जीभ कट गई पर पता तक नही चला..

स्टीव पीट और उनके भाई के बचपन की तस्वीर
Image caption बचपन में स्टीव एक बार अपनी जीभ ही चबा गए लेकिन उन्हें कोई दर्द महसूस नहीं हुआ

सोच कर देखें कि आपकी जिंदगी कैसी होगी अगर आपको दर्द महसूस ही ना हो, या फिर आपके बच्चे को ऐसी अजीबोगरीब बीमारी हो.

अमरीका के वाशिंगटन राज्य के रहने वाले स्टीव पीट और उनके भाई को बचपन से ही ऐसी ही असाधारण बीमारी थी जिसका नाम है कंजेनिटल एनेल्जेसिया.

इस बीमारी में व्यक्ति को दर्द का एहसास ही नहीं होता. स्टीव जब पाँच या छह महीने के थे, तभी से उनके माँ-बाप को ऐसा लग गया था कि उनमें कुछ गड़बड़ है.

बचपन में स्टीव एक बार अपनी जीभ ही चबा गए लेकिन उन्हें कोई दर्द महसूस नहीं हुआ. उन्हें डॉक्टर के पास ले जाया गया जहाँ उन पर कई परीक्षण किए गए.

उनके पाँव के नीचे सिगरेट लाइटर रखी गई. इंतज़ार किया गया कि उन्हें दर्द महसूस हो. यहाँ तक कि उनके पाँवों में फफोले पड़ गए लेकिन उन्हें दर्द महसूस नहीं हुआ. उन्हें सूईयाँ चुभोई गईं लेकिन उसका भी कुछ असर नहीं हुआ. तब जाकर डॉक्टरों ने बीमारी की पुष्टि की.

बीमारियों और कई चोटों के कारण स्टीव नियमित रूप से स्कूल भी नहीं जा पाए.

स्केटिंग करते हुए एक बार उनका पाँव टूट गया लेकिन उन्हें इसका पता ही नहीं चला. आसपास खड़े लोगों ने इशारे से उन्हें बताया कि उनकी हड्डी टूटी हुई है और उनके कपड़े खून से लथपथ हैं. तब कहीं जाकर उन्हें चोट का पता चला. इसके बाद सालों उन्हें स्केटिंग से दूर रखा गया.

जब स्टीव पाँच या छह साल के थे तो बच्चों की सुरक्षा करने वाले अधिकारी उन्हें घर से ले गए. किसी ने उनसे शिकायत कर दी थी कि उनके माँ-बाप उनके साथ बुरा व्यवहार करते हैं.

सुरक्षा गृह में एक बार उनका पाँव टूट गया और उन्हें दर्द महसूस नहीं हुआ. तब जाकर अधिकारियों को यकीन आया कि उनके माता-पिता और डॉक्टर सही कह रहे थे कि उन्हें दर्द महसूस नहीं होता.

पढ़ाई के दौरान साथी बच्चे उनसे उनकी हालत के बारे में कई तरह के सवाल पूछते थे.

उनका कई बार अपने स्कूल साथियों के साथ झगड़ा हो जाता था. जब भी स्कूल में कोई नया बच्चा आता था तो उनके साथी किसी न किसी बात पर उस नए बच्चे से स्टीव का झगड़ा करवा देते थे.

सावधानियाँ

लेकिन अब स्टीव बहुत सावधानी से रहते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि अगर उन्हें चोट लगेगी तो उन्हें उसका पता नहीं लगेगा कि चोट कितनी भयानक है, खासकर आंतरिक चोटें.

Image caption अस्पताल में मुस्कुराते हुए स्टीव जब उनकी उम्र मात्र पाँच साल की थी

उन्हें खासकर एपेंडेसाइटिस से काफी डर लगता है. जब भी उन्हें पेट को लेकर कोई शिकायत होती है या फिर बुखार आता है तो वो तुरंत अस्पताल का रुख करते हैं.

आखिरी बार जब उनकी हड्डी टूटी थी तो उनकी पत्नी ने उन्हें इस बारे में बताया था. उनका पाँव फूला हुआ था और वो काला और नीला पड़ चुका था. जब डॉक्टरों ने एक्सरे किया तब पता चला कि उनके पाँव की दो उंगलियाँ टूट गई हैं.

लेकिन उन्हें अगले दिन दफ्तर जाना था. उन्होंने चोट पर टेप लगाया, जूते पहने और अगली सुबह दफ्तर चले गए.

स्टीव के बाएँ पाँव में इतनी चोटें लग चुकी हैं कि उन्हें लगता है कि जल्द ही उन्हें अपना पाँव त्यागना पड़ेगा. डॉक्टरों ने स्टीव से उस वक्त तक इंतजार करने को कहा है जब उनका पाँव किसी लायक ना रह जाए. उसके बाद उसे काटना होगा.

स्टीव कहते हैं, “मैं इस बारे में सोचना नहीं चाहता हूँ. मैं कोशिश करता हूँ कि इसका मुझ पर कोई प्रभाव नहीं पड़े. लेकिन मैं ये सोचने पर मजबूर हो जाता हूँ क्योंकि ये बीमारी ही शायद कई कारणों में से एक थी जिसकी वजह से मेरे भाई ने अपनी जान ले ली”

स्टीव की पीठ की स्थिति भी खराब हो रही है. डॉक्टरों ने उनसे यहाँ तक कह दिया है कि वो वक्त ज्यादा दूर नहीं है जब उन्हें व्हीलचेयर में बैठना होगा.

कोई दर्द नहीं

स्वीडन के लेखक स्टीग लार्सन की किताब ‘द गर्ल हू प्लेड विद फायर’ में रोनाल्ड नीडरमैन का एक किरदार है जिसे भी यही बीमारी है.

नीडरमैन को भी दर्द महसूस नहीं होता चाहे उन पर कितने ही वार क्यों ना हों. कहानी में उनसे मुकाबला कर रहे पाओलो रॉबर्टो कहते हैं कि रोनाल्ड पर कोई असर ही नहीं होता.

रिपोर्टों की माने तो नई फिल्म ‘बैटमैन राइजेज’ में विलेन बेन का किरदार भी कुछ इसी तरह का है.

स्टीव बताते हैं कि उन्हें जानने वाले लोगों को लगता कि वो पूरी तरह स्वस्थ हैं लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा भी नहीं है कि उनके शरीर में कितनी समस्याएँ हैं.

स्टीव को आर्थराइटिस की शिकायत है. इस बीमारी में बहुत दर्द होता है लेकिन स्टीव को दर्द महसूस ही नहीं होता, हालाँकि स्टीव को चलने फिरने में बहुत परेशानी होती है.

जहाँ तक डॉक्टरों का सवाल है, वो स्टीव की हालत और तकलीफ को समझते हैं. लेकिन स्टीव के मुताबिक शायद उन्हें इस बात की समझ नहीं है कि उस व्यक्ति का मानसिक हालत कैसी होगी जिसे कोई दर्द ही महसूस नहीं होता हो.

(स्टीव पीट ने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के कार्यक्रम आउटलुक से बात की थी. ये कहानी उसी बातचीत पर आधारित है.)

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