दुनिया की सैर पर निकलते मुसलमान!

 रविवार, 26 अगस्त, 2012 को 19:37 IST तक के समाचार
मुसलमान

एक अध्ययन के मुताबिक मुसलमानों ने पिछले साल पर्यटन पर 102 अरब यूरो खर्च किए.

साल 2025 तक विश्व की एक-तिहाई जनसंख्या मुस्लिम होगी और साथ ही दुनियाभर में पढ़े लिखे, सुविधा-संपन्न मुसलमानों की संख्या बढ़ती जा रही है.

विश्व की मुसलमान आबादी न सिर्फ अपने लिए सुविधाएं जुटाने में सक्षम है बल्कि सैर-सपाटे के दौरान ऐशो-आराम उनकी पहली प्राथमिकता बनती जा रही है.

सुबह-सबेरे मुझे मलेशिया से फोन आया कि लंदन का सबसे बेहतरीन हलाल होटल कौन सा होगा. हलाल का अर्थ है जीवन जीने का ऐसा तरीका जो ‘हलाल’ यानि इस्लामी परंपरा के मुताबिक हो.

लंदन ओलंपिक और महारानी की डायमंड जुबली के धूम-धड़ाके बीच मेरे मित्र ने लंदन आने का कार्यक्रम बना लिया.

'हलाल पर्यटन'

लेकिन मेरे दोस्त को जो चाहिए वो आसानी से उपलब्ध नहीं उन्हें चाहिए शानो-शौकत भरा एक ऐसा होटल जिसमें नमाज़ पढ़ने की सुविधा हो, औरतों के लिए अलग से स्पा हो और खाना शराब के बिना बनाया जाता हो.

मुसलमान

सैर-सपाटे के दौरान ऐशो-आराम मुसलमानों की पहली प्राथमिकता बन रही है.

दुनियाभर में संपन्न मुसलमानों की क्लिक करें संख्या बढ़ रही है जो हर अच्छी से अच्छी जगह जाना चाहते हैं जहां हर चीज़ हलाल जीवन शैली के मुताबिक ढली हो. ज़ाहिर है जो रेस्त्रां और होटल हलाल की पद्धति और नियमों को मानते हैं वो खासे महंगे भी होते है.

दुनियाभर में मुसलमानों की जनसंख्या 1.8 अरब है और तेज़ी से बढ़ रही है. दिनार स्टैंडर्ड बैंक की ओर से किए गए एक अध्ययन के मुताबिक मुसलमानों ने पिछले साल पर्यटन पर 102 अरब यूरो खर्च किए. माना जा रहा है कि 2020 तक ये आंकड़ा बढ़कर 156 अरब यूरो पहुंच जाएगा.

विश्व भ्रमण

छुट्टियां बिताने और सैर-सपाटे के लिए मुसलमानों के बीच इस्लामी देश ही पहली पसंद रहे हैं, लेकिन अब मुसलमान ऑस्ट्रेलिया और अमरीका का रुख भी कर रहे हैं.

हलाल सुविधाओं की बात करें तो मलेशिया इस मामले में सबसे ऊपर है. कुछ सुविधाएं और साज-सज्जा तो इतनी बेमिसाल है कि हर कोई हैरान रह जाता है.

अब ज़रूरत इस बात की है कि यूरोप और लंदन के दरवाज़े भी मुसलमानों और उनकी शानो-शौकत के लिए खुलें ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग ज़्यादा से ज़्यादा जगहों पर जाएं.

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