अमरीका: ग्यारह साल बाद भी वैसा ही खौफ

 मंगलवार, 11 सितंबर, 2012 को 19:07 IST तक के समाचार

न्यूयॉर्क में आतंकी हमले में मारे गए लोगों को उनके परिजन हर साल याद करते हैं

अमरीका में साल 2001 में 11 सितंबर के दिन न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन औऱ पेन्सिलवेनिया में अल कायदा के आतंकवादियों द्वारा अपहृत यात्री विमानों के ज़रिए किए गए आतंकवादी हमलों को अब 11 वर्ष बीत गए हैं.

उन हमलों के बाद से ही अमरीकी सरकार ने देश में सुरक्षा के कई नियम बदले और देश से बाहर स्थित आतंकवादी गुटों को चुन-चुन कर निशाना बना रहा है.

मई 2011 में उन हमलों का ज़िम्मेदार चरमपंथी ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में मारा गया और अमरीकी सरकार के सैन्य अभियानों से ही उसके अल कायदा संगठन को भी काफ़ी कमज़ोर किए जाने का दावा किया जाता है.

खौफ

लेकिन अमरीका में अब भी उन हमलों का साया मौजूद है. आम लोगों में आतंकवादी हमलों का डर कम तो हुआ है लेकिन खत्म नहीं.

भारतीय मूल के अमरीकी डॉक्टर पीयूष अग्रवाल जॉर्ज डब्ल्यू बुश के प्रशासन में शामिल थे.

"देखिए, डर तो है. और मेरी नज़र में डर सच्चा है औऱ वारदातें भी होती रहती हैं. डर इसलिए है क्योंकि जिन लोगों ने सोच रखा है कि यह उनके हित में है कि वह अमरीका पर हमला करें तो वह करते रहेंगे. औऱ इसका समाधान नज़र नहीं आता, जो बहुत ही दुखद है"

पीयूष अग्रवाल, भारतीय मूल के अमरीकी डॉक्टर

वह मानते हैं कि अब भी अमरीकी लोगों में डर है जो आसानी से जाने वाला नहीं है.

डॉक्टर पीयूष अग्रवाल कहते हैं, "देखिए, डर तो है. और मेरी नज़र में डर सच्चा है औऱ वारदातें भी होती रहती हैं. डर इसलिए है क्योंकि जिन लोगों ने सोच रखा है कि यह उनके हित में है कि वह अमरीका पर हमला करें तो वह करते रहेंगे. औऱ इसका समाधान नज़र नहीं आता, जो बहुत ही दुखद है."

अमरीका में सुरक्षा मामलों के जानकार यह मानते हैं कि जॉर्ज डब्ल्यू बुश और बराक ओबामा दोंनो प्रशासनों द्वारा उठाए गए कदमों, जैसे आतंकवादियों के खिलाफ़ सैन्य और गुप्त अभियानों और सुरक्षा के कड़े प्रबंधों के कारण देश के अंदर 2001 के बाद कोई औऱ बड़ा आतंकवादी हमला नहीं हुआ है.

मौजूदा अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के दौर में ओसामा बिन लादेन को मारा गया जिससे जनता में काफ़ी सुकून देखा जा सकता है.

चुनाव

अमरीका में दो महीने के भीतर ही राष्ट्रपति पद के लिए आम चुनाव होने हैं औऱ डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार बराक ओबामा हैं औऱ उनके सामने हैं रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार मिट रॉमनी.

वैसे तो इस चुनाव में सुरक्षा या आतंकवाद बड़े मुद्दे नहीं हैं लेकिन फिर भी बराक ओबामा कोई मौका हाथ से नहीं जाने देते. जब वह जनता को यह याद न दिलाएं कि उनके दौर में ही कुख्यात आतंकवादी ओसामा बिन लादेन मारा गया.

11 सितंबर के हमलों की बरसी पर बहैसियत राष्ट्रपति के बराक ओबामा अमरीकी लोगों को यकीन दिलाते हैं कि अमरीका अब काफ़ी सुरक्षित है और आतंकवादियों को तबाह करने का काम जारी है.

ग्राउंड जीरो का दृश्य

देश के नाम अपने साप्ताहिक संदेश में राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा,

"हमने अल कायदा के खिलाफ़ जंग जारी रखी हुई है, हमने उस संगठन के अहम लोगों को मारकर उसकी कमर तोड़ दी है और अब अल कायदा हार की कगार पर है. औऱ हमारे सैनिकों और गुप्तचर संसथाओं के एजेंटों की बहादुरी और सलाहियतों के कारण अब ओसामा बिन लादेन अमरीका पर हमले करने की कभी भी धमकी नहीं दे सकेगा. अब न्यू यॉर्क में एक नया टावर बनाया जा रहा है. और हमारा देश पहले से अधिक सुरक्षित, मज़बूत औऱ विश्व में सम्मानित है."

"हमने अल कायदा के खिलाफ़ जंग जारी रखी हुई है, हमने उस संगठन के अहम लोगों को मारकर उसकी कमर तोड़ दी है और अब अल कायदा हार की कगार पर है"

बराक ओबामा, अमरीका के राष्ट्रपति

राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि 2001 के आतंकवादी हमलों के बाद पिछला दशक अमरीकी लोगों के लिए बहुत दिक्कत भरा था, लेकिन उन्होंने अमरीकी जनता से उन हमलों में मरने वालों को श्रंद्वांजलि देने की अपील की है.

लेकिन सुरक्षा एजेंसियां यह कहती रही हैं कि अल कायदा संगठन बराबर अमरीका पर हमले करने की कोशिश में लगा है. फिर भी आतंकवादी अमरीका पर हमले करने में कामयाब नहीं हुए.

अल कायदा हुआ कमजोर

और इसका सबसे बड़ा कारण यह माना जाता है कि अल कायदा की क्षमता इतनी नहीं रह गई कि वह संगठन बड़े पैमाने पर अमरीका के अंदर 11 सितंबर जैसे कोई और हमले कर सके.

लेकिन सुरक्षा मामलों के जानकार यह भी कहते हैं कि अल कायदा जैसे संगठन के कुछ आतंकवादी अमरीका के अंदर अब भी छिपकर रह रहे हैं.

कामरान बुखारी स्ट्रेटफ़ॉर नामक एक निजी अमरीकी कंपनी के सुरक्षा विशेषज्ञ हैं. अमरीका के अंदर आतंकवादी गुटों के सदस्यों के अब भी छुपे रहने के बारे में वह कहते हैं,

"अमरीका के अंदर बहुत सारे ऐसे लोग पिछले 11 सालों में पकड़े गए हैं जो अमरीका के अंदर आतंकवादी हमले करना चाहते थे. लेकिन उन सभी के इरादे तो थे हमले करने के लेकिन उनकी सलाहियत नहीं थी. उनकी योजना को सुरक्षा एजेंसियों ने नाकाम कर दिया. यह इसलिए भी हुआ क्योंकि अल कायदा अब बहुत ही कमज़ोर संगठन हो गया है और इसका सबूत यह है कि पश्चिम के देशों में 2005 के बाद से कोई बड़ा हमला सफ़ल नहीं हुआ है."

"अमरीका के अंदर बहुत सारे ऐसे लोग पिछले 11 सालों में पकड़े गए हैं जो अमरीका के अंदर आतंकवादी हमले करना चाहते थे. लेकिन उन सभी के इरादे तो थे हमले करने के लेकिन उनकी सलाहियत नहीं थी"

कामरान बुखारी, सुरक्षा विशेषज्ञ

बुखारी का कहना है कि अल कायदा अब कई छोटे छोटे गुटों में बंट गया है और उसके सदस्य विश्व भर के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं.

और अमरीका की विश्व भर में आतंकवाद से जंग अब भी जारी है.

हमले

अमरीका के सरकारी आंकड़ों के अनुसार साल 2011 में विश्व के 70 देशों में 10 हज़ार से अधिक आतंकवादी हमले किए गए जिनके कारण 12 हज़ार 500 लोगों की जानें गईं. लेकिन हमलों की यह संख्या 2010 की संख्या से 12 प्रतिशत कम है.

अल कायदा और उसके विभिन्न गुट नाइजीरिया, सोमालिया, यमन और पाकिस्तान जैसे देशों में सक्रिय हैं.

अमरीकी विदेश मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट में भी यह बात मानी गई है कि साल 2011 आतंकवाद विरोधी मुहिम के लिए बहुत अहम था. रिपोर्ट में कहा गया है कि ओसामा बिन लादेन के अलावा अल कायदा के कई अहम नेता मारे गए जिसके बाद अब उस संगठन का पतन निश्चित है.

और अमरीकी प्रशासन और खासकर सुरक्षा एजेंसियां आम लोगों में सुरक्षा को लेकर काफ़ी हद तक विश्वास जगाने में कामयाब रही हैं.

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