ओलंपिक टिकट की उम्मीद में बैनर के साथ

Image caption खेलों के टिकट के लिए लोगों से अपील करते ओम प्रकाश मूंदड़ा.

लंदन ओलंपिक के दौरान भारत के हर मैच में आपको एक व्यक्ति भारतीय झंडे के रंग की शर्ट पहने दिख जाएगा. नारे लगाता, पोस्टर लहराता, भारतीय खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाता और कभी-कभी उन्हें आड़े हाथों लेता भी.

ये व्यक्ति हैं- नागपुर के रहने वाले व्यवसायी ओम प्रकाश मूंदड़ा. पिछले दिनों लंदन के वेम्बली एरीना के बाहर टिकट मांगने के लिए पोस्टर लिए ये सज्जन मुझसे टकरा गए.

फिर उनसे बात शुरू हुई, तो पता लगा कि खेल के ये दीवाने शख्स न जाने कितनी प्रतियोगिताओं में भारतीयों का उत्साह बढ़ाने के लिए देश-विदेश गए हैं. अपने पैसे से. कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उन्होंने स्वयंसेवक की भूमिका निभाई है.

ओम प्रकाश बताते हैं, "मैं यहाँ बैनर लेकर इसलिए खड़ा हूँ क्योंकि मेरे पास भारत के मैच के टिकट नहीं हैं. कई लोग मुझे मुफ्त में टिकट दे देते हैं. मैं भारतीय खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाने के लिए मैच में जाना चाहता हूँ. लेकिन कई मैच के टिकट नहीं मिल पाते, इसलिए बैनर लेकर रेलवे स्टेशन के बाहर खड़ा रहता हूँ, ताकि कोई न कोई टिकट दे दे."

वे बताते हैं कि वे छठी बार किसी ओलंपिक में आए हैं. चार ओलंपिक में उन्होंने स्वयंसेवक की भूमिका भी निभाई है. ओम प्रकाश ने लंदन ओलंपिक में भी स्वयंसेवक के लिए आवेदन किया था, लेकिन वो मंजूर नहीं हुआ.

लेकिन चयन हो या न हो, ओम प्रकाश तो ओलंपिक को लेकर इतने उत्साहित हैं कि उनके लिए बाकी चीजें मायने ही नहीं रखतीं. वे अपना पैसा खर्च करके ओलंपिक में आते हैं. टिकट के लिए वे साल भर से भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन के पीछे पड़े थे. कभी उन्हें सफलता मिलती है तो कभी नहीं. लेकिन उनका हौसला कम नहीं होता.

ओम प्रकाश बताते हैं, "मुझे हर ओलंपिक में जाने का शौक रहता है. इसके अलावा मैं तीन फीफा विश्व कप में भी गया हूँ. मैंने दक्षिण अफ्रीका में भी स्वयंसेवक की भूमिका निभाई थी. इसके अलावा वैंकूवर और टोरंटो के विंटर ओलंपिक में भी मैं गया हूँ. राष्ट्रमंडल खेल में मैंने स्वयंसेवक की भूमिका निभाई थी. कतर के एशियन गेम्स में भी मैं गया था. कई क्रिकेट वर्ल्ड कप देखा हूँ."

उनका दावा है कि अपने पैसे लगाकर इतने मैच देखने वाला भारत में शायद ही कोई व्यक्ति होगा.

ओम प्रकाश का कहना है कि उन्हें बैडमिंटन, टेनिस और फुटबॉल का बहुत शौक है. इसलिए उन्होंने इन प्रतियोगिताओं के फाइनल के टिकट पहले से ले रखे हैं. लेकिन कभी-कभी भारत के कई मैचों के टिकट उनके पास नहीं होते हैं.

इसलिए वे बैनर लेकर इस तरह टिकट मांगने की कोशिश करते हैं.

ओम प्रकाश मूंदड़ा खिलाड़ियों का उत्साह तो बढ़ाते ही हैं, लेकिन कभी-कभी अपनी नाराजगी भी जाहिर करते हैं.

हॉकी मैच के दौरान भारत के हारने पर उन्होंने अपने स्टैंड से चिल्ला-चिल्ला कर खिलाड़ियों को नसीहत भी दी.

ओम प्रकाश मूंदड़ा की उम्र 50 के पार है, लेकिन उनका उत्साह देखते ही बनता है. शायद ऐसे ही खेल प्रेमियों की बदौलत खेल की दुनिया में रंगीनी बरकरार है.