अमरीका में धोखाधड़ी, बौखलाए भारतीय छात्र

  • 5 अगस्त 2012

अमरीका के कैलिफ़ोर्निया राज्य में एक विश्वविद्यालय पर अमरीकी आप्रवासन विभाग ने छापा मारकर विश्वविद्यालय के प्रमुख अधिकारी को गिरफ़्तार कर लिया है. इससे वहां पढ़ाई कर रहे सैकड़ों भारतीय छात्रों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

सनीवेल इलाके में स्थित 'हरगुएन विश्वविद्यालय' के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेरी वॉंग पर विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले विदेशी छात्रों के वीज़ा मामले में कथित तौर पर धोखाधड़ी करने का आरोप है.

अमरीकी आप्रवासन विभाग का कहना है कि वॉंग ने विदेशी छात्रों से इस विश्वविद्यालय में प्रवेश देने के लिए जाली दस्तावेज़ जमा करवाए थे. अब उन के खिलाफ़ आरोप सिद्ध होने पर उन्हे 85 साल तक की कैद हो सकती है.

'पढ़ाई ठप'

इस बीच विश्वविद्यालय के अध्यक्ष ने एक बयान जारी कर कहा है कि हरगुएन विश्वविद्यालय अब भी खुला है और छात्रों की पढ़ाई जारी है.

हरगुएन विश्वविद्यालय की वेबसाईट पर कहा गया है, "विश्वविद्यालय खुला है और सामान्य तौर पर पढ़ाई जारी है. सरकार द्वारा एक अधिकारी के खिलाफ़ आप्रवासन मामलों में आरोप लगाए गए हैं और उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया है. इस मामले का विश्वविद्यालय पर कोई असर नहीं पड़ा है. जो छात्र अमरीका में सही कागज़ात के साथ रह रहे हैं उनके लिए कोई मुश्किल नहीं है."

विश्वविद्यालय का कहना है कि अब नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त कर दिया गया है.

हरगुएन विश्वविद्यालय में कुल 450 छात्र पढ़ रहे हैं जिनमें से अधिकतर भारतीय मूल के छात्र हैं जिनमें से बहुत से छात्रों का संबंध आंध्र प्रदेश राज्य से है.

अमरीकी आप्रवासन विभाग ने बयान जारी कर कहा है कि हरगुएन विश्वविद्यालय पर लगे धोखाधड़ी के आरोपों के बाद, विदेशी छात्रों को प्रवेश देने का इसका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है.

लाइसेंस रद्द?

अमरीकी आप्रवासन विभाग के बयान में कहा गया, "जो विदेशी छात्र इस विश्वविद्यालय में प्रवेश लिए हुए हैं वह उस समय तक कानूनी तौर पर पढ़ाई जारी रख सकते हैं जब तक इस विश्वविद्यालय के पास विदेशी छात्रों को प्रवेश देने का लाइसेंस मौजूद है और छात्र आप्रवासन कानून का पालन कर रहे हैं."

अमरीकी आप्रवासन विभाग ने हरगुएन विश्वविद्यालय को लाइसेंस रद्द किए जाने संबंधी कार्रवाई में नोटिस जारी कर दिया है और 30 दिनों के भीतर उसको जवाब देना है.

हरगुएन विश्वविद्यालय में भारत से आने वाले छात्र एमबीए और कंप्यूटर साईंस में एमएससी की डिग्री के लिए अधिक प्रवेश लेते हैं.

अब इस विश्वविद्यालय में धोखाधड़ी के मामले सामने आने के बाद यह छात्र भी परेशान हो रहे हैं. क्यूंकि अगर इस विश्वविद्यालय का लाइसेंस रद्द हो जाता है तो विदेशी छात्रों को अमरीका में पढ़ाई का वीज़ा वैध रखने के लिए या तो जल्द ही किसी दूसरे कॉलेज में प्रवेश लेना होगा नहीं तो भारत वापस जाना होगा.

लेकिन किसी और कॉलेज में इतनी जल्दी प्रवेश लेना भी इतना आसान नहीं है.

अमरीका स्थित कई तेलुगू संस्थाएं इस मामले में छात्रों की मदद के लिए आगे आ रही हैं.

खासी महंगी है पढ़ाई

एक ऐसी ही संस्था है उत्तरी अमरीकी तेलुगू एसोसिएशन, जिसके पास कई छात्रों के घरवालों के भारत से फ़ोन आ रहे हैं.

इस संस्था के ज्वाएंट सेक्रेटरी मोहन कृषणा कहते हैं,"यह बहुत बड़ी समस्या है. छात्रों का क्या होगा कुछ पता नहीं है. हमारे पास भारत से कई छात्रों के माता-पिता के फोन आ रहे हैं और वह मदद चाहते हैं. हमारी संस्था इस मामले में इन छात्रों की हर तरह से मदद करने को तैयार है चाहे वह इमिग्रेशन का मामला हो, या अन्य किसी कॉलेज में प्रवेश लेना हो या किसी प्रकार की वित्तीय मदद चाहिए तो हम इस मामले में छात्रों से संबंध बना रहे हैं."

किसी भी आम भारतीय छात्र के लिए इस विश्वविद्यालय में प्रवेश लेकर पढ़ाई करना भी खासा महंगा होता है.

किसी डिग्री कोर्स के लिए इस विश्वविद्यालय में करीब 14 हज़ार अमरीकी डॉलर या लगभग 8 लाख रूपए सालाना का खर्च सिर्फ़ इस विश्वविद्यालय की फ़ीस का होता है. इसके अलावा खाना, रहना, किताबें आदि का खर्च अलग.

लाखों रूपए खर्च करके जो छात्र भारत से यहां पढ़ने आते हैं वह हरगुएन विश्वविद्यालय में छात्रों के प्रवेश औऱ अन्य मामलों से संबंधित धोखाधड़ी के आरोपों के बाद अनिश्चित्ता के शिकार हैं.

धोखाधड़ी के कई मामले

उत्तरी अमरीकी तेलुगू एसोसिएशन के मुरली कृष्ण कहते हैं, "यह बहुत दुख की बात है कि इन छात्रों को इनके माता पिता इतना धन खर्च करके पढ़ने के लिए भेजते हैं और यहां वह किसी फ़्रॉड विश्वविद्यालय के चक्कर में फंस जाते हैं. अमरीकी सरकार को चाहिए कि विश्वविद्यालयों में विदेशी छात्रों को प्रवेश देने संबंधित सारे दस्तावेज़ों की पहले से ही सख्ती से जांच कर ले जिससे छात्रों को इतनी मुश्किल न उठानी पड़े."

लेकिन अमरीका में यह पहला मामला नहीं है जिसमें किसी विश्वविद्यालय पर धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं. इससे पहले पिछले दो साल में दो अन्य मामलों में भी भारतीय छात्रों के लिए मुश्किल हुई थी.

कैलिफ़ोर्निया की ट्राईवैली विश्वविद्यालय और नार्दर्न वर्जीनिया विश्वविद्यालय में भी धोखाधड़ी के मामले सामने आने के बाद भारतीय छात्रों को मुश्किल उठानी पड़ी थी.

ट्राईवैली विश्वविद्यालय के मामले में तो भारत सकार को भी हस्तक्षेप करना पड़ा था.

इस नए मामले में भी अमरीका में भारतीय दूतावास छात्रों की मदद कर रहा है.

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