'घर से निकलते ही छेड़ी जाती हूँ..'

 मंगलवार, 4 सितंबर, 2012 को 15:58 IST तक के समाचार

महिलाओं को सड़कों पर आए दिन छेड़छाड़ का सामना करना पड़ता है.

मिस्र भारत से हज़ारों किलोमीटर दूर सही लेकिन इंटरनेट पर वहां की एक घटना का वीडियो, हाल ही में असम में एक लड़की के साथ हुई यौन हिंसा की याद ताज़ा कर देता है.

दरअसल पिछली सर्दियों में मिस्र के एलेक्सेंड्रिया शहर में मर्दों की भीड़ ने एक महिला पर हमला किया था.

घटना के वीडियो में महिला को कंधों पर उठाकर ले जा रहे लोगों को देखा जा सकता है. ये लोग बाद में महिला को ज़मीन पर घसीटते भी हैं.

भीड़ के शोरगुल में उस महिला की चीख शायद ही सुनाई दे रही थी और ये कहना मुश्किल था कि कौन उसे बचा रहा है और कौन उस पर हमला कर रहा है.

ये वाकया शायद उत्पीड़न का बहुत बुरा रूप था लेकिन सर्वेक्षणों के मुताबिक मिस्र की कई महिलाओं को रोज़ाना किसी न किसी रूप में यौन उत्पीड़न का सामना करना ही पड़ता है.

मिस्र में कार्यकर्ताओं का कहना है कि वहां महिलाओं के खिला़फ़ यौन उत्पीड़न के मामले संक्रमण की तरह फैल रहे हैं.

पिछले तीन महीने में इस तरह की घटनाओं में इतनी बढ़ोतरी हुई है कि कई महिलाएं इसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा मानने लगी हैं.

सड़कों पर चलने में डर

"“मिस्र की ज़्यादातर महिलाएं हिजाब पहनती हैं लेकिन उनमें से कई ने यौन उत्पीड़न का सामना किया है. "

मिस्र की एक युवती

एक महिला मार्वा (बदला हुआ नाम) कहती हैं कि जब भी वो बाज़ार जाती हैं तो उन्हें डर लगा रहता है कि कोई उन्हें ग़लत तरीक़े से छुएगा या फिर ताना कसेगा.

वो कहती हैं, “मुझे एक लड़की होने के नाते बहुत डर लगता है. जब मैं सड़कों पर चल रही होती हूं और कोई मुझे तंग करता है तो मैं डर जाती हूं. इसी वजह से मैं बाहर जाना नहीं चाहती और अगर जाती भी हूं तो ख्याल रखती हूं कि इस तरह के कपड़े न पहनूं जिससे लोगों का ध्यान मेरी तरफ़ जाए.”

लेकिन पारंपरिक तरीके से या सतर्क हो कर कपड़े पहनना भी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है.

पारंपरिक कपड़ों में भी छेड़छाड़

वो युवती कहती है कि अगर महिलाएं नकाब़ भी पहनें तो भी उन्हें ज़्यादती का सामना करना पड़ सकता है.

वो कहती हैं, “मिस्र की ज़्यादातर महिलाएं हिजाब पहनती हैं लेकिन उनमें से कई ने यौन उत्पीड़न का सामना किया है. आंकड़े बताते हैं कि ज़्यादातर महिलाएं जिन्होंने यौन उत्पीड़न का सामना किया उन्होंने या तो सिर ढका हुआ था या फिर पूरी तरह से नकाब़ में थीं.”

वर्ष 2008 में मिस्र में महिलाओं के अधिकारों के लिए काम कर रही एक संस्था 'सेंटर फ़ॉर वुमन राइट्स' ने एक सर्वे में पाया था कि 80 फ़ीसदी से भी अधिक महिलाओं ने यौन उत्पीड़न का सामना किया है और उनमें से अधिकतर महिलाओं ने सिर ढका हुआ था.

पुरुष-प्रधान समाज

महिलांओं को छेड़ने वाले पुरुषों में युवा लड़कों की संख्या बढ़ रही है.

काहिरा में स्थित अमरीकी विश्विद्यालय में समाजशास्त्री सैद सादेक कहते हैं कि इस समस्या की जड़ में मिस्र में बढ़ती इस्लामी रूढ़ीवादिता और पुरुष-प्रधान प्रवृति शामिल है.

वो कहते हैं, “पुरुष-प्रधान संस्कृति ये मानने को तैयार नहीं है कि महिलाएं पुरुष से ऊंची हो सकती हैं. जब कुछ महिलाओं ने अच्छी शिक्षा ली और वो कामकाज में पुरुषों से उपर चली गई तो पीछे रहने वाले पुरुषों ने बराबरी करने के लिए उनपर यौन उत्पीड़न का सहारा लिया. इसके अलावा धार्मिक कट्टरवादिता के बढ़ने पर भी महिलाओं पर आक्रमण किया गया. वो चाहते हैं कि महिलाएं घर वापस जाएं और काम न करें.”

इस तरह के चलन से मिस्र में कई पुरुष भी सकते में है. उनका कहना है कि वो बहुत निराश हैं क्योंकि उन्हें अपनी मां-बहन की सुरक्षा का डर लगा रहता है.

वहीं कई महिलाओं के लिए सवाल मूलभूत आज़ादी का है.

जैसा कि काहिरा में रहने वाली नैन्सी कहती हैं, “मैं चाहती हूं की जब मैं सड़कों पर चलूं तो सुरक्षित महसूस करूं और एक इंसान की तरह रहूं. किसी को भी मुझे छूने या तंग करने का अधिकार नहीं है.”

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