प्राकृतिक चैंपियनों के सामने आपके ओलंपियन कहाँ?

  • 27 जुलाई 2012
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Image caption प्रकृति में कई जानवर हर दिन जीवित रहने की प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर इंसानों को बार-बार मात देते हैं

शनिवार को लंदन में ओलंपिक-2012 की शुरुआत के साथ ही हज़ारों की संख्या में दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आए एथलीट और खिलाड़ी अपने सर्वेश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए जी-जान लगा देंगे.

इस प्रतियोगिता में जो जीतेगा उसे ईनाम के तौर पर या तो पदक मिलेगा या मुमकिन है कि उसके नाम एक नया विश्व-रिकॉर्ड ही दर्ज हो जाए.

क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे आसपास प्रकृति में भी ऐसे जीव-जंतु मौजूद हैं जो हर दिन जीवित रहने की प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हैं.

सोचिए अगर इन जीवों और इंसानों को एक दूसरे के साथ मुकाबला करने के लिए मैदान में साथ-साथ खड़ा कर दें तो जीत किसकी होगी ?

आईए कुछ ऐसे ही खिलाड़ियों और जीवों की तुलना करें.

गति के शहंशाह

ओलंपिक खेलों में 100 मीटर की स्प्रिंट दौड़ को सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिता माना जाता है. इस वर्ग का खिताब इस समय उसैन बोल्ट के नाम है.

उसैन ने ये दूरी 9.58 सेकेंड में पूरा करके एक नया विश्वरिकॉर्ड बनाया था. लेकिन अगर उसैन को एक चीते के सामने खड़ा कर दिया जाए तो शायद चीता उन्हें बगल का रास्ता दिखा दे.

अब चीता तो ठहरा चीता, हम एक खरगोश को भी कम करके आंकने की गलती नहीं कर सकते हैं क्योंकि ये दूरी वो सिर्फ पांच सेकेंड में पूरा कर लेगा.

हो सकता है कि आपको इंसानों की तुलना चीता और खरगोश से करना नागवार गुज़रा हो तो चलिए अब हम हमारे पूर्वज कहे जाने वाले 'पटा बंदरों' से इनकी तुलना करें.

यहां भी उसैन को रजत पदक से संतुष्ट रहना पड़ेगा क्योंकि 'पटा बंदर' 100 मीटर की दूरी उसैन से तीन सेकेंड पहले पूरा कर लेंगे.

लेकिन कुछ प्रतियोगिताएं ऐसी है जहां इंसानों के जीतने के मौके ज्यादा हैं जैसे लंबी दूरी की दौड़.

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Image caption पटा बंदर' 100 मीटर की दूरी में मौजूदा विजेता उसैन बोल्ट को तीन सेकेंड से मात दे सकते हैं.

हमारे शरीर में सीधा खड़े रहने और पसीना छोड़ने की क्षमता होती है. इससे हम लंबी दूरी की दौड़ में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद होती है, जिस कारण हम तकरीबन दो घंटे में एक मैराथन दौड़ पूरा कर लेते हैं.

उत्तरी अमरीका में पाया जाने वाला चिंकारा 65 किमी प्रति घंटे के रफ्तार से दौड़ता है, जिसके अनुसार वो एक घंटे में एक मैराथन दौड़ पूरा कर सकता है लेकिन हो सकता है कि चिंकारा पूरी दौड़ के दौरान अपनी गति को एक समान ना रख पाए.

इसलिए इंसान इन जानवरों को अगर किसी प्रतियोगिता में चुनौती दे सकते हैं तो वो लंबी दूरी का दौड़ है.

हालांकि इसमें भी शतुरमुर्ग हमसे काफी आगे हैं क्योंकि वे चार मीटर तक लंबे डग भर सकते हैं और उनके पैर काफी हल्के और लचीले होते हैं.

उंची उड़ान

जहां तक बात लंबी छलांग की आती है तो यहां भी कंगारू, मेंढक और टिड्डा की शारीरिक क्षमताएं हमसे कहीं ज्यादा हैं.

हालांकि कई एथलीट 2.25 मीटर उंची और 9 मीटर लंबी दूरी की प्रतियोगिता को एक छलांग में पार कर सकते हैं.

लेकिन टिड्डा आसानी से इस उंचाई पार कर सकता है क्योंकि छलांग लगाने के दौरान उसके पैरों की ताकत काफी बढ़ जाती है जो उसे स्प्रिंग की तरह लचीला बना देते हैं.

ये उंचाई एक डबल-डेकर बस के बराबर है जिसका रिकॉर्ड एंड्रेय सिल्नोव के नाम है.

जंपिंग स्पाईडर नाम के जीव अपने शरीर में मौजूद द्रवीय दबाव की मदद से अपने पैरों को पिस्टन की तरह कारगर कर लेते हैं जिससे वे अपने ही शरीर के 30 गुणा अधिक ऊंचाई तक छलांग लगा सकते हैं.

छोटे आकार का होना, अक्सर जीव-जंतुओं के लिए फायदेमंद होता है. क्योंकि एक मिलीमीटर लंबी और एक बिंदू के आकार की स्प्रिंगटेल को 15 सेंटीमीटर तक अपने शरीर को हवा में उछाल सकती है जो किसी एथलीट के एफिल टॉवर पर छलांग लगाने जैसा है.

यहां जीत स्प्रिंगटेल की होनी तय है.

इन कीड़ों में एक खास तरह की क्षमता होती है जिसमें वो अपने शरीर को 200 गुणा ज्यादा, और 33 सेंटीमीटर तक बढ़ा सकते हैं और इसका राज उनके द्वारा अपने पिछले पैरों को मल्टी-ज्वाईन्ट लीवर के तौर पर इस्तेमाल करना है.

लॉन्ग शॉट

बीजिंग ओलंपिक्स के दौरान नार्वे के एंड्रियास थोर्किल्सडन ने 90 मीटर तक भाला फेंकने का नया विश्व-रिकार्ड बनाया था.

चिंपाज़ी को बर्छी या भाला फेंकते तो नहीं देखा गया लेकिन सेनेगल में उन्हें लकड़ियों के भाले का इस्तेमाल करते हुए देखा गया है, और बोला प्रजाति की मकड़ी को पतंगे का शिकार करने के दौरान सिल्क जैसा चिपचिपा पदार्थ फेंकते हुए देखा गया है.

Image caption खिलाड़ियों के लिए अच्छा है कि उन्हें इन जीव-जंतुओं का मैदान में सामना नहीं करना होगा.

लेकिन जीवों में लॉन्ग शॉट का खिताब 'हैट थ्रोअर फंगस' को जाता है जो सिर्फ पांच सेंटीमीटर उंचा होने के बावजूद 2 मीटर तक निशाना साध सकता है.

खैर, लंदन ओलंपिक्स में भाग लेने वाले खिलाड़ियों के लिए अच्छा है कि उन्हें इन जीव-जंतुओं का मैदान में सामना नहीं करना होगा.

ऐसा होने पर मुमकिन है कि विश्व-रिकॉर्ड बनाने वाले इन खिलाड़ियों को कोई बंदर, स्प्रिंगटेल या फिर एक छोटे से कुकुरमुत्ते से मात खानी पड़ सकती.

हमारी प्राकृतिक दुनिया में ऐसे अनगिनत जीव-जंतु हैं जो ज़िंदा रहने के लिए हर दिन नए रिकॉर्ड बनाते हैं.

आज से शुरु होने वाले लंदन ओलंपिक खेलों में सैंकड़ों देशों से आए हज़ारों खिलाड़ी और एथलीट खुद को एक-दूसरे से ज्य़ादा 'तेज़, बेहतर और शक्तिशाली' साबित करने की कोशिश करेंगे...ताकि स्वर्ण पदक उनकी झोली में हो.

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