ईरान में मुर्गों के कारण तनाव !

  • 27 जुलाई 2012
ईरान

ईरान में सरकार अरब क्रांति के दौरान तो देश में शांति कायम रखने में कामयाब रही लेकिन आजकल मुर्गों की कमी से देश में पैदा हुए तनाव ने नेताओं की नींद उड़ा दी है.

ईरान में इन दिनों एक चुटकुला खूब सुनाई दे रहा है.

"अगर आपके घर में पुलिस अचानक आ धमके तो यह मत समझना कि वो आपकी प्रतिबंधित सैटेलाईट डिश के पीछे हैं, दरअसल उन्हें आपके फ्रिज में रखे मुर्गे की ख़बर मिल गई है."

पिछले कुछ दिनों से मुर्गे की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि इस समय बहस का सबसे ग़र्म विषय है. मामला इतना संगीन है कि एक शहर निशापुर में तो लोग मुर्गे की कीमतों में बढ़ोत्तरी के कारण सड़कों पर उतर आए.

ईरान के शासकों के लिए यह इसलिए चिंता की बात थी कि यह शहर साल 2009 में उस समय भी शांत था जब पूरे देश में राष्ट्रपति चुनावों में कथित धांधली के खिलाफ़ प्रदर्शनों की बाढ़ आई हुई थी.

मुर्गे की अहमियत

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Image caption इंटरनेट सरकार का मजाक उड़ाते कार्टूनों से भरा पड़ा है.

मुर्गी ईरान में सर्वाधिक प्रचलित खाने की चीज़ों में से एक है. यह ईरान के सबसे प्रसिद्द व्यंजनों में से एक ज़रेश्क पोलो मुर्ग की जान है.

इसके अलावा मुर्ग इसलिए भी अधिक लोकप्रिय है क्योंकि यह भेड़, बकरी या गाय के मांस से सस्ता होता है.

मुर्गे के गोश्त का ऐसे समय में महँगा होना जब कि देश की अर्थव्यवस्था पहले से ही अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दबाव में है, आम लोगों के लिए अत्यधिक पीड़ादाई है.

पिछले चंद दिनों में मुर्गे की कीमत पांच डॉलर प्रति किलो या 278 रुपए प्रति किलो तक पहुँच गई है.

अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध

ईरानी बाज़ारों में मुर्गे की भारी कमी का कारण यह भी है कि आम व्यापारी विदेश से मुर्गियाँ या कच्चा गोश्त आयात नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि दुनिया भर का कोई बैंक ईरानी पैसे को आगे बढ़ाना नहीं चाहता.

इसके अलावा देश में मुर्गियों का उत्पादन इसलिए भी प्रभावित हुआ है क्योंकि मुर्गीपालक बाहर से मुर्गियों का दाना नहीं आयात कर पा रहे.

शीराज़ के आम नागरिक ने बीबीसी के फारसी रेडियो को बताया - "पिछली बार जब प्रदर्शन हुए थे तो मैंने उनमे भाग नहीं लिया था क्योंकि उनके कारण केवल राजनीतिक थे, लेकिन अब बात खाने की है. अगर मैं अपने परिवार को नहीं पाल पा रहा हूँ तो मैं सड़क पर उतरूंगा ही."

बीबीसी फ़ारसी रेडियो की एक महिला श्रोता ने बताया “मैंने सुना है कि वो सरकारी अधिकारियों को सस्ता मुर्गा दे रहे हैं. लेकिन मैं तो एक निजी कंपनी में काम करती हूँ और मैं तो पूरी कीमत चुका ही नहीं सकती." और इतना कह कर वो रोने लगीं.

सरकार चिंतित

ऐसा नहीं है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही. अभी हाल ही में सांसदों को विशेष तौर पर बताया गया कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध देश की अर्थव्यवस्था के अलग-अलग हिस्सों को किस तरह से प्रभावित कर रहे हैं.

ख़बरों के अनुसार वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और रिवोल्यूशनरी गार्ड के सदस्यों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही बढ़ती कीमतों पर कुछ किया ना गया तो हालात बेकाबू हो सकते हैं.

जून में देश की राजधानी तेहरान के पुलिस प्रमुख अहमदी मोहगद्दम ने टीवी चैनलों को सलाह दी थी कि वो टीवी पर लोगों को मुर्गे खाता हुआ ना दिखाएँ.

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इसी हफ़्ते एक प्रमुख शिया धार्मिक नेता ने लोगों को बताया था किस तरह से शाकाहारी खाना सेहत के लिए अच्छा है. सरकारी टीवी चैनल पर लोगों को अच्छे शाकाहारी व्यंजन बनाने सिखाए जा रहे हैं.

कोशिशें बेअसर

लेकिन सरकारी प्रयास लोगों के बीच में मजाक का विषय बन गए हैं और इंटरनेट सरकार का मजाक उड़ाते कार्टूनों से भरा पड़ा है.

किसी कार्टून में मुर्गी के पिछवाड़े एक कैमरा लगा हुआ बताया गया है और कैप्शन में लिखा है कि चोरों पर निगाह बनी हुई है.

एक दूसरे कार्टून में मुर्गी को आसमान में हवाई जहाज़ों से भी ऊपर उड़ते हुए दिखाया गया है. ईरानी अर्थशास्त्री उम्मीद करते हैं कि देश की सरकार जल्द ही कीमतों को काबू में लाने के लिए कदम उठायेगी.

एक सूत्र ने बताया कि सरकार वेनेज़ुएला से मुर्गों का कच्चा गोश्त आयात करने की कोशिश कर रही हैं लेकिन वहां भी भुगतान की समस्या उठ खड़ी हुई है.

ईरान की सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह सीमित विदेशी मुद्रा भण्डार का इस्तेमाल किस तरह करे.

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