सीरियाई सेना की गोलाबारी में 200 की मौत

सीरिया (फाइल)
Image caption सीरिया में साल भर के दौरान लगभग 16,000 लोगों की मौतों का दावा किया जा रहा है.

सीरिया में विपक्षी कार्यकर्ताओं का दावा है कि केंद्रीय प्रांत हमा में सरकार समर्थक सुरक्षा बलों ने जनसंहार को अंजाम दिया है जिसमें कम से कम 200 लोगों की मौत हो गई है.

विपक्ष ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से कहा है कि त्रेमसेह गांव पर होलिकॉप्टरों और तोपों से बमवर्षा की गई.

उनका कहना था कि सरकार समर्थित मिलिशिया 'शाबीहा लड़ाकुओं' ने गांव में दाखिल होकर अंधाधुंध गोलीबारी की और लोगों को गला रेतकर मारा.

हालांकि सरकारी मीडिया का कहना है कि जनसंहार "आतंकवादी गुटों" का कारनामा है, जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक के पहले तनाव पैदा करने के इरादे से की गई है.

सबसे बड़ी वारदात

अगर त्रेमसेह की घटना की पुष्टि हो जाती है तो ये पिछले लगभग साल भर के दौरान सीरिया में होने वाला सबसे बड़ी वारदात होगी.

सीरिया में विदेशी मीडिया को रिपोर्ट करने की आजादी नहीं है इसलिए वहां से खबरों की स्वतंत्र पुष्टि अधिकांश मामलों में संभव नहीं हो पाती है.

मार्च 2011 से राष्ट्रपति बशर अल-असद की सरकार के खिलाफ शुरू हुए विद्रोह में तकरीबन 16,000 लोगों की मौत हो चुकी है.

खबरों के मुताबिक त्रेमसेह पर विद्रोहियों का कब्जा हो गया था और सुरक्षा बल इसे वापस लेने की कोशिश कर रहे थे.

हमा में मौजूद विद्रोही नेताओं की काउंसिल ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स का कहना है कि गांव में मारे गए लोगों में से ज्यादातर आम शहरी थे.

दमिश्क, इदलीब और हमा से भी विद्रोहियों के खिलाफ हमलों की खबरें हैं.

गुरूवार को इराक में सीरिया के राजदूत नवाफ फारेस ने बशर से अलग होने की घोषणा की. इससे पहले असद की सेना के एक जनरल भी उनसे अलग हो चुके हैं.

फारेस ने खुले आम विद्रोहियो को समर्थन देने की बात कही है.

आर्थिक प्रतिबंध

पश्चिमी देशों ने सीरिया से हाल में ही कहा है कि वो आम लोगों के खिलाफ खूनी कार्रवाई बंद करे वरन उसपर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए जाएंगे.

ये मुल्क चंद ही दिनों में सीरिया पर्यवेक्षक दल के कार्यकाल की अवधि बढ़ाने के मामले पर भी चर्चा करने वाले हैं.

हालांकि रूस और चीन पहले की तरह अभी भी सीरिया के मामले को शांति से सुलझाने के पक्षधर हैं.

सीरिया में संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत कोफी अन्नान ने भी कुछ ही दिनों पहले कहा है कि मुल्क में शांति स्थापित किए जाने के लिए होने वाली किसी भी बातचीत में ईरान को शामिल किया जाना चाहिए.

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