दस साल से तहख़ाने में क़ैद बच्चे छुड़ाए गए

फ़ैज़ुर्रहमान सत्तारोफ़
Image caption 83 वर्षीय फ़ैज़ुर्रहमान सत्तारोफ़ ने 1960 के दशक में खुद को पैगंबर घोषित कर दिया था.

रूस के तातरस्तान इलाके में मुस्लिम समुदाय के एक पंथ द्वारा बच्चों को दस साल तक एक तहख़ाने में छिपाए रखने और उन्हें यातनाएं देने का मामला सामने आया है.

रूस में पुलिस अधिकारियों ने ज़मीन के कई फीट नीचे बने कब्रनुमा तहखाने से 27 बच्चों और 38 वयस्कों को बाहर निकाला.

कथित तौर पर समुदाय के वरिष्ठ नेता फ़ैज़ुर्रहमान सत्तारोफ़ इन लोगों के ज़रिए गुप्त रूप से अपनी इस्लामी खिलाफ़त या सत्ता स्थापित करना चाहते थे.

सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि इन बच्चों में से कई ऐसे हैं जो दस साल से भी ज्यादा समय से वहाँ रह रहे हैं.

83 वर्षीय फ़ैज़ुर्रहमान सत्तारोफ़ ने 1960 के दशक में खुद को पैगंबर घोषित कर दिया था. इसके बाद उनके अनुयायियों ने बाहरी दुनिया से अपना संपर्क खत्म करना शुरु किया. इस पंथ के अनुयायी रूस के कानून और संविधान को नहीं मानते और बहुत कम अनुयायियों को बाहर निकलने और काम करने की अनुमति दी जाती है.

अब इस मामले को लेकर फ़ैज़ुर्रहमान सत्तारोफ़ पर निरंकुशता दिखाने और सनकीपन का मामला चलाया जाएगा. रूसी कानून के मुताबिक उन्हें कानून के खिलाफ काम करने का आरोपी माना जाएगा.

फ़ैज़ुर्रहमान सत्तारोफ़ के इस धार्मिक पंथ के बारे में एक जांच प्रक्रिया के दौरान पिछले हफ्ते जानकारी मिली. छापेमारी के दौरान पंथ से जुड़े चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है. हालांकि सत्तारोफ़ की ओर से इस मामले पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

छापेमारी की कार्रवाई के दौरान रूसी सुरक्षा अधिकारियों ने कम उम्र के 19 से ज्यादा बच्चों को बंद अंधेरे तहखाने से बाहर निकाला जिसके बाद उन्हें अलग-अलग जगहों, अनाथालयों और अस्पतालों में भेज दिया गया है.

अधिकारियों के मुताबिक इनमें से कई बच्चों की उम्र एक साल से 17 साल के बीच है. ये बच्चे न कभी इस परिसर से बाहर निकले न स्कूल गए और न ही कभी बीमार पड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया.

इस्लाम मानने वालों की सामान्य मान्यता के मुताबिक पैगंबर मोहम्मद के बाद इस्लाम में दूसरा कोई पैगंबर नहीं हुआ है.

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