नालंदा में राज ठाकरे के खिलाफ याचिका दायर

 सोमवार, 3 सितंबर, 2012 को 21:14 IST तक के समाचार
राज ठाकरे

राज ठाकरे मराठी अस्मिता के नाम पर अक्सर बिहारियों और पूर्वांचलियों के खिलाफ़ बयान देते रहे हैं.

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे के हिंदी भाषी लोगों, खासकर बिहारियों के खिलाफ़ टिप्पणी और धमकी का लगभग सभी राजनीतिक दलों ने विरोध किया है.

बिहार से बीबीसी संवाददाता मणिकांत ठाकुर के अनुसार नालंदा की एक अदालत में कुछ वकीलों ने सोमवार को एक याचिका दायर कर राज ठाकरे पर समुदायों के बीच नफरत फैलाने और देश की अखंडता पर प्रहार करने का आरोप लगाया है. इस मामले पर अभी सुनवाई होनी है.

सोमवार को कांग्रेस पार्टी ने भी अपनी चुप्पी तोड़ते हुए राज ठाकरे के मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

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पार्टी प्रवक्ता ने मनीष तिवारी ने मीडिया से मुख़ातिब होते हुए कहा, ''मीडिया ऐसे हर व्यक्ति का बहिष्कार करे जो अपनी बातचीत में उत्तेजक और भड़काऊ बातें करता हो. ऐसे लोग इस तरह की बातें इसलिए करते हैं क्योंकि मीडिया उनकी बातों को कवरेज देता है.''

वामपंथी दलों ने भी राज ठाकरे के बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. सीपीआईएम महासचिव प्रकाश करात ने कहा है कि, राज ठाकरे के खिलाफ़ राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए.

जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव ने राज ठाकरे को कांग्रेस के हाथों की 'कठपुतली' बताया है, जिसका इस्तेमाल वह राज्य में चुनावी फायदे के लिए शिवसेना-भाजपा गठबंधन के खिलाफ कर रही है.

"ठाकरे का बयान संविधान, कानून के शासन और समाज के प्रति उनकी अवमानना को प्रदर्शित करता है. महाराष्ट्र सरकार को मुंबई में उत्पाती तत्वों से मीडियाकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए."

ब्रॉडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन

शरद यादव से जब हिंदी समाचार चैनलों के खिलाफ राज की टिप्पणी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि, हिंदी समाचार चैनलों को मुद्दे को समझे बिना खबर का प्रसारण नहीं करना चाहिए.

लोकसभा में मुख्य विपक्षी दल बीजेपी की नेता सुषमा स्वराज ने रविवार को शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे से उनके घर जाकर मुलाकात की थी. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सुषमा ने इसे एक औपचारिक मुलाकात बताई थी.

नीतीश का पलटवार

इससे पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इस मुद्दे पर केंद्र की यूपीए सरकार और महाराष्ट्र सरकार पर ठाकरे के साथ सख्त़ी से पेश नहीं आने आरोप लगाया था.

नीतीश कुमार ने कहा था कि ठाकरे जिस तरह की बयानबाज़ी कर रहे हैं उससे ना सिर्फ वो हमारी लोकतांत्रिक मूल्यों पर बल्कि देश के संविधान को भी चुनौती दे रहे हैं.

नीतीश के अनुसार सभी राजनैतिक दल इस बात पर एक राय है कि अपने भाषणों से देश का माहौल बिगाड़ने वाले ठाकरे जैसे लोगों के साथ सख्त़ी से निपटना चाहिए.

नीतीश ने कहा है कि वे जल्द ही इस मसले पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर ठाकरे के खिलाफ़ कार्रवाई करने की मांग करेंगे.

इस बीच टीवी समाचार चैनलों के संपादकों की शीर्ष संस्था ब्रॉडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन यानि बीईए ने हिंदी समाचार चैनलों के खिलाफ मनसे प्रमुख राज ठाकरे के बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया है.

संस्था की ओर से जारी विज्ञप्ति में बीईए महासचिव एनके सिंह और अध्यक्ष शाजी ज़मा ने कहा कि ठाकरे का बयान न केवल मीडिया बल्कि लोकतंत्र की जड़ों पर हमला है.

संस्था ने कहा कि ठाकरे का बयान संविधान, कानून के शासन और समाज के प्रति उनकी अवमानना को प्रदर्शित करता है. बीईए ने महाराष्ट्र सरकार से मुंबई में उत्पाती तत्वों से मीडियाकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की है.

चाचा का साथ

हालांकि सोमवार सुबह होते-होते शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने अपने भतीजे और एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे का समर्थन कर दिया.

बाल ठाकरे ने पार्टी के मुखपत्र सामना के संपादकीय में लिखा है कि वह असली मराठी हैं और कभी बिहार नहीं आए हैं.

ठाकरे

बाल ठाकरे ने शिवसेना के मुखपत्र सामना में लिखे अपने लेख में राज ठाकरे का समर्थन किया है.

शिव सेना प्रमुख ने कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह पर पलटवार करते हुए उन्हें मुफ्त में नाचने वाला नर्तक करार दिया है.

पिछले दिनों मुंबई पुलिस ने बिहार पुलिस को जानकारी दिए बिना एक युवक को राज्य के सीतामढ़ी जिले से उठा लिया था जिस पर मुंबई में 11 अगस्त को प्रदर्शन के दौरान एक शहीद स्मारक को नुकसान पहुंचाने का आरोप है.

इस मामले पर नाराजगी जताते हुए बिहार सरकार ने मुंबई पुलिस को कानूनी कार्रवाई की धमकी दी थी.

इसी बात पर भड़के राज ठाकरे ने कहा कि मुंबई पुलिस पर अगर कोई कार्रवाई हुई तो महाराष्ट्र में बिहारियों को भी घुसपैठिया मान कर मुंबई से खदेड़ दिया जाएगा.

राज के इस बयान पर नाराज़गी जताते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ठाकरे को 'सिरफिरा' बताते हुए कह दिया कि ऐसे किसी 'ऐरे गैरे' की बंदरघुड़की से बिहार में कोई डरने वाला नहीं है. इसके बाद ये मुद्दा राजनैतिक हल्कों से होते हुए मीडिया पर छा गया है.

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