क्यूबा के विद्रोही नेता की 'दुर्घटना में मौत’

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Image caption ओसवाल्दो पाया की छवि छोटे दलों के प्रवक्ता की थी

क्यूबा के महत्वपूर्ण विद्रोही नेता ओसवाल्दो पाया की एक कार दुर्घटना में मौत हो गई है. यह जानकारी उनके सहयोगी विद्रोही नेता ने दी है.

विद्रोही नेता ओसवाल्दो पाया के सहयोगियों का कहना है कि जब वो ग्रामा प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र बयामो शहर के बगल से गुजर रहे थे, वही कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई.

ओसवाल्दो पाया वरेला परियोजना के संस्थापक थे. वरेला प्रोजेक्ट के तहत क्यूबा में नागरिक स्वतंत्रता कानून बनाए जाने के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा था.

दुर्घटना के विवरण नहीं

क्यूबा में उनकी छवि छोटे राजनीतिक दलों के प्रवक्ता के रूप में मानी जाती थी. बयामों के कैथोलिक चर्च के अधिकारियों ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि वहां के स्थानीय अस्पताल ने उन्हें ओलवाल्दो पाया के निधन के बारे में सूचना दी है और उनका पहचान पत्र भी दिखाया है.

उनकी मौत की सूचना योयनी सेंचेज ने ट्विटर पर दी है जो खुद विद्रोही समर्थित प्रमुख ब्लॉगर हैं. उन्होंने अपने ट्विटर पर ओसवाल्दो पाया के बारे में लिखा है कि अब वे ‘अनिंद्य’ हो गए हैं और उनके निधन से क्यूबा को अपूर्णीय क्षति पहुंची है.

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Image caption पाया को क्यूबा की सरकार अमरीकी एजेंट मानती थी

हालांकि दुर्घटना किस परिस्थिति में हुई है इसके बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं है. बीबीसी संवाददाता सारा रेन्फोर्ड ने सरकार समर्थित ब्लॉगर को उद्धृत करते हुए कहा है कि पाया की गाड़ी एक पेड़ से टकरा गई थी.

जबकि सरकारी मीडिया के वेवसाईट पर कहा गया है कि वह बहुत ही ‘दुखद सड़क दुर्घटना’ थी जिसमें दो क्यूबा के नागरिक मारे गए हैं जबकि एक स्विस और एक स्पैनिश नागरिक जख्मी हो गए.

साखरोव पुरस्कार

ओसवाल्दो पाया की मौत की खबर एक दूसरे महत्वपूर्ण विद्रोही नेता लॉरा पोलन के पिछले साल अक्टूबर में हुई मौत के बाद आई है.

लॉरा पोलन ‘लेडीज इन ह्वाइट’ के संस्थापक थे.

ओसवाल्दो पाया को वर्ष 2002 में यूपोपियन यूनियन की तरफ से साखरोव पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. उन्हें वर्ष 1998 में शुरू किए गए वरेला परियोजना के लिए यह पुरस्कार दिया गया था.

मई 2002 में उन्होंने क्यूबा के नेशनल असेम्बली में दस हजार से अधिक लोगों का हस्ताक्षर सौंपा था, जिसमें क्यूबा में चल रहे चार दशक से एक ही पार्टी की सत्ता को खत्म करने की मांग की गई थी.

उसके बाद से ही वो लगातार सरकार के सामने तरह-तरह के मानवाधिकार की बात उठाते रहे थे. जबकि क्यूबा सरकार का कहना था कि वह अमरीकी एजेंट है जो वहां हुए क्रांति को नकार रहा है.

इसाई धर्म में विश्वास रखने वाले ओलवाल्दो पाया क्यूबा में राजनीतिक सुधार, नागरिक स्वतंत्रता और राजनीतिक बंदी की रिहाई के लिए लगातार मुहिम चला रहे थे.

वर्ष 1952 में जन्मे पाया युवावस्था से ही कम्यूनिस्ट शासन के खिलाफ थे और इसी आरोप में उन्हें 1969 में सजा के तौर पर बंदी शिविर में भेज दिया गया था.

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