राष्ट्रपति मुरसी और क़ाहिरा ट्रैफ़िक

  • 14 अगस्त 2012
क़ाहिरा ट्रेफिक
Image caption कहा जा रहा है कि ट्रैफिक की समस्या का निदान राष्ट्रपति के लिए आसान न होगा.

हर नवनिर्वाचित राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की तरह मिस्र के राष्ट्रपति मोहम्मद मुरसी ने भी अपने शासन के पहले 100 दिनों के लक्ष्य तय किए हैं.

मोहम्मद मुरसी सीधी बात करते हैं और अपने शासन के पहले 100 दिनों के लिए उन्होंने रोटी, तेल, सुरक्षा और आवागमन की दिक्क़तो से निपटने का लक्ष्य रखा किया है.

जिसने भी कभी क़ाहिरा का सफ़र किया है उसे मालूम है कि आख़िरी लक्ष्य को पूरा करना मुरसी के लिए कितना मुश्किल होगा.

'इजिपशियन गज़ेट' नाम के अख़बार में स्तंभकार के तौर पर काम करने वाले अमरा इमाम कहते हैं कि क़ाहिरा में ट्रैफिक के हालात नर्क जैसे हैं.

वो कहते हैं, "मुझे लगता है कि बुरा कहना एक तरह समस्या को कम आंकने जैसा है. लोगों को काम के लिए पहुंचने में घंटों लग जाते हैं. अस्पताल जाने में घंटों लगते हैं. शहर में ढ़ेरों कारे हैं, सड़कें और गलियों की डिज़ाईनिंग बहुत ख़राब तरीक़े से की गई हैं. इसका असर लोगों के ज़हन पर पड़ता है. उनका जीवन नर्क बन जाता है."

गीत

शहर में ट्रैफ़िक की समस्या इस क़दर है कि ये गीतों का हिस्सा तक बन गए हैं. मुल्क के कई मशहूर गीतकारों ने इसपर लिखी गई कविताओं को अपनी आवाज़ दी है.

मैंने भारी ट्रैफिक में फंसे एक लॉरी ड्राइवर को रोककरउसका नाम पूछा जिसका जवाब मिला - आमर.

जब मैंने पूछा कि हुकुमत ने कहा है कि वो क़ाहिरा की ट्रैफ़िक की दिक्क़तों को सुलझाएगी, आपको लगता है कि ये संभव है? आमर कहते हैं कि नहीं ये मुमकिन नहीं, क्योंकि ट्रैफ़िक किसी समाज के आइने की तरह है.

लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें यक़ीन है कि मोहम्मद मुरसी के लिए ऐसा करना संभव होगा.

हातिम अब्दुल लतीफ़ शहर के एन शम्स विश्विद्यालय में यातायात इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर हैं.

उनका कहना है, "मुझे मालूम है कि ये बहुत ही मुश्किल है, बहुत-बहुत मुश्किल है. लेकिन हमें कोशिश करनी होगी. क़ाहिरा में ट्रैफिक की समस्या की वजह से हर साल 14 अरब मिस्री पाउंड का नुक़सान होता है. यानि ढा़ई अरब अमरीकी डॉलर सालाना."

नई योजना

हातिम अब्दुल लतीफ़ ने शहर की सड़क और बस नेटवर्क में सुधार करने के लिए सौ दिनों की एक योजना तैयार की है. सरकारी विभागों के आफिस के समय को अलग-अलग वक्त पर शुरू किया जाना इस योजना का हिस्सा है. शहर में और ट्रैफिक पुलिस की बहाली की जाएगी.

अमरा इमाम को लगता है कि क़ाहिरा में यातायात की समस्या को मिस्र की दिक्क़तों की झलक के तौर पर देखा जा सकता है.

स्तंभकार का कहना है, "होस्नी मुबारक तीस सालों तक लोगों को बड़े-बड़े सपने दिखा रहे थे. लेकिन लोगों को अब पता चला है कि वो देश को लूट रहे थे - आधारभूत ढ़ाचे में कोई पैसे नहीं ख़र्च किए गए हैं, सड़कों में धन नहीं लगाया गया है. जल निकासी की व्यवस्था सही नहीं है. सुरक्षा की हालत बूरी है. आप लोगों से कह सकते हैं कि वो धैर्य रखें लेकिन लोग पिछले तीन दशकों से चुप रहे हैं आप कैसे कहते हैं कि आगे भी खामोशी अख़्तियार करें?"

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