ईरान से लेन देन पर 34 करोड़ डॉलर की चपत

 बुधवार, 15 अगस्त, 2012 को 04:17 IST तक के समाचार
स्टैंडर्ड चार्टेड बैंक

स्टैंडर्ड चार्टेड बैंक पर अमरीकी नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे.

स्टैंडर्ड चार्टेड बैंक ईरान के साथ अपने कारोबारी लेन देन के कारण पैदा विवाद का निपटारा करने के लिए न्यूयॉर्क के नियामकों को 34 करोड़ डॉलर की रकम देने को राजी हो गया है.

न्यूयॉर्क के नियामकों का कहना है कि स्टैंडर्ड चार्टेड बैंक ने ईरान के साथ 250 अरब डॉलर के लेन देन को छिपाया है.

ईरान के विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम के चलते उस पर कई तरह के प्रतिबंध लगे हैं जिनके तहत उसके साथ लेन देन से अमरीकी नियमों का उल्लंघन होता है.

इस मामले में बुधवार को सुनवाई होनी थी लेकिन अब स्टैंडर्ड चार्टेड और नियामकों के बीच समझौता हो जाने के बाद इसे टाल दिया गया है.

समझौते पर सहमति

ब्रितानी बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीटर सैंड्स इस बारे में बात करने के लिए न्यूयॉर्क गए हुए थे.

"वित्तीय सेवाओं से जुड़े न्यूयॉर्क के सरकारी विभाग (डीएफएस) और स्टैंडर्ड चार्टेड बैंक के बीच उस मामले में समझौता हो गया है जो 6 अगस्त 2012 को डीएसएफ की ओर से उठाया गया था. दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हो गए हैं कि इस मामले में कम से कम 250 अरब डॉलर का कारोबार हुआ."

न्यूयॉर्क के नियामक

बैंक ने मान लिया है कि कारोबारी लेन देन से जुड़ी उसकी कुछ गतिविधियों से अमरीकी प्रतिबंधों का उल्लंघन हुआ है, लेकिन उसका कहना है कि ये लेन देन सिर्फ 1.4 करोड़ डॉलर का था.

नियामकों की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है, “वित्तीय सेवाओं से जुड़े न्यूयॉर्क के सरकारी विभाग (डीएफएस) और स्टैंडर्ड चार्टेड बैंक के बीच उस मामले में समझौता हो गया है जो 6 अगस्त 2012 को डीएसएफ की ओर से उठाया गया था. दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हो गए हैं कि इस मामले में कम से कम 250 अरब डॉलर का लेन देन हुआ.”

वहीं स्टैंडर्ड चार्टेड की तरफ से जारी संक्षिप्त बयान में 34 करोड़ डॉलर में समझौता होने की बात कही गई है. समझौते की शर्तों के अनुसार बैंक डीएफएस को 34 करोड़ डॉलर का ‘नागरिक जुर्माना’ देगा.

लाइसेंस पर था खतरा

स्टैंडर्ड चार्टेड बैंक

बैंक की गतिविधियों पर रखी जाएगी नजर.

साथ ही एक पर्यवेक्षक भी नियुक्त किया जाएगा जो न्यूयॉर्क में स्टैंडर्ड चार्टेड बैंक की शाखा में गलत तरीके से पैसा बाहर भेज जाने को रोकने के लिए किए उपायों का मूल्यांकन करेगा और सीधे नियामक को इस बारे में सूचित करेगा.

बीबीसी के न्यूयॉर्क संवाददाता का कहना है कि हर्जाने के तौर पर दिए जाने वाले 34 करोड़ एक बड़ी रकम है, लेकिन उससे कहीं कम है जो दोनों पक्षों के बीच समझौता न होने की स्थिति में स्टैंडर्ड चार्टेड को भुगतना पड़ सकता था.

खास कर डीएफएस ने तो स्टैंडर्ड चार्टेड का लाइसेंस रद्द करने तक की बात कर दी थी.

डीएफएस का कहना है कि स्टैंडर्ड चार्टेड की अमरीकी ईकाई ने ईरान के साथ 60 हजार कारोबारी लेन देन किए हैं जो 250 अरब डॉलर मूल्य के थे. वहीं सैंड्स का कहना है कि बैंक के सिर्फ 300 लेन देनों से अमरीकी नियमों का उल्लंघन हुआ है.

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