चीन के ट्विटर ने बदली जिंदगियाँ

  • 17 जुलाई 2012
सिना बेइपो इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption सीना वेइपो को इस्तेमाल करने वालों की संख्या 30 करोड़ के आसपास है

सिना वेइपो ट्विटर का चीनी संस्करण है. और विश्व के सबसे प्रचलित सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों में से एक है. इससे जु़ड़ी कहानियाँ चीन के समाज की एक झलक पेश करती हैं.

चीन के समाज पर इंटरनेट का असर सबसे ज्यादा दिखता है. इंटरनेट के माध्यम से चीन में लोग अपने उन विचारों को व्यक्त कर रहे हैं जो पहले वो नहीं कर सकते थे.

सीना वेइपो को इस्तेमाल करने वालों की संख्या 30 करोड़ के आसपास है और ये ट्विटर को गहरी चुनौती दे रहा है.

आइए ऐसे कुछ लोगों से मिलते हैं जिनकी जिंदगी पर वेइपो का असर पड़ा है.

कुत्तों को बचाने वाले चांग शियाओछियो

Image caption चांग ने पिछले साल भर कई दर्जनों कुत्तों को वेइपो की मदद से बचाया

बींजिंग के रहने वाले चांग शियाओछियो व्यापारी हैं और हमेशा से ही जानवरों की रक्षा में अपना योगदान देते रहे हैं.

इंटरनेट से उन्हें पता चला कि बीजिंग से बाहर जाते एक ट्रक में कुत्तों को छोटे-छोटे पिंजरों में भर कर ले जाया जा रहा है. इसका मतलब साफ था कि उन्हें चीन के उत्तर-पूर्व के भोजनालयों में ले जाया जा रहा था जहाँ कुत्तों को खाया जाता है.

वेइपो पर इन तस्वीरों ने लाखों लोगों का ध्यान खींचा और जल्द ही करीब 100 लोगों ने अपील की कि ट्रक का रास्ता रोक लिया जाए. इन लोगों में चांग भी थे.

वो अपनी पत्नी के साथ स्थानीय पुलिस और सरकारी दफ्तर गए और कोशिश की कि ट्रक ड्राइवर से कुत्तों को खरीद लिया जाए.

आखिरकार करीब 55,000 रुपयों में ड्राइवर उन कुत्तों को चीन में पशु अधिकारों की रक्षा करने वाली एक संस्था चाइना स्माल एनिमल्स प्रोटेक्शन एसोसिएशन के दफ्तर में छोड़ने को राजी हो गया.

चांग बताते हैं कि पिछले साल भर में कई दर्जनों कुत्तों को वेइपो की मदद से बचाया गया है.

आर्थिक मदद

Image caption चोउ यान की तस्वीरें वेइपो के माध्यम से लाखों लोगों तक पहुँची हैं

बीजिंग के एक कॉस्मेटिक सर्जरी अस्पताल में 17 वर्षीय चोउ यान बिस्तर पर लेटी हुई हैं. उनके चेहरे, हाथों और टाँगों में कई जगह चोटें लगी हैं.

सितंबर की शाम को उनके ही एक साथी ने उन पर हमला बोल दिया था क्योंकि उन्होंने उसके प्यार के इजहार को कबूल नहीं किया था.

उसने चोउ पर इंधन फेंक कर आग लगा दी जिससे वो कई जगह जल गईं. शुरुआत में चोउ का परिवार चुप रहा क्योंकि हमला करने वाले लड़के के परिवार ने अस्पताल का खर्चा उठाने की बात मान ली, लेकिन जब बाद में वो अपने वायदे से मुकर गए तो चोउ के परिवार ने इंटरनेट पर मदद मांगी.

चोउ यान की तस्वीरें वेइपो के माध्यम से लाखों लोगों तक पहुँची और उन्हें आर्थिक मदद मिली. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण रहा एवरकेयर कॉस्मेटिक सर्जरी अस्पताल की ओर से मुफ्त मदद का वायदा.

चोउ यान की मांग ली कुंग कहती हैं, “अगर इंटरनेट से हमें मदद नहीं मिली होती तो मैं अपनी बेटी को बीजिंग के तियानमन चौराहे पर ले जाकर मदद मांगने की सोच रही थी.”

साफ हवा

Image caption फंग युंगफंग कहते हैं इंटरनेट से लोगों की जिंदगी में कई बदलाव आए हैं

चीन में पर्यावरण समस्याओं को लेकर चिंताएँ बढ़ी हैं और वेइपो की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका रही है.

अक्टूबर 2011 में बीजिंग में बढ़ते वायु प्रदूषण पर वेइपो पर एक जबरदस्त सार्वजनिक बहस शुरू हो गई, खासकर जब रियल इस्टेट उद्योगपति फान शिर्ई ने बीजिंग स्थित अमरीकी दूतावास के आंकड़ों को वेइपो पर प्रकाशित करना शुरू किया.

इससे पहले चीन के अधिकारियों ने इस जानकारी को रोकने का प्रयास किया था. आखिरकार चीन की सरकार इन आंकड़ों को प्रकाशित करने पर राजी हो गई.

इस बहस में हिस्सा लेने वाले पत्रकार और पर्यावरण कार्यकर्ता फंग युंगफंग कहते हैं इंटरनेट से लोगों की जिंदगी में कई बदलाव आए हैं और जितने ज्यादा लोग इन मुद्दों पर बहस करें, वो उतने शक्तिशाली होते हैं.

चीन की बदलती संस्कृति

Image caption इंटरनेट की मदद से 21 वर्षीय गैस के चित्रों की पहुँच चीन और हांगकांग तक हुई

चेंगदू प्रांत की एक पुरानी फैक्ट्री में 21 वर्षीय गैस मेहनत से काम कर रहे हैं लेकिन वो कहीं से भी पारंपरिक चीनी कर्मचारी नहीं नजर आते हैं.

उन्होंने बैगी जींस, बेसबॉल जैकेट पहन रखी है. अधिकारियों ने कई बार दीवार पर उनके द्वारा बनाए गए चित्रों को मिटा दिया है लेकिन स्प्रे पेंट से चित्रकारी करने वाले गैस पर इसका बहुत प्रभाव नहीं पड़ता है.

गैस के मुताबिक चीन में ऐसे चित्रों के चाहने वालों की संख्या कुछ हज़ार ही है और अधिकारी ऐसे चित्रों को दीवार से मिटा देते हैं लेकिन अब गैस अपने चित्रों को लाखों लोगों तक पहुँचाने के लिए वेइपो का सहारा लेते हैं.

उनके चित्रों की पहुँच चीन और हांगकांग तक है.

वो कहते हैं कि इसके लिए उन्हें कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ती बल्कि इंटरनेट के माध्यम से ये चित्र लोगों तक पहुँच रहे हैं.

(डंकन ह्यूविट न्यूजवीक पत्रिका के लिए लिखते हैं और शंघाई में रहते हैं. वो बीबीसी वर्ल्ड सर्विस पर 'इट स्टार्टेड विद ए ट्वीट' प्रस्तुत करते हैं.)

संबंधित समाचार