हज के सरकारी कोटे में कटौती

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Image caption अब विवेकाधीन कोटे से सिर्फ साढ़े तीन सौ लोग हज पर जा सकेगें

सुप्रीम कोर्ट ने हज यात्रियों के लिए सरकार के विवेकाधीन कोटे को 5 हजार 50 से घटाकर 300 कर दिया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार न्यायधीश आफताब आलम और रंजना प्रकाश देसाई ने विवेकाधीन कोटे को घटा दिया है और राष्ट्रपति के लिए 100, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के लिए 75-75 और विदेश मंत्री के लिए लिए 50 सीट निर्धारित कर दी है.

दो सदस्यीय बेंच ने हज कमिटी ऑफ इंडिया (एचसीआई) के लिए 200 सीटें छोड़ दी हैं.

कोर्ट को बताया गया था कि वर्ष 2012 में हज पर जाने के लिए सरकारी कोटा 11 हजार की थी.

हज के लिए महत्वपूर्ण लोगों और एचसीआई के सीट में कटौती करने के बाद सुप्रीम कोर्ट बचे हुए सीटों को विभिन्न राज्यों के हज कमिटियों को दे दिया है.

साथ ही सु्प्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के उच्च न्यायालयों को निर्देश दिया है कि वे हज से जुड़े ऐसे मामले की सुनवाई न करें.

सुप्रीम कोर्ट के बेंच ने अपने निर्देश में यह भी कहा है कि अगर इस तरह के मामले किसी भी हाई कोर्ट के सामने आता है तो उसे वो एपेक्स कोर्ट के पास स्थानतरित कर दें.

मई से सुनवाई

आठ मई को यह मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आया था. इसके बाद कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि वो विवेकाधीन कोटे का कैसे इस्तेमाल करती है, इसका पूरा विवरण कोर्ट को सौंपे.

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था, “हमें महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों द्वारा हज के लिए अनुशंसा किए जाने पर आपत्ति है.”

एपेक्स कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि आनेवाले दस वर्षों में हज यात्रा पर दिए जाने वाले सब्सिडी को खत्म करे. कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि हज पर दिए जाने वाले सब्सिडी को मुसलमानों के शिक्षा और विकास पर खर्च किया जाना चाहिए.

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