खतना धार्मिक स्वतंत्रता के बचाव का मुद्दा: मर्केल के प्रवक्ता

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Image caption जर्मनी में हर साल हजारों मुसलमान और यहूदी लड़कों का खतना किया जाता है

जर्मनी की सरकार का कहना है कि यहूदी और मुसलमान समुदायों को खतना प्रथा को जारी रखने की इजाजत होनी चाहिए.

जर्मनी में छोटे लड़कों का खतना करने पर प्रतिबंध लगाने वाले अदालती फैसले का यहूदी और मुस्लिम समुदाय कड़ा विरोध कर रहे हैं.

चांसलर एंगेला मर्केल के प्रवक्ता का कहना है कि ये धार्मिक स्वतंत्रता के बचाव का मामला है.

प्रवक्ता स्टीफन सीबर्ट का कहना है, ''जिम्मेदार तरीके से खतना किया जाना सजा के बिना भी संभव होना चाहिए.''

यूरोप के यहूदी और मुस्लिम समूहों ने कोलोन की अदालत के खतना के खिलाफ फैसले की भर्त्सना की है.

खतना: एक धार्मिक संस्कार

अदालत ने ये फैसला उस मामले में सुनाया था जिसमें एक डॉक्टर ने चार साल के लड़के का खतना इस तरह किया था कि उसे अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत आ गई थी.

जर्मन चांसलर के प्रवक्ता का कहना है, ''सरकार में सभी चाहते हैं कि यहूदी और मुसलमान जर्मनी में अपना धार्मिक जीवन जी सकें.''

वे कहते हैं कि सरकार कानूनी तौर पर इस मामले को फौरन देखेगी.

प्रवक्ता का कहना है, ''धार्मिक स्वतंत्रता एक वैधानिक सिद्धांत है.''

खतना कराने का अधिकार किसे?

वहीं जर्मनी की मेडिकल एसोसिएशन ने डॉक्टरों से कहा है कि वे अदालत के आदेश के मद्देनजर किसी का खतना नहीं करें.

बर्लिन स्थित बीबीसी संवाददाता स्टीफन इवान्स का कहना है कि जर्मनी में खतने के मुद्दे पर लोगों की राय मिलीजुली है.

हालांकि एक जनमत सर्वेक्षण में ये दिखाया गया है कि ज्यादातर लोग खतना पर रोक के पक्ष में हैं.

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