आज करे सो कल कर कल करे सो परसों..

 शनिवार, 1 सितंबर, 2012 को 17:25 IST तक के समाचार
टालमटोल

बड़े बुज़ुर्ग हमेशा काम समय पर निपटाने की सलाह देते रहे हैं

मौसम बदलने लगता है लोग नए मौसम के हिसाब से तैयारी करने लगते हैं. गर्मियाँ आने लगती हैं तो कूलर झाड़-पोंछ कर तैयार कर लिया जाता है और सर्दियाँ आने वाली होती हैं तो गर्म कपड़े निकालने का काम शुरु हो जाता है.

छुट्टियाँ ख़त्म होते-होते कुछ छात्र स्कूल जाने की तैयारियों में लग जाते हैं, कुछ को होमवर्क याद आता है और कुछ को अपना प्रोजेक्ट.

लेकिन ऐसा वही लोग करते हैं जो अपना काम ख़ुद करते हैं और समय पर करते हैं. लेकिन कुछ लोगों को कोई फ़र्क नहीं पड़ता, जानते हैं क्यों?

क्योंकि ऐसे लोगों को अपने आज का काम कल पर टालने की आदत होती है.

लेट-लतीफ़ी या किसी भी काम को टालने की आदत किसी छात्र के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं है.

हैमलेट का उदाहरण

शेक्सपियर के नाटक 'हैमलेट' से बेहतर भला इसे कौन समझा सकता है.

विश्वविद्यालय की लाईब्रेरी का सबसे अच्छा उपयोग क्या हो सकता है अगर आसमान में तारे निहारना, अपने मादक साथियों को निहारना और शाम की ड्रिंक्स की योजना बनाना न हो?

अगर आज का दिन होता तो हैमलेट का छलना और बढ़ जाता क्योंकि तब उसे अपने डर के बारे में अपने साथियों को ट्विटर और फ़ेसबुक पर भी बताना होता.

टीएस इलियट को लगता था कि हैमलेट निश्चित तौर पर एक कलात्मक विफलता थी.

उनको लगता था कि डेनमार्क के राजकुमार के जीवन की मुसीबतें घटनाक्रम की तुलना में थोड़ी अधिक थीं और इसका मतलब ये है कि दर्शक हैमलेट के साथ अपने आपको जोड़ नहीं पाते.

लेकिन कई लोग इससे सहमत नहीं होते.

अनिर्णय की स्थिति

टीवी देखता एक व्यक्ति

कई लोग ग़ैर ज़रुरी कामों में वक़्त ज़ाया करते रह जाते हैं

हैमलेट की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण ये है कि हमसें से बहुत से लोगों ने, ख़ासकर छात्रों ने, गंभीर अनिर्णय और जान-बूझकर की जाने वाली टालमटोल की आदत का सामना किया है.

कैलगरी विश्वविद्यालय में हैसकेन स्कूल ऑफ बिज़नेस के प्रोफेसर और 'द प्रोक्रैस्टिनेशन इक्वेशन' नाम की किताब के लेखक प्रोफेसर पियर्स स्टील ने इस विषय में व्यापक शोध किया है.

शोध के दौरान उन्होंने पाया है कि हम में से 95% लोग कभी ना कभी टालमटोल करते ही हैं.

शिकागो के डीपॉल यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर जोसेफ फ़ेरारी के अनुसार दुनिया की 20 प्रतिशत आबादी गंभीर रुप से टालमटोल की आदत की शिकार है.

उनकी इस आदत से ना सिर्फ उनकी जीवन में विषमताएं आती हैं बल्कि वे कम समय तक जीवित रहते हैं.

ये आंकड़े काफी भयावह हैं.

टालमटोल करने वाले लोगों के पास पैसे की कमी होती है, उनका स्वास्थ्य भी अच्छा नहीं होता और वे खुश भी नहीं रहते.

"इसका दूसरा तरीका है अपने एक दोस्त को आप 500 रुपए दे दें और उससे कहें कि अगर आप अपना काम समय पर पूरा नहीं करते हैं तो वे आपके द्वारा दिए पैसे को किसी ऐसे राजनैतिक दल को दान कर दें जिससे आप नफरत करते हैं"

प्रोफ़ेसर पियर्स स्टील

सबसे दुखद ये होता है कि ऐसे लोग खुद को खुश करने के लिए छोटी-छोटी कहानियां गढ़ना शुरु कर देते हैं.

कई लोग दलील देते हैं कि वे तनाव के माहौल में ज्यादा अच्छा काम करते हैं लेकिन ऐसा नहीं होता है. सच ये है कि अंतिम समय में किए जाने वाले काम में ज्य़ादा गलतियां होती हैं.

इतना ही नहीं इससे हमारे करीबी लोगों को तकलीफ़ होती है और गुस्सा भी आता है और वो हमसे दूर होते जाते हैं.

समाज में भी उन लोगों का ज्यादा आदर किया जाता है जो जल्दी निर्णय लेते हैं बजाय उनके जो उपदेश देने में समय बर्बाद करते हैं.

राजनीति का उदाहरण

इसका उदाहरण राजनेताओं में भी देखने को मिलता है.

फ़ॉकलैंड्स की लडा़ई के दौरान ब्रिटेन की तत्कालीन प्रधानमंत्री मार्गेट थैचर और इराक की लड़ाई के दौरान अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश इसके उदाहरण हैं.

आलस्य

काम टालने की प्रवृत्ति पूरी दुनिया में पाई जाती है

भारतीय संदर्भों में लोग बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव के कथित अनिर्णय की चर्चा की जाती है.

जो लोग अपने कामों को हफ्तों, महीनों और वर्षों तक टालते रहते हैं उनकी तुलना डायनासोर से की जाती है.

जिन लोगों को काम टालने की आदत होती है उन्हें अक्सर इसके लिए बहाने बनाते और झूठ बोलते देखा गया है.

ऐसे में जो लोग अपना काम काफी प्रभावशाली तरीके से और समय पर करते हैं वे अपने इन साथियों के बहानों को समझ नहीं पाते हैं.

मदद

न्यूयॉर्क में रहने वाली लेखिका शेरिल कैंटर ने ऐसे लोगों की मदद के लिए एक वेबसाइट भी शुरु की है जिसमें इस समस्या से पीड़ित लोगों की मदद की जा सके.

प्रोफ़ेसर पियर्स स्टील को भी लगता है इंसानों से जुड़ी इस समस्या को पूरी तरह से खत्म करना मुमकिन नहीं होगा लेकिन इसे कम ज़रुर किया जा सकता है.

इसका एक कारगर तरीका है अपने काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटकर रखने का.

वो कहते हैं, "इसका दूसरा तरीका है अपने एक दोस्त को आप 500 रुपए दे दें और उससे कहें कि अगर आप अपना काम समय पर पूरा नहीं करते हैं तो वे आपके द्वारा दिए पैसे को किसी ऐसे राजनैतिक दल को दान कर दें जिससे आप नफरत करते हैं."

संक्षेप में कहें तो इन चीज़ों की मदद से आप ज्यादा ज़िम्मेवार व्यक्ति बन पाएंगे जिसपर कई और लोगों की खुशी और मानसिक शांति निर्भर हो सकती है.

इसलिए अगर ये सवाल किया जाए कि टालमटोल करने और नहीं करने में क्या ज़्यादा बेहतर है तो वो हर हाल में टालमटोल नहीं करना होगा.

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