नात्जी 'अपराधी' ने प्रत्यर्पण की लड़ाई जीती

 बुधवार, 15 अगस्त, 2012 को 08:34 IST तक के समाचार

एक संदिग्ध नात्जी युद्ध अपराधी ने ऑस्ट्रेलिया सरकार के खिलाफ प्रत्यर्पण को लेकर कानूनी लड़ाई जीत ली है.

ऑस्ट्रेलिया सरकार चार्ल्स जेंटटई को हंगरी प्रत्यर्पित करना चाहती थी ताकि उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जा सके.

उन पर आरोप है कि 90 साल के जेंटई ने 1944 में बुडापेस्ट शहर में एक यहूदी किशोर को कथित तौर पर प्रताड़ित किया और उसकी हत्या की थी.

आरोपों के मुताबिक उन्होंने ये काम हंगरी के दो सैनिकों के साथ मिलकर किया था जिन्हें नात्जियों का समर्थन हासिल था.

लेकिन ऑस्ट्रेलियाई हाई कोर्ट ने पहले के एक फैसले को बरकरार रखा कि जेंटई को प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता क्योंकि हंगरी में 1944 में ‘युद्ध अपराध’ का कोई मामला नहीं था.

चार्ल्स जेंटई 2009 के बाद से ही प्रत्यर्पण रोकने को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं.

हंगरी ने 2005 में माँग की थी कि वे जेंटई से पूछताछ करना चाहता है.

नवंबर 2009 में एक ऑस्ट्रेलियाई कोर्ट ने कहा था कि उन्हें प्रत्यर्पित किया जाए लेकिन बाद में फेडरल कोर्ट ने ये फैसला पलट दिया था.

सरकार ने फेडरल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की लेकिन हाई कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया.

जेंटई इस बात से इनकार करते रहे हैं कि उन्होंने कोई अपराध किया है. वे ऑस्ट्रेलियाई नागरिक हैं.

उनके परिवार के सदस्यों का कहना है कि जेंटई हंगरी के अधिकारियों के सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं लेकिन ऑस्ट्रेलिया नहीं छोड़ेंगे.

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