वेतन मामले में सैन्य अधिकारियों की जीत

 बुधवार, 5 सितंबर, 2012 को 05:54 IST तक के समाचार

सुप्रीम कोर्ट ने सैन्य अफसरों को बकाया सोलह सौ करोड़ रुपये देने का केंद्र सरकार को निर्देश दिया है.

सशस्त्र सेनाओं के कमीशंड अधिकारियों ने लंबे समय से चली आ रही वेतन विसंगति संबंधी लड़ाई जीत ली है.

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार को चौथे वेतन आयोग से प्रभावित हुए सैन्य अधिकारियों का वेतनमान दोबारा निर्धारित करने के निर्देश दिये.

कोर्ट ने आदेश दिया कि एक जनवरी 1986 के बाद से करीब बीस हजार अधिकारियों के बकाए वेतन का भुगतान भी किया जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा है कि बकाया राशि का भुगतान 12 हफ्तों के भीतर किया जाए.

माना जा रहा है कि इससे सरकार पर करीब 15 हजार करोड़ रुपये का भार आएगा.

सेना के वकीलों के मुताबिक सेना के इतिहास में ये अब तक के सबसे बडे़ फैसलों में से एक है.

फायदा

सैन्य अधिकारियों का प्रतिनिधत्व कर रहे अधिवक्ता ऐश्वर्य भट्टी के मुताबिक उच्चतम न्यायालय के इस आदेश से बड़ी संख्या में उन अधिकारियों को फायदा होगा, जो एक जनवरी 1986 और एक जनवरी 2006 के बीच सेना में कैप्टन से लेकर ब्रिगेडियर रैंक पर रहे हैं. साथ ही वायुसेना एवं नौसेना में समान रैंक पर रहे हैं.

शीर्ष न्यायालय ने केंद्र को एक जनवरी 2006 से छह प्रतिशत की दर से सभी अधिकारियों को ब्याज अदा करने को भी कहा, चाहे उन्होंने किसी उच्च न्यायालय में या सशस्त्र बल न्यायाधिकरण में 12 हफ्ते के अंदर याचिका दायर की हो या नहीं.

पीठ ने निर्देश दिया कि किसी भी उच्च न्यायालय में या सशस्त्र बल न्यायाधिकरण की पीठ में समान पद पर आसीन अधिकारियों की लंबित सभी याचिकाएं इस आदेश से संचालित होंगी.

न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा, न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर और न्यायमूर्ति अनिल आर दवे ने आठ मार्च 2010 के आदेश में संशोधन करने की मांग को लेकर केंद्र की ओर से दाखिल सभी अर्जियों को खारिज कर दिया.

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