असम की गूँज: बंगलौर से हजारों का पलायन

 गुरुवार, 16 अगस्त, 2012 को 19:20 IST तक के समाचार

असम की हिंसा के बाद मुंबई में तनाव फैला, और अब बैंगलोर में तनाव है

असम में पिछले दिनों फूटी जातीय हिंसा का असर दक्षिण भारत के बंगलौर और हैदराबाद शहरों में हुआ है.

जहाँ बंगलौर में रह रहे उत्तर-पूर्वी राज्यों के हजारों लोग इस डर से शहर छोड़ कर भाग गए हैं कि कहीं उन पर हमला न हो जाए, वहीं हैदराबाद में असम और अन्य पूर्वोत्तर के राज्यों से आए लोगों के बीच भय व्याप्त है.

हैदराबाद से उमर फारुक

हैदराबाद में असम और पूर्वोत्तर के लोगों में डर का माहौल, 1,000 से ज्यादा लोगों के वापस लौटने की अफवाहें.

हैदराबाद पुलिस ने पूर्वोत्तर के किसी भी व्यक्ति पर हमले से इंकार किया. लेकिन सुरक्षा कड़ी.

उधर हैदराबाद से सटे साइबराबाद में असम के सिक्यूरिटी गार्ड के साथ मारपीट.

एक सिक्यूरिटी एजंसी के मालिक ने कहा, अब तक 500 गार्ड्स वापस लौटे.

एमआइएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सिद्दीक नगर और अंज्यानगर का दौरा कर सुरक्षा का भरोसा दिलाया.

क्लिक करें असम के कोकड़ाझाड़ जिले में बोडो जनजाति और बंगाली मुसलमानों के बीच व्यापक दंगे भड़क उठे थे जिनमें तीन लाख से ज़्यादा लोगों को अपने घर छोड़कर भागना पड़ा था.

हाल में असम में मुसलमानों के खिलाफ हुई हिंसा के विरोध में जब क्लिक करें मुंबई में मुसलमानों के संगठनों ने रोष प्रदर्शन किया तो वहाँ हिंसा हुई थी जिसमें दो लोग मारे गए थे और अनेक अन्य घायल हो गए थे.

कुछ समय पहले महाराष्ट्र के पुणे शहर में हुए बम धमाकों के बाद भी ये कहा गया था कि इन बमों के जरिए उत्तर-पूर्वी राज्यों के लोगों को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी.

19 साल की सुनिए रीमा अरुणाचल प्रदेश की रहने वाली हैं और बैंगलोर में मनोविज्ञान में बीए कर रही हैं. उनकी परीक्षाएँ चल रही हैं, लेकिन हिंसा के डर से वो बैंगलोर छोड़ कर जा रही हैं.

रीमा ने कहा, “मुझे बहुत डर लग रहा है. पिछले दो दिनों से मैं घरों से बाहर नहीं निकली हूँ. मेरे दोस्तों ने कहा है कि घर से बाहर मत निकलना. ये अफवाह नहीं है.”

रीमा आगे कहती हैं, “मेरे दोस्त के भाई को उनके मकान मालिक ने घर से निकाल दिया. वो तीन चार दिन पहले वापस जा चुके हैं. मैं भी अपना सामान तैयार कर रही हूँ.”

ये पूछे जाने पर कि वो अपनी परीक्षा बीच में छोड़कर क्यूँ जा रही हूँ, तो रीमा ने कहा, परीक्षाएँ जिंदगी से ज्यादा कीमती तो नहीं हैं ना.

उन्होंने कहा, “उत्तर पूर्व के छात्र इतनी दूर से यहाँ पढ़ने आते हैं. और ये ज्यादातर छात्र किसान परिवार से आते हैं. लोग बड़ी तकलीफ से अपने बच्चों को यहाँ पढ़ाने के लिए भेजते हैं.”

रीमा को उनके एक दोस्त ने एसएमएस में लिखा था, “आप देर रात बाहर अकेले नहीं जाएँ, रात में किसी मुस्लिम इलाके से नहीं गुजरें."

बैंगलोर के ही एक और छात्र रॉबिन ने बीबीसी को ऐसे कई एसएमएस भेजे जिनमें उत्तर-पूर्व भारत, भूटान से छात्रों के भागने की बात कही गई है.

रॉबिन ने बताया कि लोगों को कथित ऐसी धमकियाँ मिली हैं कि 20 अगस्त ईद के बाद उत्तर-पूर्व के लोगों पर हमले होंगे, और उन्हें इसी का डर है, हालाँकि अधिकारी भरोसा दिला रहे हैं कि डरने की कोई बात नहीं है.

एक एसएमएस में ब्रिगेड रोड पर मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल पर छात्रों पर कथित हमले की बात कही गई है.

इन एसएमएस में कितनी सच्चाई है, ये साफ नहीं है.

"कर्नाटक के गृहमंत्री कल दो घंटे बेंगलोर रेलवे स्टेशन पर खड़े रहे और पूर्वोत्तर के लोगों से कहते रहे कि आपको बैंगलोर छोड़कर जाने की जरूरत नहीं है, हम आपको पूरी सुरक्षा देंगे."

सुषमा स्वराज, विपक्ष की नेता

उधऱ असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने लोगों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया है.

उन्होंने कहा, “मुझे अभी एक संदेश मिला है जिसके मुताबिक सोनिया गाँधी सभी उत्तर-पूर्व राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मिलेंगी.”

लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि कुछ जगह हिंसक घटनाएं हुई हैं और कुछ जगह अफवाहें फैलाकर पूर्वोत्तर के लोगों को डराया जा रहा है.

महाराष्ट्र से भी पलायन

मुंबई से जुबैर अहमद

पुणे में उत्तर-पूर्व के 4,000 छात्र पढ़ते हैं और ज्यादातर घरों को लौट रहे हैं.

पुणे में अरुणाचल प्रदेश छात्र संगठन अध्यक्ष लिखा राजुम ने कहा, "हमारे माता पिता हमें वापस लौटने को कह रहे हैं".

राजुम खुद वापस नहीं लौट रहे हैं.

अभा तक पुणे में उत्तर-पूर्व के 10 लोगों पर हमले, तीन गिरफ्तार.

पुणे पुलिस की अपील, छात्र फेसबुक, ट्विटर की अफवाहों पर ध्यान न दें.

पुलिस ने छात्रों के साथ बैठक की, सुरक्षा का आश्वासन.

मुंबई से बीबीसी संवाददाता जुबैर अहमद के मुताबिक पुणे में उत्तर-पूर्व राज्यों के 4,000 छात्र विभिन्न स्कूलों और कालेजों में पढ़ते हैं और ज्यादातर अपने घरों को लौट रहे हैं

पुणे विश्वविद्याय में पढने वाले अरुणाचल प्रदेश के छात्र लिखा राजुम ने कहा कि शहर में रहने वाले उत्तर-पूर्वी राज्यों के अधिकतर छात्र कल की फलाईट से अपने राज्यों को लौट रहे हैं

लिखा राजुम जो पुणे में उत्तर-पृवी राज्य अरुणाचल प्रदेश के छात्रों के संगठन के अध्यक्ष भी हैं, कहते हैं, "हमारे राज्यों के लोगों में काफी डर फैला हुआ है. हमारे माता पिता हमें वापस लौटने को कह रहे हैं".

राजुम खुद वापस नहीं लौट रहे हैं लेकिन छात्रों को वापस लौटने की सलाह दे रहे हैं.

वो कहते हैं, "मैं अभी देखता हूँ की स्थिति कैसी है. मैं उस समय लौटूंगा जब सभी यहाँ से वापस चले जायेंगे"

मुंबई काण्ड के बाद से अब तक पुणे में अलग-अलग जगहों पर उत्तर-पूर्वी राज्यों के 10 लोगों पर हमले हुए हैं. हमला करने वाले तीन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है

उधर पुणे पुलिस ने इन छात्रों से अपील की है कि वो फेसबुक और दुसरे नेटवर्क पर फैली अफवाहों पर ध्यान न दें. पुलिस ने छात्रों से कई बैठक की है और उन्हें आश्वासन दिया है कि उन्हें पूरी सुरक्षा दी जायेगी.

मोबाइल संदेशों से अफवाहें

बंगलौर में अधिकारियों ने कहा है कि मोबाइल संदेशों के जरिए अफवाहें फैलाई गईं कि उत्तर-पूर्वी राज्यों के लोगों पर हमले हो सकते हैं.

इसके बाद ही दो विशेष रेलगाड़ियों के ज़रिए चार हजार लोग शहर छोड़ कर असम चले गए.

बंगलौर में स्वतंत्रता दिवस के दिन अचानक अफवाहें गर्म हो गईं कि उत्तर-पूर्वी राज्यों के लोगों को निशाना बनाया जा सकता है.

इसके बाद शहर का मुख्य रेलवे स्टेशन शहर छोड़ने वालों की भीड़ से भर गया. हालत ये हो गई कि अधिकारियों को दो विशेष रेलगाड़ियों का इंतजाम करना पड़ा.

बंगलौर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बीबीसी हिंदी सेवा को बताया कि 4000 लोग शहर छोड़कर चले गए हैं और इनमें से ज्यादातर छात्र हैं.

असम, नगालैंड, मिजोरम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा आदि राज्यों से बेहतर शिक्षा और रोजगार की तलाश में नौजवान लड़के लड़कियाँ दिल्ली, पुणे, बंगलौर, मुंबई जैसे भारत के अलग अलग शहरों में जाते हैं.

सिर्फ बंगलौर शहर में उनकी जनसंख्या 2.5 लाख से ज्यादा है. कर्नाटक के मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टर ने कहा है कि बंगलौर में रहने वाले उत्तर-पूर्वी भारत के लोगों को कोई खतरा नहीं है.

राज्य के गृहमंत्री आर अशोक ने कहा है कि हिंसा की स्थिति पैदा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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