'वायग्रा' पाने के चक्कर में दूषित होता हिमालय

  • 8 अगस्त 2012
नेपाल का गांव
Image caption नेपाल में हजारों लोगों के लिए यारचागुंबा कमाई का जरिया बन रही है.

हिमालय के जंगलों में बेशुमार नायाब जड़ी बूटियां मिलती हैं लेकिन यारचागुंबा की तलाश में वहां जाने वाले लोगों की तादाद तेजी से बढ़ रही है. इससे हिमालय के हरे भरे इलाके प्रदूषण का शिकार हो रहे हैं.

आम तौर पर ‘हिमालयन वायग्रा’ कही जाने वाली यारचागुंबा यौन शक्ति बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होती है और बाजार में इसकी काफी मांग है.

एक शोधकर्ता का कहना है कि अगर उस इलाके में बढ़ते प्रदूषण की समस्या से नहीं निपटा गया तो हिमालय के हरे भरे इलाके पर्यावरणीय संकट का शिकार बन सकते हैं.

इससे यारचागुंबा समेत तमाम दुर्लभ जड़ी बूटियों के लिए खतरा पैदा हो सकता है. साथ ही बर्फीले तेंदुए और कई दूसरे जीवों का अस्तित्व भी संकट में घिर सकता है.

बताया जाता है कि हाल के दिनों में पश्चिमी नेपाल के हिमालयी जिलों में हजारों लोग इस जड़ी की खातिर पहाड़ पर चढ़े हैं. यौन शक्ति बढ़ाने वाली इस दुर्लभ जड़ी से ये लोग काफी पैसे कमाते हैं.

'हर तरफ बोलतें और प्लास्टिक'

एक पूर्व वन अधिकारी और अब पश्चिमी नेपाल के दोल्पा जिले में हिमालय के हरे भरे इलाकों में बढ़ते प्रदूषण पर शोध कर रहे राजू छेत्री कहते हैं, “हिमालय के अनछुए हरे भरे इलाकों में कचरा जमा हो रहा है. वहां के पर्यावरण पर इसका नकारात्मक असर पड़ना शुरू भी हो चुका है.”

वो चेतावनी देते हैं, “अगर वहां हो रहे प्रदूषण को नहीं रोका गया तो वहां की हरियाली को खतरा हो सकता है. वहां पैदा होने वाली दुर्लभ ज़ड़ी बूटियां और जीव जंतुओं को इसका खमियाजा उठाना पड़ सकता है.”

Image caption यही है यारचागुंबा जिसे कीड़ा जड़ी के नाम से भी जाना जाता है.

हालांकि यारचागुंबा नेपाल के 41 हिमालयी जिलों में पाई जाती है, लेकिन प्रदूषण की समस्या दो पश्चिमी जिलों दोल्पा और धारचुला में ज्यादा गंभीर है. छेत्री के अनुसार इन जिलों में हजारों लोग यारचागुंबा के लिए हिमालय पर चढ़ते हैं.

दोल्पा में हिमालय के हरे भरे इलाकों से हाल ही में लौटे धन बहादुर केसी का कहना है, “वहां पर हजारों लोग डेरा जमाए बैठे हैं. वहां इधर उधर शराब और कोल्ड ड्रिंक्स की खाली बोतलें और प्लास्टिक बिखरी हैं.”

दूसरी तरफ अधिकारी अभी इस समस्या को ज्यादा गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. दोल्पा में मुख्य वन अधिकारी भक्ता राज गिरी का कहना है, “अगले साल से हमारी योजना है कि इस बारे में स्थानीय लोगों और उनके ग्राहकों से बात की जाए ताकि हिमालय के हरे भरे इलाके में प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके और उसे साफ रखा जा सके.”

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