम इस बारे में अदालत के फैसले का कड़े से कड़े शब्दों में विरोध करते हैं. हम अपने अधिकार की रक्षा और पारस्परिक परंपरा को बनाए रखने के लिए संघर्ष करेंगे और हम जर्मन सांसदों और सभी पार्टियों से इस फैसले को पलटवाने के लिए तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग करते हैं.”

इस साझा अपील पर यूरोपीय रब्बी केंद्र, यूरोपीय यहूदी संसद, यूरोपीय यहूदी संघ, जर्मनी के तुर्क-इस्लामी धार्मिक संघ और ब्रसेल्स इस्लामिक केंद्र के अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए हैं.

तुर्की इस्लामी संघ की तरफ से जारी बयान के मुताबिक उन्होंने इस बारे में जर्मनी के अलावा फिनलैंड, बेल्जियम, इटली और पोलैंड के सांसदों से मुलाकात की है.

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