अन्ना जैसे आंदोलन ने इटली में गाड़े झंडे

 शनिवार, 1 सितंबर, 2012 को 08:47 IST तक के समाचार
बेप्पे ग्रिलो

बेप्पे ग्रिलो पूर्व हास्य कलाकार हैं और वे इस राजनीतिक आंदोलन के केंद्र में रहे हैं

भारत में हाल ही में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आंदोलन चला रही टीम अन्ना ने राजनीति में उतरने की घोषणा की और कुछ ऐसा ही हुआ है इटली में भी जहां के राजनीतिक पटल पर एक नई पार्टी सामने आई है.

ये दल आम राजनीतिक दलों से अलग है क्योंकि ये नागरिकों के आंदोलन से उपजी और इसका जन्म इंटरनेट पर हुआ.

फ़ाइव स्टार मूवमेंट या पांच सितारा आंदोलन नाम की इस पार्टी के समर्थक पारंपरिक दलों और उनके नेताओं को तिरस्कार की नज़र से देखते हैं क्योंकि वे इन्हें पूरी तरह से भ्रष्ट मानते हैं.

इस नई पार्टी का असर अब सत्ता पर भी दिख रहा है. हाल के महीनों में हुए चुनावों में फ़ाइव स्टार मूवमेंट को 20 प्रतिशत तक वोट मिले हैं और उत्तरी इटली के पार्मा शहर में हुए नगर निगम चुनावों में इस पार्टी ने जीत हासिल की.

लोगों की साझेदारी

इससे लगता है कि आने वाले दिनों में नागरिकों की ये पार्टी चुनावों में बड़ी चुनौती बन कर उभर सकती है. पार्मा में नागरिक आंदोलन से क्या बदलाव आ रहे हैं, ये जानने के लिए बीबीसी संवाददाता ऐलन जॉनस्टन वहां पहुंचे.

पार्मा शहर में पांच सितारा आंदोलन के कार्यकर्ता कहते हैं कि भवन-निर्माण पर और फालतू खर्च नहीं होगा.

ये लोग पुराने भ्रष्ट दल और शासन के प्रति उनके रवैये को ख़त्म करना चाहते हैं. कार्यकर्ता कहते हैं कि अब शहर के सामाजिक ढांचे में ज़्यादा निवेश होगा.

"हमें जो हज़ारों सुझाव मिलेंगे, उन पर चर्चा करने और वोट करने के बाद हम उस एक सुझाव को चुनेंगे जो सबको मान्य होगा."

निकोलैटा पाची, उप मेयर, पार्मा

यही नहीं, शहर की नई उप मेयर निकोलैटा पाची कहती हैं कि नीतियां बनाने में नगर परिषद लोगों के सुझावों के मुताबिक चलने के लिए तैयार है. वे कहती हैं, "हम देख सकते हैं कि हमारे समाज में क्या ग़लत है. हम इसे बदलना चाहते हैं. हम इसकी ज़िम्मेदारी नेताओं को नहीं देना चाहते."

फ़ाइव स्टार मूवमेंट सभी के परामर्श के मुताबिक काम करने के सिद्धांत पर यक़ीन करता है.

निकोलैटा पाची कहती हैं, "हमें जो हज़ारों सुझाव मिलेंगे, उन पर चर्चा करने और वोट करने के बाद हम उस एक सुझाव को चुनेंगे जो सबको मान्य होगा."

लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर परामर्श करने, उस पर चर्चा करने और फिर वोट करने में बहुत समय लगेगा जिससे कोई ठोस कदम नहीं उठ पाएंगे, लेकिन पार्मा की उप मेयर का इस बारे में तर्क कुछ और है.

पार्मा के मेयर फेडेरिको पिज़ारौटी

फ़ेडेरिको पिज़ारौटी पार्मा के मेयर चुने जाने से पहले एक आईटी कंसल्टेंट थे.

वे कहती हैं, "नहीं, देखिए, हम इस तरह का विचार-विमर्श रोज़मर्रा के फ़ैसलों के लिए नहीं करेंगे. हम ये सिर्फ़ बड़े फ़ैसलों के लिए करेंगे, जहां सबकी राय होना ज़रूरी होगा."

अनुभव की कमी

पार्मा के नवनिर्वाचित नागरिक परिषद को किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, ये बात टाउन हॉल के पास है पार्मा का मशहूर रेगियो थियेटर की मौजूदा स्थिति से साफ़ हो जाती है.

ओपेरा के लिए मशहूर इस थियेटर को अपना गर्मी का सीज़न रद्द करना पड़ा है क्योंकि नगर परिषद इसके लिए पर्याप्त धन मुहैया नहीं करा सका. यहीं नहीं, परिषद इस वक्त अस्सी करोड़ यूरो के कर्ज़ तले दबा हुआ है. ऐसे हालात से निपटने के लिए नए पार्षदों को कई कड़े फ़ैसले करने पड़ेंगे.

"इस नगरनिगम में अनुभव की कमी है और न ही इन्हें नौकरशाही की समझ है, इसलिए इन्हें कोई भी कदम उठाने और फैसले लेने में मुश्किल हो रही है. कई बातें विपक्ष में रहते ठीक लगती हैं लेकिन अब ये सत्ता में हैं. इन्हें फ़ैसले करने हैं, लोगों को चुनना है. और इनके सुझाव टिकने वाले नहीं हैं."

निकोला डैल ओलियो, प्रवक्ता, डेमोक्रेटिक पार्टी

पार्मा में कई ऐसे लोग हैं जिन्हें शक़ है कि प्रशासन में पहली बार कदम रख रहे पांच सितारा आंदोलन के पार्षद ऐसी स्थिति से किस तरह निपटेंगे.

निकोला डैल ओलियो, डेमोक्रैटिक पार्टी के प्रवक्ता हैं. वो कहते हैं, "अभी तक इस नगर निगम ने कुछ भी नहीं किया है. इसमें अनुभव की कमी है और न ही इन्हें नौकरशाही की समझ है, इसलिए इन्हें कोई भी कदम उठाने और फैसले लेने में मुश्किल हो रही है. कई बातें विपक्ष में रहते ठीक लगती हैं लेकिन अब ये सत्ता में हैं. इन्हें फ़ैसले करने हैं, लोगों को चुनना है. और इनके सुझाव टिकने वाले नहीं हैं."

पार्मा की सड़कों पर माहौल देखकर आप महसूस कर सकते हैं कि यहां लोकतंत्र में एक नया प्रयोग किया जा रहा है. यहां कई लोग आपसे कहेंगे कि ये प्रयोग सफल नहीं होगा और बड़े पैमाने पर विचार-विमर्श कर फ़ैसले लेना अव्यावहारिक है.

लेकिन बाकी इटली की नज़रे इस शहर पर टिकी हुई हैं और अगर पार्मा का ये प्रयोग सफल होता है, तो हो सकता है कि देश के बाकी शहर और प्रांत भी इस पांच सितारा नागरिक आंदोलन को अपना लें.

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