शिफ्ट में काम यानी दिल के दौरे को न्योता

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Image caption जो लोग शिफ्ट में काम करते हैं उनके सोने और जागने की दिनचर्या में काफी असमानता होती है.

एक शोध के अनुसार अस्पताल, मीडिया संस्थान, सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री या एयरपोर्ट जैसी जगहों शिफ्ट में काम करने वाले लोगों को हार्ट अटैक यानि दिल का दौरा पड़ने की संभावना दिन के सामान्य समय पर काम करने वालों से ज्यादा है.

'ब्रिटिश मेडिकल जर्नल' में छपे एक शोध के मुताबिक बंटे हुए घंटों यानि 'शिफ्ट' में काम करने से हमारी बॉडी-क्लॉक (शारीरिक घड़ी) बिगड़ जाती है, जिसका हमारे शरीर पर विपरीत असर पड़ता है.

ये निष्कर्ष कनाडा और नार्वे के शोधकर्ताओं द्वारा 20 लाख से ज्यादा कर्मचारियों पर किए गए शोध पर आधारित है.

बीएमजी स्टडी की गणना के अनुसार शिफ्ट में काम करने वाले लोगों में हार्टअटैक की 23 प्रतिशत, कोरोनरी तकलीफ की 24 प्रतिशत और दौरा पड़ने की 5 प्रतिशत आशंका बढ़ जाती है.

शोध के दौरान कर्मचारियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति, उनका खान-पान और उनके सामान्य स्वास्थ्य पर भी नज़र रखी गई.

इससे पहले भी शिफ्ट में काम करने वालों को उच्च रक्तचाप और मधुमेह का खतरा बताया जा चुका है.

आराम की कमी

लंदन स्थित वेस्टर्न यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर डैन हैकम के अनुसार, जो लोग शिफ्ट में काम करते हैं उनके खाने और सोने की आदतें खराब हो जाती हैं.

हैकम के अनुसार, ''ऐसे लोग पूरी रात जगते हैं, और उनके आराम करने का समय निर्धारित नहीं होता. उनका नर्वस सिस्टम हर वक्त सक्रिय रहता है जिससे मोटापे और कोलेस्ट्रॉल की समस्या पैदा हो जाती है.''

शोधकर्ताओं के मुताबिक स्वास्थ्य समस्यायों की पहचान करने के लिए विशेष स्क्रिनिंग कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए और इन लोगों को इस बारे में जानकारी भी देनी चाहिए.

'इंस्टीट्यूशन ऑफ ऑक्यूपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ' में 'रिसर्च एंड इनफर्मेशन' मैनेजर जेन व्हाईट के अनुसार शिफ्ट में काम करने के साथ कई जटिल समस्याएं जुड़ी हैं.

शोध के अनुसार शिफ्ट में काम करने से हमें भूख ना लगने और अपच होने के अलावा, दवाईयों और शक्तिवर्धक गोलियों पर हमारी निर्भरता बढ़ती जाती है. जिससे ना सिर्फ हमारा काम प्रभावित होता है, बल्कि हम बार-बार गलतियां करते हैं और दुर्घटनाओं के शिकार हो सकते हैं.

कैसे बचें?

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Image caption शिफ्ट में काम करने वाले लोगों की शारीरिक घड़ी बिगड़ जाती है.

नार्वे और कनाडा के विशेषज्ञों ने 34 शोधपत्रों का विश्लेषण करने के बाद ये निष्कर्ष निकाला है कि रात की शिफ्ट की संख्या निर्धारित करके इन लोगों की मदद की जा सकती है.

शोध में कहा गया है कि, ''कुछ छोटी सावधानियों को अपना कर हम नाइट-शिफ्ट करने वालों का ध्यान रख सकते हैं. इनमें 12 घंटे से ज्यादा की नाइट शिफ्ट ना करने और नाइट एवं डे-शिफ्ट के बीच कम से कम दो दिनों की छुट्टी देना एक कारगर उपाय है.''

ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन में हृदयरोग विभाग के सदस्य ऐलन मैसन के अनुसार शिफ्ट में काम करने वालों को खतरा बहुत गंभीर नहीं है, लेकिन ये चिंताजनक है कि ब्रिटेन के ज्यादातर लोग सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे की सामान्य नौकरी नहीं करते हैं.

विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे में सबसे बेहतर उपाय ये है कि हम अच्छा खाना खाएं, क्रियाशील रहें और ध्रूमपान न करें, इससे हमारा दिल लंबे समय तक धड़क सकता है.

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