क्या है हक्क़ानी नेटवर्क

 शुक्रवार, 7 सितंबर, 2012 को 21:25 IST तक के समाचार

हक्कानी गुट को एक समय अमरीकी खुफिया एजेंसी सीआईए का समर्थन हासिल था जब वो पूर्व सोवियत संघ के खिलाफ लड़ रहा था. बाद में ये हक्कानी नेटवर्क बड़ा पश्चिम विरोधी गुट बनकर उभरा.

हक्कानी नेटवर्क पर आरोप है कि अफगानिस्तान में सरकारी, भारतीय और पश्चिमी देशों के ठिकानों पर उसने कई बड़े हमले किए हैं.

पाकिस्तानी अधिकारी हक्कानी नेटवर्क को मुख्यत अफगान चरमपंथी गुट बताते हैं. लेकिन इसकी जड़े पाकिस्तान के अंदर तक फैली हैं. हमेशा से अटकलें लगती रही हैं कि पाकिस्तानी सुरक्षा तंत्र में कुछ लोगों में इसकी खास पैठ है.

हक्कानी नेटवर्क के मुखिया रहे हैं जलालुद्दीन हक्कानी. उन्होंने 80 के दशक में उत्तरी वज़रिस्तान से पूर्व सोवियत संघ के सैनिकों के खिलाफ अभियान चलाया था.

कई अमरीकी अधिकारियों का दावा है कि उस समय जलालुद्दीन हक्कानी सीआईए के लिए काफी अहम और खास थे.

पश्चिमी देशों के सैनिकों को खासा नुकसान

वे पाकिस्तानी की आईएसआई के भी पसंदीदा कमांडर थे. उस समय आईएसआई ही ये तय करती थी कि सोवियत संघ से लड़ने के लिए किस कमांडर को कितना अंतरराष्ट्रीय पैसा और हथियार मिलेंगे.

पश्चिमी देशों और पाकिस्तान में बहुत से लोग अब भी मानते हैं कि पाकिस्तान के कुछ शक्तिशाली लोगों की रणनीतिक और दूसरी तरह की मदद के बगैर हक्कानी नेटवर्क की पहुँच बहुत कम होगी.

वजीरिस्तान को हक्कानी नेटवर्क ने अपना गढ़ बनाया है. आज यहाँ से सक्रिय चरमपंथियों ने अफगानिस्तान में पश्चिमी सैनिकों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाया है.

इनमें से सबसे ज्यादा घातक गुट है पंजाबी तालिबान और अरब और मध्य एशियाई मूल के लड़ाके. ये लड़ाके हक्कानी नेटवर्क का मुख्य बल हैं.

वजीरिस्तान स्थित चरमपंथियों की बढ़ती ताकत को ही अफगानिस्तान में अमरीका की खराब हालत का कारण माना जाता रहा है. जब 2001 में अमरीका ने अफगानिस्तान में बमबारी अभियान चलाया था, तब हजारों अरब और मध्य एशियाई लड़ाके वजीरिस्तान आ गए थे.

पाकिस्तान ने लड़ाकों का आना रोकने के लिए थोड़ा बहुत प्रयास किया लेकिन इस कारण 2002 और 2004 में दक्षिणी वजीरिस्तान में भीषण संघर्ष हुआ था जिसमें 700 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे.

इसके बाद पाकिस्तान ने अपने हाथ खींच लिए और इन लड़ाकों को पैर जमाने दिए.

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