ये देश है या कैदखाना?

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अगर आप एक प्रतिभाशाली कामगार हैं या एक बुद्धिवान छात्र हैं जो आगे की पढ़ाई के लिए या नौकरी के लिए विदेश जाना चाहते हों, तो आप अपने देश के प्रवासन कार्यालय से इजाज़त लेकर विधिवत जा सकते हैं.

लेकिन फर्ज़ कीजिए कि आपके देश की सरकार जबरन आपको जाने की इजाज़त न दे और वो भी इसलिए क्योंकि आप बेहद प्रतिभाशाली हैं?

यही कानून है क्यूबा में जहां दशकों से क्यूबा की सरकार ने अपने नागरिकों पर कड़े प्रतिबंध लगाए रखे हैं, खासतौर पर विदेश यात्रा और उसकी अवधि को लेकर.

वहाँ आमतौर पर सरकार-विरोधी लोगों को अकसर देश से बाहर जाने की इजाज़त नहीं दी जाती. और ऐसे लोगों को भी जो प्रतिभावान हैं, चाहे वो प्रतिभाशाली डॉक्टर ही क्यों न हों.

क्यूबा विदेशी यात्रा से जुड़ी व्यवस्था महंगी भी है और धीमी भी. साथ में सब कुछ बहुत अस्पष्ट है.

लेकिन अब क्यूबा के लोग इस स्थिति में बदलाव लाना चाहते हैं.

राष्ट्रपति रॉल कास्त्रो ने हालांकि एक साल पहले प्रवासन कानून में कुछ बदलाव लाने की बात कही थी, लेकिन अब तक कुछ नहीं बदला है.

नाउम्मीद लोग

हवाना के इमिग्रेशन ऑफिस के बाहर एक लंबी कतार का नज़ारा हर रोज़ देखने को मिलता है.

यहां एक बोर्ड लगा है जिसमें यात्रा से जुड़े सभी नियम लिखे हैं – विदेश जाने के लिए ज़रूरी कागज़ात, ऑफिस से इजाज़त, स्नातक की डिग्री, किसी मंत्री के हस्ताक्षर और 150 डॉलर की भारी भरकम फ़ीस.

ऑफिस के भीतर से बाहर आते हुए येनियर प्राडो के चेहरे पर खुशी है.

उनका कहना है कि उन्होंने चार महीने तक यात्रा अनुमति के लिए इंतज़ार किया और अब 'व्हाइट कार्ड' उनके हाथों में है.

उनका परिवार अमरीका जा कर बस गया है और अब उन्हें भी अमरीकी वीज़ा मिल चुका है ताकि वे अपने परिवार के साथ जा कर रह सकें. क्यूबा के प्रशासन को उन्हें इजाज़त देनी ही पड़ी.

प्राडो ने कहा, “लोगों का कहना है कि हमारे देश में बदलाव आ रहा है. मुझे लगता है कि एक हमारा ही देश है जहां यात्रा के लिए अनुमति लेना एक बड़ा सरदर्द है. आखिर इतने सख्त कानून की ज़रूरत ही क्या है?”

दरअसल पिछले साल क्यूबा की कम्युनिस्ट पार्टी की बैठक में कुछ अहम फैसले लिए गए, जिसके बाद लोगों में नई उम्मीद जगी.

पार्टी की बैठक में निजी व्यापार, घरों को बेचने और यात्रा के अधिकार में ढील बरतने का फैसला लिया गया.

लेकिन बाद में राष्ट्रपति रॉल कास्त्रो ने चेतावनी दे डाली कि प्रवासन का मुद्दा पेचीदा है और इसमें ढील देने में समय लगेगा.

देशद्रोही?

क्यूबा की सरकार का कहना है कि वो ऐसा इसलिए कर रही है ताकि प्रतिभा-पलायन के मामलों को कम से कम रखा जा सके.

उनका आरोप है कि अमरीका उनके प्रतिभाशाली कर्मचारियों को अपनी ओर खींचना चाहता है.

लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि असली प्रतिभा-पलायन तो इसलिए हो रहा है क्योंकि अगर कोई क्यूबा का नागरिक 11 महीने से ज़्यादा देश से बाहर बिताता है तो उसके निवास अधिकार वापस ले लिए जाते हैं.

एक मैगज़ीन के संपादक रॉफेल हरनान्डेज़ का कहना है, “दुखद बात ये है कि जो युवक क्यूबा से बाहर जा रहे हैं उन्हें सख्त कानूनों की वजह से वापस आना मुश्किल लगता है. और इसलिए हमें अपने प्रतिभाशाली लोगों को खोना पड़ता है.”

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Image caption क्यूबा के लोग चाहते हैं कि विदेश जाने के बाद उनके पास लौटने का विकल्प भी खुला रहे

पेशे से कलाकार नडाल का कहना है कि जो लोग देश छोड़ कर जाते हैं उन्हें क्यूबा में देशद्रोही के नाम से पुकारा जाता है.

नडाल अपनी कला प्रदर्शनी के ज़रिए क्यूबा के लोगों के प्रवासन के मुद्दे को छेड़ना चाहते हैं.

वे जानते हैं कि ऐसा कर वे एक ख़तरा मोल ले रहे हैं.

उनका कहना है, “जब हमने ये प्रॉजेक्ट शुरु किया तो मेरे कुछ मित्रों ने कहा कि तुम जेल भेज दिए जाओगे. ऐसा मत करो. प्रवासन को लेकर अब भी लोगों में डर है. लेकिन मुझे लगता है कि बदलाव की इच्छा अब बढ़ रही है.”

बहरहाल, इमिग्रेशन ऑफिस के बाहर अडाने नाम की एक महिला का कहना है कि ये अच्छा संकेत है कि सरकार कम से कम प्रवासन से जुड़े कानून के बारे में बात तो कर रही है.

इस बीच लोगों की कतार धीमी गति से सरक रही है.

क्यूबा के लोगों को इंतज़ार है आज़ादी की उड़ान भरने का.

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