इराक युद्ध के जख्मों पर संगीत का मरहम

 रविवार, 26 अगस्त, 2012 को 15:02 IST तक के समाचार
इराक युद्ध

युद्ध खत्म हो जाते हैं लेकिन हमेशा अपने पीछे त्रासदी और अवसाद छोड़ जाते हैं.

इराक में अमरीकी सेना के नेतृत्व में कई बरसों तक चला युद्ध पिछले साल खत्म हो चुका है. लेकिन इस युद्ध की दर्दनाक और दुखदायी यादें अमरीकी सैनिकों का पीछा नहीं छोड़ रही हैं. ऐसे में पूर्व अमरीकी नौसैनिक क्रिस्टियान एलिस ने इनसे उबरने का एक नया तरीका निकाला है.

क्रिस्टियान एलिस वर्ष 2004 में एक युवा अमरीकी नौसैनिक थे जब उन्हें इराक के फालुजा शहर में तैनात किया गया.

उनके अनुभव पर एक ओपरा यानी संगीत नाटिका तैयार की गई है जिसे नाम दिया गया है 'फालुजा'.

इराक से उन्हें लौटे अब बरसों बीत चुके हैं, लेकिन क्रिस्टियान एलिस का कहना है कि उनके तनावों और दुखों को कम करने में ये ओपरा दवाओं से कहीं ज्यादा कारगर साबित हो रहा है.

अवसाद को संगीत की अभिव्यक्ति

फालुजा इराक के उन शहरों में से एक है जो युद्ध के दौरान सबसे ज्यादा हिंसा और खून खराबे का शिकार हुए. चरमपंथियों को उखाड़ फेंकने के गठबंधन सेनाओं के अभियान में बहुत से लोग मारे गए जिनमें चमरपंथियों और आम इराकी लोगों के अलावा अमरीकी नौसैनिक भी शामिल थे.

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इराक में तैनात सैनिकों का कहना है युद्ध का स्याह पहलू साथ नहीं छोड़ता है.

सार्जेंट क्रिस्टियान भी लड़ाई के दौरान घायल हुए. बाद में उन्होंने सेना छोड़ दी. लेकिन मैदान-ए-जंग की हिंसा, खून खराबा, तनाव और अवसाद से जुड़ी दर्दनाक यादों ने उन्हें नहीं छोड़ा.

वो बताते हैं, "लोग कभी नहीं समझ पाते हैं कि हमारे लिए युद्ध कभी खत्म नहीं होता. भले ही हमें अपने घर पर हो, हंस रहे हों या मौज मस्ती कर रहे हों, लेकिन उसका एक स्याह पहलू हमेशा हमारे साथ रहता है. हमारी निजी जिंदगी इससे प्रभावित होती है. आपको हमारे हाथों और पैरों में भले ही दस ऊंगलियां दिखतीं हों लोकिन कुछ अदृश्य चोटों से हम जूझते रहते हैं. कुछ जूझ पाते हैं और कुछ नहीं जूझ पाते हैं और हार मान लेते हैं."

क्रिस्टियान एलिस अपने अंदर जारी गहमागहमी और हलचल को बाहर निकालना चाहते थे. और उन्होंने इसके लिए संगीत को माध्यम बनाने की सोची और गाना सीखना शुरू किया. फिर उनकी मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से हुई जिन्होंने क्रिस्टियान एलिस के अनुभवों पर एक ओपेरा बनाने की सोची यानी इराक युद्ध पर पहला ओपरा.

ये व्यक्ति थे अमरीकी सामाजिक कार्यकर्ता और फिल्मकार चार्ली ऐनेबर्ग वीनगार्टन. उन्होंने ओपरा की स्क्रिप्ट लिखने के लिए हीथर राफो से संपर्क किया, जिनका जन्म मिशिगन में हुआ और जिनके पूर्वज इराकी थे. इससे पहले इराक की महिलाओं के बारे में हीथर राफो का नाटक बहुत कामयाब रहा है.

दो दुनियाओं के बीच सेतु

वो बताती हैं, "मुझे पता है कि क्रिस्टियान एलिस के अनुभव उनके लिए कितने मायने रखते हैं. साथ ही, मैंने पूरी सहानुभूति के साथ इराकियों की भी कहानियां सुनी हैं. तो मैं अच्छी तरह जानती थी कि इन दोनों दुनियाओं के बीच किस तरह तालमेल बिठाना है.”

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फालूजा में युद्ध के दौरान भारी तबाही हुई.

इस ओपरा में अमरीका और इराक, दोनों ही जगह के कलाकार काम कर रहे हैं. क्रिस्टियान एलिस का कहना है कि इस ओपरा पर काम करना अब उनकी थेरेपी का हिस्सा बन गया है.

वो बताते हैं, "काफी कुछ हुआ. अच्छा भी, बुरा भी. मैंने रोज गोलियां खाईं. मेरे शरीर के अंदर दवाओं के सहारे रासायनिक संतुलन बनाया जाता था. डॉक्टरों से भी बात होती थी, हालांकि वो मेरे बारे में ज्यादा नहीं जानते थे. लेकिन इस ओपेरा के दौरान मैं अपने अपराधबोध, शर्म और अपने अंदर की हैवानियत को बाहर निकाल पाया. संगीत वाकई जख्मों को भरने में मदद करता है."

क्रिस्टियान एलिस आगे बताते हैं, "इसके जरिए मैंने अपनी जिंदगी को पूरी दुनिया के सामने पेश किया. जाहिर है कि लोग मेरे अतीत के बारे में मुझसे बहुत सवाल करेंगे जिनका सामना करना मुश्किल होता है. लेकिन मैं अपनी मुश्किलों से पार पा रहा हूं, जिसके बारे में पहले मैं सोच भी नहीं पाता था. लेकिन इस ओपेरा से ये मुमकिन हुआ."

अमरीका में इस ओपरा के मंचन की तैयारियां अभी चल रही हैं, लेकिन ओपरा का शहर कहे जाने वाले कनाडा के वैंकूवर में फलुजा का मंचन हो चुका है और वहां वो हिट रहा है.

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