अमरीका करेगा दूतावास हमले की जांच

Image caption बेनगाजी में इस्लाम पर बनी फिल्म के विरोधियों ने अमरीकी वाणिज्य दूतावास पर गोलीबारी और बम हमले किए

अमरीकी अधिकारियों के अनुसार अमरीका इस बात की जांच कर रहा हैं कि कहीं लीबिया में हुआ हमला पूर्व नियोजित तो नहीं था.

लीबिया में अमरीकी वाणिज्य दूतावास पर हुए हमले में अमरीकी राजदूत समेत कई लोग मारे गए थे.

वाणिज्य दूतावास हमलावरों के जिहादी संगठनों से संबध होने की खबरों के बीच अमरीकी अधिकारियों का कहना हैं कि वाणिज्य दूतावास पर हुआ हमला बहुत ही जटिल और पेशेवर था.

जबकि पहले माना जा रहा था कि ये हमला इस्लाम विरोधी फ़िल्म के विरोध में अचानक किया गया हमला था.

हथियारबंद हमलावरों ने मंगलवार रात को लीबिया के शहर बेनगाज़ी में अमरीकी वाणिज्य दूतावास पर हमला कर दिया था.

कब-कब हुआ इस्लाम और कुरान का अपमान

इस हमले में अमरीकी राजदूत के अलावा तीन अमरीकी और 10 लीबियाई नागरिक मारे गए थे.

वहीं मिस्त्र की राजधानी कायरो में अमरीकी दूतावास के बाहर सुरक्षा कर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई है.ये प्रदर्शनकारी भी इस्लाम के विरोध में बनी फ़िल्म का निर्देशन कर रहे थे.

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने लीबिया के बेनगाजी में अमरीकी वाणिज्य दूतावास पर हुए हमले और इस हमले में राजदूत जॉन क्रिस्टोफर स्टीवन्स समेत अन्य तीन अमरीकियों के मारे जाने की कड़े शब्दों में निंदा की है.

बराक ओबामा ने राजदूत के हत्यारों को कानून के कटघरे तक लाने का संकल्प लिया.

लेकिन ओबामा ने ये भी कहा कि इस हमले के बावजूद लीबिया की नई सरकार और अमरीका के ऱिश्तों पर कोई आंच नही आएगी.

बेनगाज़ी में अमरीकियों पर हमला

Image caption लीबियाई अधिकारियों के अनुसार क्रिस्टोफर स्टीवनस् की मृत्यु दम घुटने से हुई

रिपोर्टों के अनुसार राजदूत स्टीवन्स हमले के बाद अपने कर्मचारियों के साथ परिसर को खाली करने के मकसद से वहाँ गए.

फिर वे वहाँ से किसी सुरक्षित जगह के लिए जा रहे थे जब बंदूकधारियों ने दोबारा भीषण हमला किया जिससे सुरक्षा कर्मचारियों को भी पीछे हटना पड़ा.

बीबीसी संवाददाता राणा जावाद के अनुसार कुछ रिपोर्टों मे कहा गया है कि लड़ाकों का एक गुट अंसार अल-शरिया ब्रिगेड इस हमले के लिए जिम्मेदार है लेकिन इस गुट ने इससे इनकार किया है.

इस्लाम को 'कैंसर' बताती फिल्म का विरोध

लीबिया की नेशनल असेंबली के अध्यक्ष मोहम्मद मागरेफ ने इस घटना पर अमरीका से माफी मांगी है.

उधर अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने बयान में कहा है, "क्रिस अमरीका के अत्यंत बहादुर प्रतिनिधि के उदाहरण थे. लीबिया में क्रांति के दौरान उन्होंने देश (अमरीका) और लीबियाई लोगों और बेनगाजी में हमारे मिशन की सेवा की थी."

ओबामा ने पूरी दुनिया में अमरीकी कूटनयिक दफ्तरों की सुरक्षा बढ़ाने का आदेश दिया है.

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